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झारखंड की जनसांख्यिकी बदलने पर बवाल! कैसे कांग्रेस MLA संविधान को दे रही हैं चुनौती?

Jharkhand Religious Demographic Changes: झारखंड में आदिवासी बहुल संथाल परगना इलाके में कथित रूप से अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से जनसांख्यिकी बदलने वाले दावे में कांग्रेस की एक महिला विधायक के बयान से नया बवाल खड़ा हो गया है।

झारखंड में कांग्रेस एमएलए शिल्पी नेहा टिर्की ने बिहार से आकर राज्य में बसे लोगों को लेकर जो बयान दिया है, वह सीधे-सीधे संविधान को चुनौती देने वाला बताया जा रहा है।

jharkhand tribes

संविधान के अनुच्छेद 19(1)(e) क्या है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद में नागरिकों को देश में कहीं भी निवास करने या बसने का मौलिक अधिकार मिला हुआ है। मतलब, हमारा संविधान देश के नागरिकों को भाकत में कहीं भी निवास करने या बस जाने की स्वतंत्रता देता है।

झारखंड कांग्रेस के लिए बिहारी क्यों हो गए बाहरी?
लेकिन, झारखंड की मांडर सीट से कांग्रेस विधायक ने विधानसभा में कहा है, 'रांची के आदिवासियों और मूलनिवासियों को झुग्यिों में धकेल दिया गया है। रामगढ़ में बिहारी मुखिया बनने लगे हैं। पूरे झारखंड में जनसांख्यिकी बदल गई है और उन्होंने निवासियों की नीति बनाकर बाहरी लोगों को निवासी बना दिया है, जिसका कट-ऑफ वर्ष 1985 है।'

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भी छोटानगपुर में कथित जनसांख्यिकी बदलाव का कर चुके हैं दावा
इससे पहले शनिवार को ही नेहा के पिता और झारखंड कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष बंधु तिर्की ने कहा था, '(निशिकांत) दुबे ने संसद में कहा कि संथाल परगना में आदिवासी लोगों की जनसंख्या 10% कम हो गई है, लेकिन बीजेपी छोटानागपुर डिविजन में जनसांख्यिकी में बदलाव पर चुप है।'

लोकसभा में आदिवासियों की घटती जनसंख्या का उठा है मुद्दा
दरअसल, झारखंड के गोड्डा से बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने बीते गुरुवार को लोकसभा में संथाल परगना में आदिवासीयों की घटती जनसंख्या की वजह से जनसांख्यिकी में हो रहे बदलाव और बांग्लादेशी घुसपैठियों के संकट का मुद्दा उठाया था। उन्होंने दावा किया था झारखंड के गठन के बाद साल 2000 में संथाल परगना में आदिवासियों की आबादी 36% थी, जब अब घटकर 26% रह गई है। उनके मुताबिक कुछ दशक पहले तो यह और भी ज्यादा हुआ करती थी।

आदिवासियों की आबादी घटने के पीछे बड़ी साजिश?
उनका दावा था कि बांग्लादेशी घुसपैठिए संथाल परगना की आदिवासी महिलाओं से शादी कर रहे हैं। उन्होंने सिर्फ झारखंड में ही नहीं, बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में भी बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से मुस्लिम आबादी बढ़ने पर चिंता जाहिर की है।

आदिवासी बहुल इलाकों के लिए केंद्र शासित प्रदेश बनाने की उठी मांग
इस खतरनाक समस्या से छुटकारा पाने के लिए उन्होंने झारखंड के संथाल परगना, बिहार के अररिया, किशनगंज, कटिहार और पश्चिम बंगाल के मालदा और मुर्शिदाबाद जिलों को मिलाकर अलग से एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने तक की मांग की थी, ताकि आदिवासियों की पहचान कायम रखी जा सके।

देश के नागरिकों से कौन छीन सकता है मौलिक अधिकार?
बीजेपी की ओर से संसद में उठाए गए मुद्दे के बदले कांग्रेस ने जो राग अलापा वह संविधान को सीधे-सीधे चुनौती देता दिख रहा है। इस वजह से इस मसले पर झारखंड की राजनीति बहुत गरमा चुकी है।

वैसे शिल्पी तिर्की के बयान पर दुबे ने एक्स पर तंज कसते हुए लिखा है, 'शिल्पी कांग्रेस के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष राजेश ठाकुर जी से नाराज हैं, क्योंकि अध्यक्ष जी बिहारी मूल के हैं। मंत्री नहीं बनने से वे हेमंत सोरेन जी से नाराज हैं, क्योंकि उनकी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन जी उड़ीसा (ओडिशा) से हैं, मुख्यमंत्री जी की बहन अंजली सोरेन जी की शादी उड़ीसा (ओडिशा) हुई है तथा चुनाव भी उड़ीसा (ओडिशा) से लड़ती हैं, उनके पिता बंधू तिर्की के साथ रहे सालखन मूरमू से नाराज हैं, जो झारखंड के होते हुए उड़ीसा (ओडिशा) से सांसद बन गए। बच्ची है, कम समझदार है,छोड़ दीजिए।'

सोमवार को भी निशिकांत दुबे ने झारखंड में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठाया है और आरोप लगाया है कि राज्य सरकार बांग्लादेशियों के लिए आदिवासी युवाओं के साथ बर्बरता कर रही है। उन्होंने पाकुड़ की घटना का जिक्र किया, जिसमें पुलिस कार्रवाई में 11 छात्र जख्मी हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई गई है।

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