J&K Election: बीजेपी कश्मीर घाटी में सिर्फ 19 सीटों पर ही क्यों लड़ रही चुनाव? खास रणनीति या बड़ी मजबूरी?

Jammu Kashmir Chunav: तीसरे चरण के लिए नामांकन भरने के आखिरी दिन पूरी तरह से साफ हो चुका है कि भारतीय जनता पार्टी कश्मीर घाटी की 47 सीटों में से 28 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ेगी। उसने घाटी में सिर्फ 19 सीटों पर ही उम्मीदवार उतारे हैं और इस तरह से जम्मू कश्मीर की 90 सीटों में से सिर्फ 62 पर चुनाव लड़ रही है।

लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी ने कश्मीर की तीनों सीटों पर प्रत्याशी उतारने से कन्नी काट ली थी। उसके बाद गृहमंत्री अमित शाह ने इसपर खेद जताते हुए कहा था कि विधानसभा चुनावों में बीजेपी सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। लेकिन, आखिर समय में 28 सीटों को खाली छोड़ने के फैसले ने घाटी में पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं को काफी मायूस किया है।

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मिशन 50 प्लस के लक्ष्य का क्या होगा?
बुधवार को भाजपा की ओर से कश्मीर घाटी में मात्र 19 सीटों पर ही चुनाव लड़ने के आधिकारिक घोषणा से पहले जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रविंदर रैना ने कहा था, 'हमारा मिशन 50 प्लस का है। विधानसभा चुनाव में हम रिकॉर्ड जीत की ओर देख रहे हैं। कुछ क्षेत्रों में हम निर्दलीय उम्मीदवारों के साथ गठबंधन भी कर सकते हैं।'

19 सीटों पर ही चुनाव लड़ने के फैसले से पार्टी में मायूसी
अब सवाल है कि जम्मू की सभी 43 सीटों और कश्मीर की 19 सीटों पर चुनाव लड़कर भी बीजेपी 50 से ज्यादा सीटें जीतने का सपना कैसे देख रही है। कश्मीर घाटी में आखिरी समय में और उम्मीदवार नहीं उतारने के फैसले से पार्टी के नेता कार्यकर्ता खुश नहीं हैं और उनके मन में नेतृत्व को लेकर मायूसी है कि उन्होंने टिकट बांटने में उनके 'त्याग को नजरअंदाज किया है।'

सूत्रों के अनुसार श्रीनगर में बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, 'हममें से कई पहले से ही दुखी और नाराज हैं। हमने अपने जीवन के महत्वपूर्ण साल बीजेपी को दे दिए हैं। हम तब बीजेपी के साथ खड़े रहे, जब कोई नहीं होता (घाटी में)।' उनके मुताबिक, 'जब हमें कुछ देने का समय आया तो पार्टी ने हमपर विश्वास नहीं किया। उन्होंने या तो सीटें छोड़ दीं या फिर उन उम्मीदवारों को उतारा जो पार्टी में नए हैं।'

28 सीटों पर चुनाव लड़ने से क्यों कन्नी काट गई बीजेपी?
अब बीजेपी दक्षिण कश्मीर की 16 में से 8, मध्य कश्मीर की 15 में से 6 और उत्तर कश्मीर की 16 में से 5 सीटों पर मैदान में है। पार्टी की ओर से इसकी कोई वजह नहीं बताई गई है कि 28 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ने की वजह क्या है।

बीजेपी बड़ी रणनीति के तहत लिया फैसला?
पार्टी के अंदर के कुछ लोगों का मानना है कि कश्मीर घाटी में पार्टी को 'किसी चमत्कार की उम्मीद' नहीं थी। इसलिए, सिर्फ 19 सीटों पर लड़ने का फैसला एक रणनीति है, जिससे चुनिंदा सीटों पर कुछ निर्दलीय उम्मीदवारों की संभावनाएं बेहतर हो सकें। सूत्रों के मुताबिक जो निर्दलीय उम्मीदवार परिवारवादी दलों को चुनौती देने में सक्षम होंगे, भाजपा उनका समर्थन कर सकती है।

पार्टी के एक नेता के मुताबिक, 'हमारे नेतृत्व को पता है कि बीजेपी के घाटी में श्रीनगर की एक सीट को छोड़कर एक भी सीट जीतने की खास संभावना नहीं है। इसलिए जो भी उम्मीदवार उतारे गए हैं, वे एक तरह से डमी उम्मीदवार हैं.....पार्टी का ध्यान निर्दलीयों और राजनीतिक दलों पर है, जो सत्ता में आने में मदद कर सकते हैं।'

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निर्दलीय और छोटे दल भी बीजेपी के ?
हाल ही में दक्षिण कश्मीर की अनंतनाग सीट से बीजेपी प्रत्याशी रफीक वानी ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कई निर्दलीयों और नई-नवेली पार्टियों को बिना किसी लाग लपेट के अपना बता दिया था। उन्होंने कहा था, 'इंजीनियर राशिद हमारे हैं, सज्जाद लोन भी, अल्ताफ बुखारी हमारे हैं और नबी आजाद (गुलाम नबी आजाद) भी। निर्दलीय प्रत्याशी भी हमारे हैं।'

उन्होंने तभी कहा था कि बीजेपी 20 पर खुद चुनाव लड़ेगी। 'अगर हमें यहां 20 सीटें मिल गईं तो हम 50 पर पहुंच जाएंगे और यही हमारा नारा है।' 'जम्मू में हमें 35 सीटें मिलेंगी और घाटी में पांच पार्टियां हमारी समर्थक हैं।'

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