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जीएसटी क्षतिपूर्ति को लेकर केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने पीएम मोदी को लिखा खत

नई दिल्ली। केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) क्षतिपूर्ति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखा है। उन्होंने अपने खत में प्रधानमंत्री से कहा है कि वह वित्त मंत्रालय को इस बात की सलाह दें कि वो राज्यों पर जीएसटी क्षतिपूर्ति का बोझ ना डालें। विजयन ने कहा है कि सरकार को वस्तु एवं सेवा कर (राज्यों को क्षतिपूर्ति) अधिनियम, 2017 का पालन करना चाहिए और वित्त मंत्रालय द्वारा राज्यों को भेजे गए दो विकल्पों को वापस ले लिया जाना चाहिए।

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    बता दें गैर बीजेपी राज्य सरकारों ने केंद्र के जीएसटी को लेकर दिए गए विकल्पों को मानने से इनकार कर दिया है। दिल्ली, पंजाब, तमिलनाडु के बाद अब केरल ने भी इसपर विरोध जताया है। दरअसल कोरोना वायरस महामारी के कारण देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है। अनलॉक की प्रक्रिया बेशक जारी है, लेकिन फिर भी अर्थव्यवस्था को पटरी पर आने में वक्त लगेगा। इस बीच अप्रैल से राज्यों का जीएसटी भुगतान भी केंद्र सरकार की ओर से नहीं किया गया है। जिस पर शनिवार को केंद्र सरकार ने कहा कि वो जल्द ही सभी राज्यों का बकाया भुगतान कर देंगे। साथ ही इसके लिए दो विकल्प भी सुझाए गए हैं।

    राज्यों को लिखे एक पत्र में केंद्र सरकार ने कहा कि कोरोना वायरस 'एक्ट ऑफ गाड' है। जिस वजह से राजस्व में भारी कमी आई है। ऐसे में वो राज्यों के बकाया जीएसटी का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। जल्द ही केंद्र की ओर से इसका पूरा भुगतान कर दिया जाएगा। केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा कि वो भविष्य में होने वाले कर प्राप्ति के एवज में बाजार से कर्ज ले सकते हैं। वित्त मंत्री के मुताबिक घाटे की भरपाई के लिए राज्य विशेष विंडो का उपयोग करते हुए कर्ज ले सकते हैं। इस कर्ज को पांच साल बाद जीएसटी उपकर संग्रह से लौटाया जा सकता है।

    कौन से हैं दो विकल्प-

    राज्यों को जो दो विकल्प दिए गए हैं, उनमें पहला विकल्प ये है कि राज्यों को रिजर्व बैंक से 97,000 करोड़ का विशेष कर्ज मिलेगा। जिसपर बयाज काफी कम लगेगा। दूसरा विकल्प ये है कि राज्‍य विशेष विंडो की मदद से 2,35,000 करोड़ रुपये के जीएसटी क्षतिपूर्ति गैप को RBI के साथ ​सलाह मशविरा कर भरें।

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