कैलाश मानसरोवर के लिए तीसरा रास्ता- चक्रतीर्थ, हर मौसम में कर सकेंगे महादेव के दर्शन
नए रास्ते की पहल करने वाले भाजपा लखीमपुर खीरी के भाजपा सांसद अजय मिश्र टैनी का कहना है कि अभी तक कैलाश मानसरोवर के लिए उत्तराखंड से एक दुर्गम रास्ता है।
नई दिल्ली। अगर आप कैलाश मानसरोवर की यात्रा की ईच्छा रखते है तो आपके लिए एक अच्छी खबर आई है। नेपाल सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच एक सैद्धांतिक सहमति बन चुकी है। जिसके मुताबिक चक्रतीर्थ नैमिषारण्य से नेपाल व चीन होते हुए श्रद्धालुओं के लिए एक नया रास्ता तैयार किया जाएगा। इससे 84 हजार ऋषियों के तपोस्थली से महातीर्थ कैलाश मानसरोवर के लिए उत्तर, पूर्वी भारत के मैदानी क्षेत्र और पश्चिम व दक्षिण भारत के तीर्थ यात्रियों के लिए किसी भी मौसम में यह यात्रा जोखिम रहित हो जाएगी।

समझिए पूरा रूट
कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने के लिए नैमिष से मिश्रिख वाया रामकोट होते हुए सीतापुर हरगांव और लखीमपुर तक। फिर वाया शारदानगर से ढखेरवा निघासन और सिंगाही होते हुए तिकुनिया तक। इसके बाद तिकुनिया से कौडिय़ाला घाट पुल से नेपाल में प्रवेश होगा। वहां से मोहाना नदी को नेपाल सीमा पर पार करेंगे। नेपाल के पहले गांव ककरौला घाट से नारायणपुर। वहां से टीकापुर फिर लम्की होते हुए चीन सीमा पर पहुंच जाएंगे। चीन सीमा पर पहला गांव शंखलाकोट है। शंखलाकोट से ही कैलास मानसरोवर की सीमा शुरू हो जाएगी। इस दौरान नेपाल और चीन की सीमा पर उरी झील को भी पार करना होगा।

भाजपा सांसद अजय मिश्र टैनी ने ये कहा
नए रास्ते की पहल करने वाले भाजपा लखीमपुर खीरी के भाजपा सांसद अजय मिश्र टैनी का कहना है कि अभी तक कैलाश मानसरोवर के लिए उत्तराखंड से एक दुर्गम रास्ता है। दूसरा रास्ता सिक्किम से है। यह तीसरा वैकल्पिक मार्ग बन जाने से बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की राह सुगम हो जाएगी।

नैमिष से कैलाश मानसरोवर की यात्रा केवल 477 किलोमीटर का सफर तय करके ही पूरी की जा सकेगी
नए रास्ते से नैमिष से कैलाश मानसरोवर की यात्रा केवल 477 किलोमीटर का सफर तय करके ही पूरी की जा सकेगी। सांसद के मुताबिक उन्होंने नेपाल सरकार से पहले चरण की वार्ता कर ली है और मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को भी यह प्रस्ताव दिया है। मुख्यमंत्री ने भी इस नए रास्ते को हाईवे बनाने की सहमति दे दी है। नए रास्ते में नैमिष से तिकुनिया खीरी 160 किलोमीटर और नेपाल ककरौला घाट से शंखलाकोट गांव तक 285 किलोमीटर की दूरी है। अगर सब कुछ ठीक रहा तो अगले साल से इस रास्ते पर काम शुरू हो जाएगा।












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