सांप-सीढ़ी का खेल बना झारखंड राज्यसभा चुनाव, जो बनेगा आंकड़ों का बाजीगर उसकी होगी गोटी लाल

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झारखंड में राज्यसभा का चुनाव सांप सीढ़ी का खेल बन गया है। सीट दो और उम्मीदवार तीन। जीत की सीढ़ी चढ़ रहा उम्मीदवार कब नीचे गिर पड़े, कहना मुश्किल है। जोड़तोड़ और क्रॉस वोटिंग के भरोसे ही तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारा गया है। जीत के लिए किसी भी उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के 27 वोट चाहिए। झामुमो के दिग्गज शिबू सोरेन की जीत तो तय है। लेकिन भाजपा प्रत्याशी दीपक प्रकाश और कांग्रेस प्रत्याशी शहजादा अनवर में से उसी को जीत मिलेगी जो आंकड़ों की बाजीगरी करेगा। संख्याबल के हिसाब से कांग्रेस उम्मीदवार की स्थिति कमजोर है। कांग्रेस को तभी जीत मिलेगी जब विधायकों की जोड़तोड़ होगी। भाजपा के पास जीत का आंकड़ा तो दिख रहा है लेकिन उसके एक विधायक के जेल जाने से मामला किंतु-परंतु में फंस सकता है। मतदान 19 जून को है। झारखंड में राज्यसभा का चुनाव विधायकों की खरीद फरोख्त और क्रॉस वोटिंग के लिए चर्चित रहा है। एक बार फिर वैसी ही परिस्थितियां बनती दिख रही हैं।

झामुमो की जीत तय, कांग्रेस पर संशय
अभी झारखंड विधानसभा में कुल 79 सदस्य हैं। बेरमो के कांग्रेस विधायक राजेन्द्र सिंह का निधन हो गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दुमका की सीट छोड़ चुके हैं। दो स्थान रिक्त होने के कारण अब सदन में 81 के बदले 79 सदस्य ही रह गये हैं। राज्यसभा चुनाव में किसी उम्मीदवार को जीतने के लिए प्रथम वरीयता के कुल 27 वोट चाहिए। झारखंड मुक्ति मोर्चा के अभी 29 सदस्य हैं। इसलिए झामुमो सुप्रीमो शिबू सोरेन की जीत तय है। सत्ता में साझीदार कांग्रेस संख्या बल में बहुत पीछे है। इसलिए उसे जीत के लिए अन्य विधायकों के वोट की जरूरत होगी। कांग्रेस के कुल 16 विधायक जीते थे। राजेन्द्र सिंह के निधन के कारण कांग्रेस के मूल विधायकों की संख्य़ा 15 है। प्रदीप यादव और बंधू तिर्की झाविमो छोड़ कर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। इस लिहाज से अब कांग्रेस के 17 विधायक हो गये हैं। झामुमो के दो अतिरिक्त मत, माले और राजद के एक-एक मत को अगर जोड़ दिया जाए तो कांग्रेस का संख्या बल 21 तक ही पहुंचता है। कांग्रेस को जीत के लिए 6 और मतों की जरूरत होगी जो सामान्य स्थितियों में संभव नहीं दिखता। ये तभी संभव होगा जब जोड़तोड़ और क्रॉस वोटिंग हो। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर जीते कमलेश सिंह की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। वैसे कांगेस उनको अपने साथ मान रही है। सरयू राय ने भी अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

भाजपा को उम्मीद
भाजपा के 25 विधायक जीते थे। बाबूलाल मरांडी के भाजपा में आने से ये संख्या 26 हो गयी है। आजसू ने भाजपा के खिलाफ विधानसभा का चुनाव लड़ा था। लेकिन उसके सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी अभी भी एनडीए की बैठकों में शामिल होते हैं। इसलिए माना जा रहा है कि आजसू के दो विधायक भाजपा को समर्थन देंगे। आजसू अध्यक्ष सुदेश महतो की पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास से अनबन रही है। कहा जाता है कि आजसू के विरोध के कारण ही भाजपा ने रघुवर दास की जगह पर दीपक प्रकाश को उम्मीदवार बनाया है। अभी तक आजसू दीपक प्रकाश के नाम पर रजामंद है। लेकिन कांग्रेस ने भी आजसू के दो विधायकों के समर्थन का दावा कर मामले को उलझा दिया है। इस बीच भाजपा के विधायक ढुल्लू महतो एक आपराधिक मामले की वजह से जेल में बंद हैं। कोर्ट की इजाजत से वे मतदान में शामिल हो सकते हैं, लेकिन अभी विरोधी दल की सरकार होने के कारण कानूनी अड़ंगा भी लग सकता है। अगर ढुल्लू महतो मतदान में शामिल हुए तो भाजपा के पक्ष में 28 मत (26 भाजपा और दो आजसू) हो जाएंगे। भाजपा के पूर्व विधायक और अब निर्दलीय जीते अमित यादव भी दीपक प्रकाश के पक्ष में हैं। इस तरह दीपक प्रकाश 29 मतों के साथ जीतते हुए दिख रहे हैं। लेकिन अगर कांग्रेस ने कोई खेल कर दिया तो भाजपा के हाथ से बाजी फिसल भी सकती है।

अक्सर लगा है हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप
राज्यसभा चुनाव के दौरान झारखंड की राजनीति में कुछ भी संभव है। कई बार राजनीतिक दलों का संख्या बल धरा का धरा रह जाता है और जीत किसी दूसरे को मिल जाती है। झारखंड का राज्यसभा चुनाव विधायकों की खरीद फरोख्त के लिए कुख्यात रहा है। 2008 में अहमदाबाद के कारोबारी परिमल नाथवाणी झारखंड से राज्यसभा का चुनाव जीत गये थे। उस समय झारखंड मुक्ति मोर्चा के 17 विधायक थे। झामुमो ने किशोरी दास को उम्मीदवार बनया था। लेकिन झामुमो के 17 विधायकों में केवल 8 ने ही किशोरी दास को वोट दिये थे। बाकी नाथवाणी के साथ चले गये। 2010 के राज्यसभा चुनाव में भी हॉर्स ट्रेडिंग का आरोप लगा था। इस चुनाव में झाऱखंड मुक्तिमोर्चा ने अलकेमिस्ट ग्रुप के मालिक कंवलदीप सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया था। वे 32 वोटों से जीते थे। इस चुनाव में भाजपा के उम्मीदावार आजय मारू हार गये थे। उस समय भाजपा के 18 विधायक थे। लेकिन एक विधायक ने वोट नहीं दिया। 2010 के चुनाव के समय न्यूज चैनल सीएनएन आइबीएन ने एक स्टिंग ऑपरेशन किया था। इसमें दिखाया गया था कि झारखंड के छह विधायक पैसा लेकर वोट देने के लिए राजी हैं। बाद में इसकी सीबीआइ जांच हुई। सीबीआई ने 2015 में तत्कालीन पांच विधायकों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। 2012 में राज्यसभा चुनाव के दो घंटा पहले आयकार विभाग ने रांची में एक गाड़ी से 2 करोड़ 15 लाख रुपये बरामद किये थे। इन पैसों के साथ कुछ कागज थे जिन पर कुछ विधायकों के नाम और मोबाइल नम्बर लिखे हुए थे। तब आरोप लगा था कि ये पैसे चुनाव लड़ रहे एक निर्दलीय प्रत्याशी के थे और वे धनबल से राज्यसभा सांसद बनना चाहते थे। इस घटना के बाद चुनाव रद्द कर दिया गया था।












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