Kavach: रेलवे का टक्कर रोकने बड़ा बयान, अगले साल ट्रेनों में इंस्टॉल होगा सिस्टम
ओडिशा के बालासोर में हुई भयानक ट्रिपल ट्रेन दुर्घटना के बाद रेल मंत्रालय ने कहा, ट्रेनों के टकराव को रोकने के लिए डेवलप कवच प्रणाली अगले साल ट्रेनों में इंस्टॉल कराई जा सकती है।

Kavach को ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली (TCAS) भी कहा जाता है। इसका ट्रायल पिछले साल शुरू किया गया था। खुद रेल मंत्री वैष्णव को ट्रायल के दौरान ट्रेन के इंजन में मौजूद देखा गया था।
बालासोर रेल हादसे के बाद कवच प्रणाली पर चर्चा हो रही है। रेल मंत्रालय के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने शनिवार को बताया कि कवच प्रणाली अगले साल ट्रेनों में स्थापित होने की संभावना है।
गौरतलब है कि शुक्रवार शाम ओडिशा के बालासोर में कोरोमंडल एक्सप्रेस ट्रेन बेपटरी हुई। इसके बाद यशवंतपुर-हावड़ा एक्सप्रेस और एक मालगाड़ी भी इसी स्थान पर दुर्घटनाग्रस्त हुई। हादसे में लगभग 288 लोगों की जान चली गई जबकि 700 से अधिक लोग घायल हो गए। ट्रेनों के 17 डिब्बे पटरी से उतर गए।
हादसे के बाद कई सवाल भी खड़े हुए हैं। हालांकि, रेल मंत्री ने कहा कि ये राजनीति का समय नहीं है। खुद पीएम मोदी ने भी दोषियों को नहीं बख्शने के सख्त संकेत दिए हैं। कवच प्रणाली भी चर्चा में है। कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा, जब रेल मंत्री बार-बार कहते हैं कि हमारा सिस्टम सुरक्षित है और कोई गंभीर हादसा नहीं हो सकता तो ये कैसे हो गया?
दिग्विजय सिंह ने कहा, 'लाल बहादुर शास्त्री ने पहले एक ट्रेन हादसे में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हम पीएम मोदी के मंत्रिमंडल से यह उम्मीद नहीं करते हैं, लेकिन अगर उन्हें (अश्विनी वैष्णव को) थोड़ी सी भी शर्म है, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
कवच पर सवाल और हादसे के कारण इस्तीफे की मांग के बीच रेलवे के प्रवक्ता ने कहा कि Kavach तकनीक देश भर में शुरू की गई है और इसे कई रेलवे लाइनों में उपयोग के लिए भी मंजूरी दी गई है।
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता अमिताभ शर्मा ने बताया कि ट्रेन टक्कर बचाव प्रणाली (टीसीएएस) या कवच का पिछले साल परीक्षण किया गया था। यह तकनीक ट्रेनों को एक ही ट्रैक पर आने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाने में सक्षम बनाती है।"
शर्मा ने कहा कि 2024 तक ट्रेनों में तकनीक स्थापित होने की संभावना है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में रेलवे द्वारा उपयोग किया जा रहा टक्कर रोधी उपकरण एक पुरानी तकनीक का प्रतिनिधित्व करता है। यह तब काम करता है जब लोकोमोटिव निकटता में होते हैं।
उन्होंने कहा, अगर लोको पायलट लाल सिग्नल को पार कर जाता है, तो स्वचालित ब्रेक नहीं लगाए जा सकते। Kavach तकनीक का संस्करण, TCAS स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है। इस पर आगे भी काम चल रहा है और इसे देश भर में शुरू किया गया है।
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, सरकार को उम्मीद है कि अगले साल तक इसे ट्रेनों में स्थापित कर दिया जाएगा। बालासोर हादसे के बाद क्षतिग्रस्त रेल पटरियों को बहाल करने का काम चल रहा है और इसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा, "पहले डाउनलाइन को बहाल किया जाएगा।
बता दें कि हादसे के बाद 58 ट्रेनों को रद्द किया गया, 81 को डायवर्ट करना पड़ा और 10 को टर्मिनेट किया गया। अधिकारियों के हवाले से आई एक रिपोर्ट के अनुसार, कुल 1,175 घायल यात्रियों को विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
बालासोर हादसे के बाद इलाज के लिए भर्ती कराए गए लोगों में से 793 को इलाज के बाद छुट्टी दे दी गई है। वर्तमान में 382 यात्रियों का विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज चल रहा है।












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