सबरीमाला पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती नहीं देगी केरल सरकार, संघ ने कहा भावनाओं का ख्याल नहीं किया
तिरूवनंतपुरम। केरल सरकार सबरीमाला के भगवान अयप्पा मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को पूजा की अनुमति देने केफैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर नहीं करेगी। विपक्ष केरल सरकार से फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग कर रहा था। इसे खारिज करे हुए साफ किया कि फैसले को लागू किया जाएगा और 16 अक्टूबर से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के लिए इंतजाम किए जाएंगे।

कांग्रेस ने कहा कि फैसले को लागू करने का केरल सरकार का कदम एकतरफा है और ये अय्यप्पा श्रद्धालुओं की भावनाओं के खिलाफ है, जो कि राज्य में बहुसंख्यक हैं। उन्होंने कहा कि टीडीबी अध्यक्ष पद्मकुमार पहले इस फैसले की समीक्षा का मन बना चुके थे, लेकिन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने उन्हें ऐसा करने से रोका।
वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के सबरीमाला फैसले को लागू करते हुए केरल सरकार ने श्रद्धालुओं की भावनाओं को नजरअंदाज किया है। दिल्ली में एक कार्यक्रम में संघ सरकार्यवाह सुरेश भैयाजी जोशी ने कहा कि सबरीमला का मामला परंपरा और धर्म से जुड़ा है। इससे श्रद्धालुओं की भावनाए जुड़ी हैं। परंपरा टूटने के चलते प्रतिक्रिया हो रही है। सभी पक्षकारों को इस मामले का शांतिपूर्वक तरीके से हल निकालना चाहिए।
विजयन ने कहा है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन करेगी और मंदिर जाने वाली महिलाओं के लिए आवश्यक व्यवस्था करेगी। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश को लागू करना सरकार की जिम्मेदारी है। बता दे कि सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा थी और कहा था कि हर उम्र की महिला मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी।












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