मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य ने तालिबान को लेकर खुशी जाहिर की तो भड़के जावेद अख्तर, कर डाली ये मांग
मुंबई, 25 अगस्त। जानेमाने गीतकार और लेखक जावेद अख्तर ने तालिबान को लेकर जिस तरह से ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के दो सदस्यों ने बयान दिया है उसपर आश्चर्यचकित हैं। जावेद अख्तर ने कहा कि यह चौंकाने वाली है कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के दो सदस्यों ने तालिबान को लेकर खुशी जाहिर की है कि उन्होंने अफगानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया है। दोनों ही सदस्यों के इस बर्ताव के बाद जावेद अख्तर ने बोर्ड से कहा है कि इन इस मामले पर अपना रुख साफ करे।

यह चौंकाने वाली बात है
हालांकि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने दोनों ही सदस्यों के बयान से किनारा कर लिया है और कहा कि दोनों ही सदस्यों ने यह बयान व्यक्तिगत क्षमता में दिया है, लेकिन बावजूद इसके जावेद अख्तर का मानना है कि बोर्ड को इस मामले में सख्त प्रतिक्रिया देनी चाहिए। जावेद अख्तर ने ट्वीट करके लिखा, यह चौंकाने वाली बात है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बो्ड के सदस्यों ने अतातायी तालिबान के अफगानिस्तान पर नियंत्रण करने पर खुशी जाहिर की है, हालांकि बोर्ड ने उनके बयान से किनारा कर लिया है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

बोर्ड की सफाई
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस मामले पर बयान जारी करके सफाई दी थी और कहा था कि कुछ मीडिया हाउस ने बोर्ड के सदस्यों के बयान को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का रुख बताया था जोकि पत्रकारिता की मूल भावना के खिलाफ है। मीडिया चैनल्स को इस तरह की हरकत से बचना चाहिए और तालिबान से जुड़ी किसी भी खबर को बोर्ड से नहीं जोड़ना चाहिए। बोर्ड की सफाई के बाद भी जावेद अख्तर का मानना है कि उसे और कड़ी प्रतिक्रिया देनी चाहिए।

IMSD ने धार्मिक राज्य के विचार को नकारा था
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों के बयान के एक दिन बाद जावेद अख्तर ने इस मसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। बता दें कि इंडियन मुस्लिम्स फॉर सेक्युलर डेमोक्रेसी (IMSD) की ओर से बयान जारी करके कहा गया है कि हम दुनिया में ऐसे किसी भी शासन के विचार को खारिज करते हैं जहां सिर्फ एक धर्म की सत्ता हो। हम धार्मिक राज्य के विचार को खारिज करते हैं। बता दें कि में IMSD में कुल 128 सदस्य हैं जिसमे जावेद अख्तर और उनकी पत्नी शबाना आजमी भी शामिल हैं। इसके सभी 128 सदस्यों ने इस बयान पर अपने हस्ताक्षर किए हैं।

क्या कहा था बोर्ड के सदस्य ने
बता दें कि एक वीडियो संदेश के जरिए बोर्ड के सदस्य सज्जाद नोमानी ने कहा था कि 15 अगस्त का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। तालिबान ने बिना किसी विज्ञान और हथियार के दुनिया की सबसे बड़ी ताकत को हरा दिया है। जिस तरह से काबुल स्थित राष्ट्रपति भवन में तालिबान के लड़ाके पहुंचे, उनकी तस्वीर देखकर लगता है कि इन लोगों में किसी भी तरह का कोई गुरूर नहीं है, ये लोग अपनी सरजमीं को चूपते दिखे, इन लोगों ने खुदा का शुक्रिया अदा किया।
नोमानी के इस बयान के बाद विवाद छिड़ गया था। इससे पहले सपा के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने भी तालिबान की तुलना स्वतंत्रता सेनानियों से की थी। जिसके बाद उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज हुआ था।

निजी राय को बोर्ड की राय ना मानें
नोमानी के इस बयान के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बयान जारी करके कहा था कि बोर्ड ने तालिबान और अफगानिस्तान की स्थिति पर कोई टिप्पणी नहीं की है। बोर्ड के सदस्य ने जो बात कही है वह उनकी निजी राय है, इस राय को बोर्ड की राय नहीं मानना चाहिए। बोर्ड के सदस्य की निजी राय को बोर्ड की राय बताकर उसे इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। साथ ही बोर्ड ने मीडिया चैनल्स को इस तरह की हरकत से दूर रहने की भी हिदायत दी।












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