कानपुर की 'जान' को मोदी से 'वफा' की उम्मीद

डॉक्यूमेंट में शामिल सुझावों पर अमल के लिए इंडस्ट्री ने सौ दिन का वक्त भी निर्धारित कर लिया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकार के साथ लेदर सेक्टर पूरी योजना और बिंदुओं के साथ बातचीत की तैयारी में है। अब इंतजार है नए वित्त मंत्री अरुण जेटली की नई नीति व रणनीति का।
लेदर सेक्टर में कानपुर अपना डंका बजा रहा है। 6 हजार करोड़ रुपए का निर्यात अेले कानपुर लेदर बेल्ट से हो रहा है। सैडलरी में तो कानपुर गढ़ है, जिसकी बढ़त रफ्तार 33 फीसदी है। अच्छी-खासी विदेशी मुद्रा देने वाली इंडस्ट्री का हाल बीती सरकार की ढुलमुल नीतियों की वजह से बुरा है। प्रदूषण का कलंक बरसों से झेल रहा यह सैक्टर अब सरकार की नई नीतियों के कंधों पर अपनी प्रतिष्ठा टिकाए बैठा है।
इंडस्ट्री की शीर्ष प्राथमिकताओं में बुनियादी ढांचे में सुधार है तो दूसरी ओर आयात निर्यात नीति में कुछ संशोधन भी हैं।
सबसे बड़ी मांग-
पुरानी मशीनों के आयात पर ड्यूटी घटे- लेदर सेक्टर की मशीनें ज्यादातर विदेश से ही आती हैं। पुरानी मशीनों के आयात पर पहले कोई ड्यूटी नहीं थी लेकिन पिछली सरकार ने उन पर भी 25 प्रतिशत आयात शुल्क लगा दिया था। इस वजह से विदेशों में तिहाई रेट पर मिलने वाली मशीनें भी उद्यमी नहीं खरीद पा रहे हैं।












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