कोरोना मरीज को नहीं मिली एंबुलेंस, बीवी-बच्चों के साथ 4 किमी पैदल चलकर पहुंचा सीएम हाउस
बेंगलुरु। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है, यहां एक गरीब कोरोना मरीज के साथ ऐसा बर्ताव हुआ जिसने प्रशासन, स्वास्थ्य मंत्रालय और इंसानियत पर सवाल खड़े कर दिए हैं, यहां 32 वर्ष के एक गरीब बस ड्राइवर को स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से कोई मदद ना मिलने की वजह से बीमारी की हालत में 4 किमी पैदल चलकर सीएम हाउस तक जाना पड़ा।

दरअस बनशंकरी इलाके में रहने वाले बस ड्राइवर शंकर को बीते सोमवार को बुखार आया था, उसने जाकर कोरोना टेस्ट कराया था, गुरुवार रात 9.30 बजे उसे पता चला कि वो कोरोना संक्रमित है और उसे अस्पताल में भर्ती होने के लिए कहा गया, उसका घर कोविड सेंटर से काफी दूर था, उसने एंबुलेंस के लिए अस्पताल और हेल्प लाइन नंबर पर कॉल किया लेकिन ना तो एंबुलेंस आई और ना ही उसका फोन हेल्प लाइन नंबर पर उठा।
12 गुना 12 फीट के किराए के घर पर रहता है शंकर
शंकर यहां के 12 गुना 12 फीट के किराए के घर पर रहता है, उसके साथ उसकी बीवी, पांच साल का बेटा और 10 महीने की बच्ची रहती है, उसका कोई रिश्तेदार भी यहां नहीं है, उसके बेटे को भी बुखार आ रहा था, उसे अपने बेटे के भी स्वास्थ्य की चिंता थी, अस्पताल वाले बोले, सबको लेकर आइए तो टेस्ट हो जाएगा। लेकिन घंटों इंतजार करने के बाद भी कोई एंबुलेंस नहीं आई, उसके बाद वो अपने पूरे परिवार को लेकर खुद ही बाहर निकला लेकिन कोरोना संक्रमित होने के कारण किसी ने उसे और उसके परिवार को ऑटो में नहीं बैठाया।
4 किमी पैदल चलकर रात को करीब 1 बजे पहुंचा सीएम हाउस
ऐसे में हारकर वो पैदल ही परिवार संग 4 किमी पैदल चलकर रात को करीब 1 बजे सीएम हाउस पहुंचा। जहां जाकर उसने वहां के गार्डों को अपना हाल बताया, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया और उसके बाद उसे केसी जनरल अस्पताल में भर्ती कराया गया । आपको बता दें कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामले के कारण बेंगलुरू समेत राज्य के कई जिलों में लॉकडाउन लगा है। मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने कहा था कि राज्य में रोजाना कोरोना के मामले तेजी से बढ़ने के बीच विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर यह कदम उठाया गया है।












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