Kargil Diwas: कैप्टन विजयंत थापर के माता-पिता ने शेयर की शहीद की वर्दी के साथ तस्वीर, नेटिजन्स हुए इमोशनल
Kargil Vijay Diwas 2023: 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस है। 24 साल पहले इसी दिन भारतीय सेना के बहादुर जवानों ने पाकिस्तानी सैनिकों को कारगिल से खदेड़कर दुर्गम चोटियों पर जीत का परचम फहराया था। कारगिल दिवस के मौके पर शहीद कैप्टन विजयंत थापर के पिता ने एक तस्वीर शेयर की है।
शहीद कैप्टन विजयंत थापर के पिता सेवानिवृत्त कर्नल वीरेंद्र थापर की इस तस्वीर ने सोशल मीडिया पर लोगों को भावुक कर दिया है। मंगलवार (25 जुलाई) को सेवानिवृत्त कर्नल वीरेंद्र थापर ने अपनी पत्नी और कैप्टन की मां तृप्ता थापर के साथ की एक तस्वीर शेयर की है।

जिसमें वह नोएडा के डीएलएफ मॉल में अपने बेटे की वर्दी के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। तस्वीर सोशल मीडिया पर बहुत तेज से वायरल हो रही है। कर्नल थापर ने लिखा कि, डीएलएफ मॉल नोएडा में प्रदर्शित शहीद बेटे की वर्दी के सामने खड़ा हूं। वर्दी भाईचारे की एकता और उनके मूल्यों का प्रतीक है। कारगिल विजय दिवस पर एक सप्ताह तक यूनिफॉर्म के सम्मान में समारोह आयोजित किए गए। जय हिन्द!
तस्वीर पर कमेंट करते हुए एक यूजर्स ब्रिगेडियर खुशाल ठाकुर (सेवानिवृत्त) ने लिखा कि, आपके साहस और दृढ़ इच्छा शक्ति को सलाम और मैं आप दोनों को सलाम करता हूं। मुझे आप दोनों से कई बार मिलने का अवसर मिला। आशा है कि हम इस बार कारगिल विजय दिवस पर द्रास में फिर मिलेंगे। बहादुर दिल को एक बड़ा सलाम।
'अ बॉर्न सोल्जर' कहे जाने वाले नोएडा के कैप्टन विजयंत थापर ने 22 साल की उम्र में ही देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए थे। विजयंत थापर के परिजन पीढ़ी दर पीढ़ी भारतीय सेना में रहे हैं। उनके पिता कर्नल वीरेंद्र थापर, दादा जेएस थापर और परदादा डॉ. कैप्टन राम थापर भारतीय सेना में रहकर देश सेवा कर चुके हैं।
कैप्टन विजयंत थापर के सेना में कमीशन होने के कुछ महीने बाद ही कारगिल युद्ध में हिस्सा लेने के लिए भेज दिया गया था। लेफ्टिनेंट विजयंत थापर के नेतृत्व में उनकी यूनिट ने तोलोलिंग (करगिल) की चोटी पर 28 जून 1999 को हमला बोला था।
पाकिस्तान सेना से लड़ते हुए 28 जून 1999 को विजयंत थापर शहीद हो गए थे। विजयंत के पिता वीएन थापर बताया कि शहादत से कुछ घंटे पहले विजयंत ने अपने एक दोस्त को पत्र लिखकर दिया था। पत्र में लिखा था कि, 'जब तक चिट्ठी पहुंचेगी, आपको आसमान से देख रहा होऊंगा। लेकिन मुझे कोई पछतावा इसका नहीं है, अगला जन्म हुआ तो मैं एक बार फिर से अपनी मातृभृमि के लिए खुद को बलिदान कर दूंगा'।












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