इसरो के पूर्व वैज्ञानिक नांबी नारायण को पद्म पुरस्कार मिलने पर केरल के पूर्व DGP ने उठाए सवाल
नई दिल्ली। इसरो के जाने माने वैज्ञानिक से लेकर जासूसी के आरोप का सामना कर चुके नांबी नारायण को सरकार ने पद्म भूषण पुरस्कार से नवाजा है। उन्हें पद्म भूषण प्रदान किए जाने की घोषणा के एक दिन बाद केरल के पूर्व डीजीपी टीपी सेनकुमार ने उन्हें औसत से निचले दर्जे का वैज्ञानिक करार दिया है। 1994 में इसरो जासूसी मामले में गिरफ्तार नारायणन को पिछले साल सितंबर में उस राहत मिली जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उन्हें फंसाया गया था। उन्होंने सेनकुमार की टिप्पणी को खारिज कर दिया है।

सेनकुमार ने कहा, जब सुप्रीम कोर्ट ने इसरो मुद्दे में सच्चाई का पता लगाने के लिए एक सेवानिवृत्त एससी जज की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। तो जो लोग अदालत के आदेशों का पालन करने के लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें समिति के निष्कर्षों का इंतजार करना चाहिए (जब तक कि खुलासा नहीं किया जाता) ...। यदि समिति को पता चलता है कि नारायणन एक महान वैज्ञानिक थे। तो उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किए जाने पर मैं स्वागत करने में संकोच नहीं करुंगा।
सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि यह घोषणा ऐसे समय की गई है जब सुप्रीम कोर्ट की समिति इसरो जासूसी मामले को देख रही है। उन्होंने कहा, अगर पद्म पुरस्कारों के लिए यह मानक है तो गोविंद चामी, अमीरुल इस्लाम (दोनों दो महिलाओं की हत्या में आरोपित) और मरियम रशीदा (नांबी नारायण के साथ जासूसी मामले में एक आरोपित) जैसे लोगों को अगले साल पद्म पुरस्कार मिलेंगे।
सेनकुमार ने नांबी नारायण को पद्म भूषण देने वाले सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यह अमृत के साथ जहर मिलाने जैसा है। जब मैं इस मामले की फिर से जांच कर रहा था, तो मैंने इसरो में कई लोगों से पूछा था कि उनका (नारायणन) योगदान क्या है तो सभी ने नकारात्मक उत्तर दिया था। मैंने उस समय के ISRO के चेयरमैन जी माधवन नायर से भी यही सवाल पूछा था। जिन लोगों ने यह प्रायोजित किया है और पुरस्कार दिया, उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि 1994 में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति का रास्ता अपनाने वाले एक औसत वैज्ञानिक ने राष्ट्र और इसरो में क्या योगदान दिया है?












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