कन्हैया कुमार और शेहला रशीद लड़ सकते हैं 2019 में लोकसभा चुनाव
दिल्ली: जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के दो छात्रनेताओं शेहला रशीद और कन्हैया कुमार ने पीएम नरेंद्र मोदी और वर्तमान भाजपा सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की है और हर मंच पर इनका विरोध किया है। लेकिन अब ये दोनों एक सामाजिक और राजनीतिक संगठनों का एक सामूहिक मोर्चा बनाने की कायवाद में जुटे हैं ताकि BJP को अब सीधे जमीनी स्तर पर चुनौती दी जाए।

कन्हैया और शेहला ने हर मोर्चे पर एनडीए का विरोध किया है और अब वो राजनीति में अपनी किस्मत आजमाने के संकेत भी दे रहे हैं और उनके इशारों को समझें तो लोकसभा चुनाव 2019 में ये दोनों चुनाव के मैदान में दिखाई दे सकते हैं। उदार और प्रगतिवादी लोगों के संगठन के साथ बीजेपी को चुनौती देने की तैयारी ये दोनों कर रहे हैं।
कन्हैया का कहना है कि वो संगठित राजनीति में यकीन करते हैं। कन्हैया का कहना है कि बिहार में अगर राजद, कांग्रेस और वामपंथी दल महागठबंधन की स्थिति में उन्हें उम्मीदवार बनाते हैं तो वो चुनाव लड़ेंगे। कन्हैया का कहना है कि वो व्यक्ति विशेष की राजनीति में विश्वास नहीं रखते और जब भी चुनाव लड़ेंगे मुख्यधारा से जुड़े दल के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ना चाहेंगे।
कन्हैया-शेहला लड़ सकते हैं लोकसभा चुनाव
कन्हैया बेगुसराय की बात करते हुए कहते हैं कि सीपीआई की जमीन यहाँ मजबूत रही है और उनके इलाके में इस दल का अच्छा जनाधार रहा है। उनके परिवार के लोग भी इस दल के साथ लम्बे समय से जुड़े हैं। लेकिन हाल में ही वहां बीजेपी को जीत मिली है और लोकसभा चुनाव 2014 में पहली बार बीजेपी को यहाँ से जीत मिली थी। माना जा रहा है कि कन्हैया बेगुसराय से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
वहीं सीपीआई-माले के छात्र संगठन आॅल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन से जुड़ी शेहला रशीद भी BJP के खिलाफ काफी मुखर रहीं हैं और किसी भी मुद्दे पर सत्ताधारी दल और पीएम मोदी को कोसने का मौका नहीं गंवाती हैं। शेहला का भी वही कहना है कि अगर सामान्य स्थिति में कोई बात होती है तो वो चुनाव लड़ने को तैयार हैं। शेहला ने अभी किसी दल में रूचि नहीं दिखाई है। लेकिन शेहला ने कहा कि वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश की किसी सीट से चुनाव लड़ना चाहेंगी। शेहला रशीद श्रीनगर की रहने वाली हैं।












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