कर्नाटक चुनाव से पहले भाजपा को एक और झटका, BJP कलाबुरगी जिला युवा मोर्चा के महासचिव ने दिया इस्तीफा
कर्नाटक चुनाव से पहले भाजपा को एक और झटका लगा है। बीजेपी कलाबुरगी जिला युवा मोर्चा के महासचिव और पूर्व जिला पंचायत सदस्य अरविंद चौहान ने टिकट ना मिलने से नाराज होकर इस्तीफा दे दिया है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव 2023 को अब महज 23 दिन शेष बचे हैं और सत्तारुढ़ भाजपा के टिकट बंटवारें के बाद एक के बाद एक टिकट गिर रहे हैं। भाजपा की पहली उम्मीदवारों की लिस्ट जारी होने के बाद जो नाराज विधायकों और नेताओं का भाजपा से इस्तीफा देने का जो सिलसिला शुरू हुआ वो बादस्तूर जारी है।
भाजपा की अब तक तीस उम्मीदवारों की सूची जारी हो चुकी है तीसरी सूची सोमवार को जारी की गई थी उसके बाद सबसे पहले सीवी चंद्रशेखर ने टिकट ना मिलने से नाराज होकर भाजपा छोड़ जेडीएस ज्वॉइन कर ली।
इसी के चंद घंटे बाद बीजेपी कलाबुरगी जिला युवा मोर्चा के महासचिव और पूर्व जिला पंचायत सदस्य अरविंद चौहान ने चित्तपुर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट ना मिलने के बाद भारतीय जनता पार्टी से इस्तीफा दे दिया है।
बता दें इससे पहले सीवी चंद्रशेखर ने भी टिकट ना मिलने पर भाजपा से इस्तीफा दे दिया था। चंद्रशेखर वो नेता है जो 2028 से ही अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं।
इससे पहले भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व सीएम जगदीश शेट्टार ने भाजपा को तगड़ा झटका देते हुए कांग्रेस ज्वॉइन कर ली है। अब हुबली-धारवाड़ सेंट्रल सीट से वो कांग्रेस के टिकट पर जगदीश शेट्टार का मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार महेश तेंगिनाकाई से होगा।
वहीं शेट्टार से पहले कर्नाटक के पूर्व डिप्टी मुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी ने टिकट ना मिलने से नाराज होकर भाजपा से इस्तीफा दे दिया था और कांग्रेस ज्वॉइन कर ली है।
बता दें भाजपा ने 11 अप्रैल को अपने उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी, उसमें ही भाजपा ने मई मौजूदा विधायकों का टिकट काट कर 52 नए चेहरों को उम्मीदवार बनाया। जिसके बाद से ही भाजपा के विधायकों ने बगावती तेवर दिखाए और कुछ ने अपनी रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया और अधिकांश ने भाजपा छोड़कर भाजपा की घोर विरोधी पार्टी कांग्रेस या जेडीएस ज्वॉइन कर ली।
भाजपा ने पहली ही नहीं अपनी तीनों लिस्ट में ऐसे कई दिग्ग्ज नेताओं को टिकट नहीं दिया जो भाजपा के मजबूत स्तंभ थे लेकिन उन्हें टिकट ना देकर भाजपा ने उन्हें बगावत करने पर मजबूर कर दिया और उन्हें बगावत करने पर मजबूर कर दिया।












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