Karnataka election: कैसे लिंगायत मुद्दे पर कांग्रेस ने बीजेपी को उसी की चाल में उलझा दिया है?
Karnataka election 2023: कर्नाटक में लिंगायत समुदाय के मुद्दे पर कांग्रेस इसबार भाजपा को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है। जवाब में भाजपा ने भी मजबूत योजना तैयार की है।

कर्नाटक विधानसभा चुनाव में लिंगायत समुदाय का मुद्दा एक बार फिर से राज्य में अगली सरकार का भविष्य तय कर सकता है। कांग्रेस बीजेपी को वहां उसी चाल में उलझा रही है, जो उसने 1990 की दशक में शुरू किया था। इसलिए भाजपा में लिंगायत मुख्यमंत्री का मसला महत्वपूर्ण हो गया है।

लिंगायत सीएम बीजेपी के लिए बड़ा मुद्दा
भाजपा संसदीय बोर्ड के सदस्य और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा की अगुवाई में लिंगायत सीएम के मसले पर गंभीर मंथन चल रहा है। बुधवार को उनके आवास पर सीएम बसवराज बोम्मई और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच लिंगायतों का समर्थन बनाए रखने की रणनीति पर चर्चा की गई है।

भाजपा के हथियार से उसी पर वार!
दरअसल, जबसे बीजेपी ने पूर्व मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टार और पूर्व डिप्टी सीएम लक्ष्मण सावडी का टिकट काटा है, कांग्रेस भाजपा पर लिंगायत समाज के नेताओं को 'अपमानित' करने का आरोप लगा रही है। 1990 के दशक में जब कांग्रेस ने वीरेंद्र पाटिल को सीएम पद से हटाया था,तब से भाजपा ने उसपर इसी तरह से आरोप लगाने शुरू किए थे।

बीजेपी नेतृत्व तक भेजा गया संदेश
भाजपा के सामने चुनौती ये है कि संख्या बल में मजबूत लिंगायत समुदाय के मन में कांग्रेस के द्वारा पैदा किए जा रहे 'संदेह' को दूर कैसे किया जाए? चुनाव में अब पूरे तीन हफ्ते भी नहीं बचे हैं। सीएम बोम्मई ने मीडिया से कहा है कि समुदाय की चिंता से प्रधान को अवगत कराया गया, जो कि पार्टी नेतृत्व तक संदेश पहुंचाएंगे।

लिंगायत मठों की दौड़ लगाएंगे भाजपा नेता
इसके साथ बीजेपी ने पूरे कर्नाटक में अपने नेताओं को लिंगायत मठों में जाने और उनके प्रति पार्टी के समर्पण का संदेश पहुंचाने की योजना तैयारी की है। लिंगायतों में भी कई उप संप्रदाय हैं और पार्टी के नेताओं से कहा गया है कि वहां पहुंचें और उनके प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता बताने की कोशिश करें।

येदियुरप्पा के भरोसे भाजपा
बीजेपी, कांग्रेस के अभियान के प्रति किस कदर गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लग जाता है कि लिंगायतों के प्रभाव वाले इलाके में अकेले येदियुरप्पा की 50 रैलियों की योजना बनाई गई है। गौरतलब है कि येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय के सबसे कद्दावर नेता माने जाते हैं।
येदियुरप्पा जिन चुनाव क्षेत्रों कांग्रेस के लिंगायत अभियान के खिलाफ पार्टी का पक्ष सामने रखेंगे, उनमें हुबली-धारवाड़ सेंट्रल और अथनी चुनाव क्षेत्र भी शामिल हैं। यहां से शेट्टार और सावडी इसबार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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कांग्रेस की पोल खोलने की भी तैयारी!
कांग्रेस को काउंटर करने के लिए बीजेपी ने यह रणनीति अपनाई है कि लिंगायत समुदाय के सिर्फ दो नेताओं एस निजलिंगप्पा और वीरेंद्र पाटिल को ही मुख्यमंत्री बनने का मौका मिल पाया था।
जबकि, भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा के बाद भी सीएम बोम्मई को ही यह जिम्मेदारी सौंपी, जो इसी संप्रदाय से ताल्लुक रखते हैं।

कितना बड़ा है लिंगायत वोट बैंक?
कर्नाटक में पिछले करीब दो दशकों से लिंगायत समाज का समर्थन भाजपा को मिलता आया है। कहा जाता है कि 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा में इस समुदाय का वोट 100 से ज्यादा सीटों के परिणाम को प्रभावित कर सकता है। जबकि, 113 सीटों से राज्य में बहुमत का आंकड़ा तय होता है।
माना जाता है कि लिंगायत मत 12वीं सदी के समाज सुधारक और कन्नड़ कवि संत बसवेश्वर की शिक्षाओं से विकसित हुआ है। बसावा 'भक्ति' आंदोलन से प्रेरित बताए जाते हैं।











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