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झारखंड विधानसभा चुनाव:चुनावी मौसम में मधु कोड़ा का दिल है कि मानता नहीं

नई दिल्ली। चुनाव का मौसम आया तो पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा का भी मन चुनाव लड़ने के लिए मचलने लगा। चुनाव आयोग ने उनके इलेक्शन लड़ने पर रोक लगा रखी है। लेकिन कोड़ा का दिल है कि मानता नहीं। उन्होंने चुनाव आयोग में अर्जी दाखिल कर चुनावी चकल्लस में शामिल होने की मंजूरी मांगी है। अगर मंजूरी मिल गयी तो वे कांग्रेस के टिकट पर जगन्नाथपुर से चुनाव लड़ेंगे। मधु कोड़ा सितम्बर 2006 से लेकर अगस्त 2008 तक झारखंड के मुख्यमंत्री थे। वे भारत के पहले ऐसे मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने निर्दलीय हो कर भी करीब दो साल तक शासन किया। वे चार हजार करोड़ के कोल ब्लॉक आवंटन मामले में आरोपी हैं। उनके खिलाफ साढ़े तीन हजार करोड़ का मनी लॉन्ड्रिंग केस चल रहा है। विदेश में पूंजी निवेश का आरोप है। उन पर चार सौ करोड़ की विद्युतीकरण योजना में 11.40 करोड़ रुपये घूस लेने का आरोप है। आय से अधिक सम्पत्ति का मामला भी चल रहा है। वे भ्रष्टाचार के आरोप में 44 महीने तक जेल भुगत चुके हैं। उनके खिलाफ करप्शन के कई मामले कोर्ट में लंबित हैं। फिलहाल वे जमानत पर बाहर हैं लेकिन चुनाव नहीं लड़ सकते।

कोड़ा क्यों नहीं लड़ सकते चुनाव ?

कोड़ा क्यों नहीं लड़ सकते चुनाव ?

2009 के लोकसभा चुनाव में मधु कोड़ा ने चाईबासा सीट से जीत हासिल की थी। चुनाव आयोग को शिकायत मिली थी कि कोड़ा ने अपने चुनावी खर्च का सही आंकड़ा पेश नहीं किया था। आयोग ने माना था कि कोड़ा ने चुनाव में 18 लाख 92 हजार 353 रुपये खर्च किये थे लेकिन उन्होंने अपने ब्योरे में इससे काफी कम खर्च दिखाया था। चुनाव आयोग ने कोड़ा के चुनावी खर्च को गलत मानते हुए उनके चुनाव लड़ने पर तीन साल की रोक लगा दी थी। चुनाव आयोग ने सितम्बर 2017 में ये फैसला दिया था। इसलिए मधु कोड़ा 2020 तक चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हैं। इसी वजह से कोड़ा ने चुनाव आयोग में अर्जी दाखिल कर पाबंदी हटाने की गुहार लगायी है। अब देखना है कि चुनाव आयोग क्या फैसला करता है।

गिरफ्तारी के समय सांसद थे कोड़ा

गिरफ्तारी के समय सांसद थे कोड़ा

भ्रष्टाचार के आरोपों का बहाना बना कर झामुमो ने अगस्त 2008 में कोड़ा को सीएम पद से हटा दिया था। शिबू सोरेन खुद मुख्यमंत्री बन गये थे। जब कि झामुमो ने अपने राजनीकि हितों के लिए ही निर्दलीय कोड़ा को करीब दो साल तक सीएम बनाये रखा था। इस बीच मई 2009 में लोकसभा का चुनाव हुआ तो कोड़ा ने अपनी विधायकी (जगन्नाथपुर) छोड़ कर निर्दलीय ही चाईबासा से चुनाव लड़ा। वे जीत भी गये। इस बीच 30 नवम्बर 2009 को झारखंड विजिलेंस डिपार्टमेंट की टीम ने मधु कोड़ा को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के समय कोड़ा सांसद थे। उस समय झारखंड में विधानसभा चुनाव चल रहा था। मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा जगन्नाथपुर से उम्मीदवार थीं। मधु कोड़ा अपनी पत्नी की जीत के लिए खूब मेहनत कर रहे थे।

आरोपों के बाद भी कम नहीं हुई ताकत

आरोपों के बाद भी कम नहीं हुई ताकत

18 दिसम्बर 2009 को झारखंड विधानसभा के लिए आखिरी चरण का मतदान था। लेकिन इसके पहले ही कोड़ा जेल चले गये। वे 30 नवम्बर 2009 से अप्रैल 2013 तक जेल में बंद थे। कोड़ा पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद भी गीता कोड़ा की चुनावी किस्मत पर कोई असर नहीं पड़ा। मधुकोड़ा ने जय भारत समानता पार्टी बना रखी थी। गीता इसी पार्टी के बैनर पर चुनाव लड़ रहीं थीं। सारे विवाद धरे के धरे रह गये और वे विधायक चुन ली गयीं। उस समय गीता कोड़ा की उम्र सिर्फ 26 साल थी। 2014 में गीता कोड़ा जगन्नाथपुर से फिर विधायक बनीं। लेकिन 2014 में मधु कोड़ा खुद मंझगांव सीट से चुनाव हार गये। लेकिन कोड़ा इस हार से विचलित नहीं हुए। बाद में मधु कोड़ा और गीता कोड़ा कांग्रेस में शामिल हो गये। 2019 के लोकसभा चुनाव में मधु कोड़ा की पत्नी गीता कोड़ा कांग्रेस के टिकट पर सांसद बनने में कामयाब हुई थीं। कई गंभीर आरोपों के बावजूद मधु कोड़ा की राजनीतिक ताकत कम नहीं हुई।

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