बीजेपी सांसद कंगना रनौत की मुश्किलें बढ़ी, राष्ट्र द्रोह एवं किसानों के अपमान के मामले में कोर्ट द्वारा नोटिस
बॉलीवुड अभिनेत्री और हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनौत की कानूनी मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। किसानों से जुड़े देशद्रोह और अपमान के मामले में उनके खिलाफ कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। आगरा की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट ने किसान आंदोलन और महात्मा गांधी पर उनकी टिप्पणी को लेकर यह नोटिस जारी किया है। कंगना को इस नोटिस का जवाब देना है।
अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने कंगना के खिलाफ एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में केस दायर किया है। मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कंगना को अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया। रमाशंकर शर्मा ने कहा, "मैंने एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में भाजपा सांसद कंगना रनौत के खिलाफ केस दायर किया था।" उन्होंने 27 अगस्त को उनके बयान को पढ़ने का जिक्र किया, जिसमें किसान आंदोलन से लेकर बांग्लादेश की स्थिति तक के विषय शामिल थे।

विवादास्पद बयान
यह विवाद कंगना द्वारा 2021 में दिए गए बयानों से उपजा है। उन्होंने दावा किया कि गाल पर थप्पड़ मारने से भीख मिलती है, आज़ादी नहीं और कहा कि भारत को 2014 के बाद सच्ची आज़ादी मिली। इसके अलावा, उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ़ प्रदर्शनकारियों को खालिस्तानी आतंकवादी करार दिया। इन टिप्पणियों के बाद उनके खिलाफ़ काफ़ी विरोध हुआ।
#WATCH | Agra, Uttar Pradesh: On BJP MP Kangana Ranaut issued notice by Agra MP-MLA court, Advocate Ramashankar Sharma says, "... I had filed a case against BJP MP Kangana Ranaut in the MP-MLA Special Court. On August 27, we read a statement made by her where she said the… pic.twitter.com/98iXyZ7jXe
— ANI (@ANI) November 12, 2024
11 सितंबर 2024 को रमाशंकर शर्मा ने कंगना रनौत के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। वे आगरा में राजीव गांधी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष हैं। शिकायत में 27 अगस्त को अखबारों में छपे एक बयान का हवाला दिया गया था, जिसमें उन्होंने अगस्त 2020 से दिसंबर 2021 तक की घटनाओं पर चर्चा की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि दिल्ली की सीमा पर किसानों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हत्याएं और बलात्कार हुए हैं।
किसानों के खिलाफ आरोप
कंगना की टिप्पणियों में किसानों पर आरोप लगाना शामिल था, उन्हें हत्यारा और बलात्कारी कहा गया। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर मजबूत नेतृत्व नहीं होता, तो भारत को बांग्लादेश जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता था। इन बयानों को लाखों भारतीय किसानों का अपमान माना गया।
अब अदालत ने इन आरोपों पर जवाब देने के लिए कंगना की मौजूदगी की मांग की है। महात्मा गांधी के बारे में उनकी टिप्पणियों ने लोगों में आक्रोश को और बढ़ा दिया है। कानूनी कार्यवाही जारी है और वह अदालत में अपना बचाव करने की तैयारी कर रही हैं।
यह चल रही कानूनी लड़ाई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ी जटिलताओं और कंगना रनौत जैसी सार्वजनिक हस्तियों पर इसके प्रभाव को उजागर करती है।












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