काशी-तमिल संगमम में फिर हो रहा है जुटान, काशी में दिख रहे दक्षिण के कई रंग
Kashi Tamil Sangamam: 17 दिसंबर को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी काशी तमिल संगमम का उद्घाटन कर रहे हैं। उत्तरवाहिनी गंगा के तट पर काशी के नमो घाट पर पूरी तैयारी कर ली गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार सुरक्षा व्यवस्था सहित अन्य तैयारियों का बारीकियों से मुआयना कर रहे हैं। काशी तमिल संगमम का आयोजन 17 से 30 दिसंबर 2023 तक वाराणसी में किया जाएगा। काशी तमिल संगमम की एक्स पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा; ''अपार उत्साह है क्योंकि काशी एक बार फिर समृद्ध संस्कृतियों के उत्सव काशी तमिल संगमम के लिए लोगों का स्वागत करने के लिए तैयार है। यह मंच भारत की एकता और विविधता का प्रमाण है, जो 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना को मजबूत करता है।''
हाल के वर्षों में बनारस बरबस की सबका ध्यान खींच रहा है। पहले लोग केवल तीर्थ यात्रा के कारण आते होंगे, लेकिन अब तो देशाटन और पर्यटन को ध्यान में रखकर युवाओं की संख्या भी खूब आ रही है। बनारस, वाराणसी, काशी - नाम कोई भी ले लें, यहां आकर हर कोई घूमना चाहता है। चंद घंटे घूमने के बाद जब वह आराम करने की सोचता है, तो उसे भूख लगती है। उस भूख को शांत करने के लिए यहां साउथ इंडियन डिश लोगों की पसंद बनता है। स्वाद में बेमिसाल और आपको रखे पूरी तरह से फिट। कोरोना के बाद लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर अधिक सचेत हुए हैं, ऐसे में हर बनारस आने वाले को साउथ इंडियन व्यंजन बरबस ही अपनी ओर खींच लेता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, कोई भी चौक-चौराहा या रेस्तरां ऐसा नहीं है, जहां आपको साउथ इंडियन व्यंजन न मिलें। देश की आजादी से पहले 1926 में बनारस में दक्षिण भारतीय व्यंजन परोसने की शुरुआत अय्यर परिवार ने की थी। 1950 के बाद कुछ चुनिंदा सिनेमा हॉल में सुबह का एक शो दक्षिण भारतीयों के लिए चला करता था। बाबा विश्वनाथ मंदिर से पहले गोदोलिया चौक के पास अय्यर कैफे आज भी लोगों को पुराने दिनों की याद ताजा कर देता है। यहां पुराने लोगों की जमघट आज भी देखी जा सकती है।
जो भी लोग बनारस आते हैं, वो बाबा विश्वनाथ के दर्शन के साथ ही काशी हिंदू विश्वविद्यालय आते हैं। यहां भी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन करते हैं। इस मंदिर के बाहर दोनों ओर खाने की जितनी दुकानें हैं, उसमें प्रायः हर दुकान में आपको मसाला डोसा, इडली, बड़ा, उत्तपम आदि मिल ही जाएगा। लोग बड़े चाव से इसे खाते हैं।
वाराणसी में साउथ इंडियन नाश्ते का काफी चलन है। ज़्यादातर स्टॉल्स पर लगभग ये नाश्ता मिल जाता है लेकिन अलग-अलग लोगों के बनाने की वजह से टेस्ट में थोड़ा बदलाव रहता है। बड़ा सा रेस्तरां हों या सड़क पर लगाए जाने वाला रेहड़ी - आपको यहां मसाल डोसा, इडली आदि मिल ही जाएगा। उत्तपम-इडली-डोसा यूँ तो दक्षिण भारतीय व्यंजन है। लेकिन बनारसियों ने उत्तपम का कान पकड़कर इसे बनारसी बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा है। यहां सुबह-सुबह ही चौराहे- गलियों में ठेले और कोने-अत्तरों के रेले में तवा पर मक्खन दहकने लगता है। कच्चे दाल-चावल का घोल,जिसे चौड़े-चकले दहकते तवे पर चपाती का आकार देने के बाद उस पर बारीक कटे टमाटर-प्याज और धनिया-मिर्च देकर सिझाया जाता है।
यूं तो काशी की सुबह कचौड़ी और जलेबी से होती है और देर रात तक लोग मलाई टोस्ट, मक्खन टोस्ट और चाय का आनंद उठाते रहते हैं। लेकिन, दिन में यहा तमिलनाडु के प्रसिद्ध डिश की डिमांड पूरे शबाब पर होती है। सागर रत्ना' वाराणसी में एक अच्छा खाने की भोजनालय है, जो दक्षिण भारतीय, उत्तर भारतीय और चाइनीज़ शाकाहारियों के लिए उचित-सुखद वातावरण है, जहां मेहमान सबसे अच्छा भोजन और एक यादगार भोजन अनुभव का आनंद ले सकते हैं।












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