गोधरा और सिख विरोधी दंगों की जांच करने वाले जस्टिस नानावती का निधन
नई दिल्ली, 18 दिसंबर: सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) जीटी नानावती का शनिवार को अहमदाबाद स्थित उनके आवास पर निधन हो गया। वह 86 वर्ष के थे। जीटी नानावती ने 2002 के गुजरात दंगों और 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच करने वाले आयोग का नेतृत्व किया था। उनके परिवार के सदस्यों ने बताया कि उनका गुजरात में शनिवार दोपहर एक बजकर 15 मिनट पर हृदय गति रुकने से निधन हो गया।
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गुजरात हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के मुताबिक, जस्टिस नानावती का अंतिम संस्कार शनिवार शाम करीब 5:15 बजे थलतेज श्मशान घाट पर किया गया। गोधरा ट्रेन जलने और उसके बाद के दंगों की जांच के लिए नियुक्त न्यायमूर्ति नानावती के आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(तब मुख्यमंत्री थे) और उनकी मंत्रिपरिषद के साथ-साथ पुलिस को भी क्लीन चिट दे दी थी। आयोग ने अपनी सुनवाई के दौरान गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री मोदी को तलब नहीं किया था। गोधरा दंगों में 1,000 से अधिक लोग मारे गए थे जिसमें से ज्यादातर लोग अल्पसंख्यक समुदाय के थे।
जस्टिस नानावती 11 फरवरी, 1958 को बांबे हाईकोर्ट में वकील बने थे। उन्हें 19 जुलाई 1979 से गुजरात उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किए गया था और 14 दिसंबर, 1993 को उड़ीसा हाईकोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया था। नानावती को 31 जनवरी, 1994 को उड़ीसा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। इसके बाद उन्हें 28 सितंबर, 1994 से कर्नाटक उच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश के रूप में स्थानांतरित किया गया था।
नानावती को सर्वोच्च के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया था। जस्टिस नानावती को 6 मार्च, 1995 से सर्वोच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था और वह 16 फरवरी 2000 को सेवानिवृत्त हुए। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार ने 1984 के सिख विरोधी दंगों की जांच के लिए नानावती आयोग को गठित किया था। वह नानावती आयोग के इकलौते सदस्य थे।












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