J&K Election: इंजीनियर राशिद को बेल मिलने से PDP, NC में क्यों मची खलबली?

Jammu Kashmir Chunav: कश्मीर के बारामूला से सांसद शेख अब्दुल राशिद उर्फ इंजीनियर राशिद को चुनाव प्रचार के लिए अदालत से अंतरिम जमानत मिलने से जम्मू-कश्मीर की चुनावी राजनीति में विवाद शुरू हो गया है। उनकी दिल्ली की तिहाड़ जेल से रिहाई की बात नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी दोनों को ही बहुत बुरी खटक रही है। वहीं बीजेपी की ओर से ऐसी प्रतिक्रिया दी जा रही है कि इससे उसे कोई फर्क नहीं पड़ता।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मंगलवार को ही टेरर फंडिंग केस में 2019 से जेल में बंद लोकसभा सांसद और आवामी इत्तेहाद पार्टी के नेता इंजीनियर राशिद को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी है। राशिद ने चुनाव अभियान में हिस्सा लेने के लिए तीन महीने की जमानत मांगी थी, लेकिन अदालत ने उन्हें 2 अक्टूबर तक के लिए मोहलत की है।

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इंजीनियर राशिद को बेल मिलने से भड़की एनसी,पीडीपी
इस साल हुए लोकसभा चुनाव में इंजीनियर राशिद ने तिहाड़ जेल में रहकर ही लड़ा और बारामूला में पूर्व सीएम और नेशनल कांफ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को 2 लाख से ज्यादा वोटों से पटखनी दे दी। अब तो उन्हें अदालत ने अपनी पार्टी के लिए चुनाव अभियान चलाने की छूट दे दी है और यही वजह है कि विशेष रूप से पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस की बौखलाहट खुलकर जाहिर हो रही है।

फंडिंग कहां से हो रही है- महबूबा मुफ्ती
पीडीपी चीफ महबूबा मुफ्ती ने इंजीनियर राशिद को अंतरिम जमानत मिलने पर कहा, 'मुफ्ती (मुफ्ती मोहम्मद सईद) को पार्टी (पीडीपी) बनाने में 50 साल लगे, हमारे पास अभी भी इतने संसाधन नहीं हैं कि हर जगह उम्मीदवार उतार सकें। उनके (इंजीनियर राशिद के) संगठन के पीछे कौन है, क्योंकि उनके प्रत्याशियों को सभी जगहों से उतारा जा रहा है?' महबूबा यह भी सवाल उठा रही हैं कि 'फंडिंग कहां से हो रही है? उन्हें उपद्रव करने की साहस कहां से मिलती है?'

यह जमानत वोट पाने के लिए है- उमर अब्दुल्ला
महबूबा और उमर दोनों का आरोप है कि इंजीनियर राशिद की पार्टी के पीछे कहीं न कहीं बीजेपी का हाथ है, ताकि घाटी की प्रमुख पार्टियों को कमजोर किया जा सके।

उमर अब्दुल्ला ने उन्हें जमानत मिलने पर कहा, 'मुझे बारामूला के लोगों के लिए दुख होता है। यह जमानत उत्तर कश्मीर के लोगों के कल्याण के लिए नहीं है, बल्कि वोट पाने के लिए है।'

बीजेपी को फायदा पहुंचने का सता रहा है डर
दरअसल, पीडीपी और नेशनल कांफ्रेंस को डर है कि इंजीनियर राशिद के प्रभाव की वजह से उनकी पार्टियों के वोट कटेंगे, जिससे उनके उम्मीदवारों की चुनावी संभावनाएं कम होंगी, जिससे अंतिम चुनाव परिणाम में बीजेपी को फायदा हो सकता है।

नींद उड़ेगी तो नेशनल कांफ्रेंस और उमर साहब की उड़ेगी- बीजेपी
हालांकि, जम्मू और कश्मीर बीजेपी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर का कहना है, 'उनके बेल पर छूटने से भारतीय जनता पार्टी को कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। अगर कहीं बौखलाहट बढ़ेगी तो उमर साहब की बढ़ जाएगी....किसी की नींद उड़ेगी तो नेशनल कांफ्रेंस और उमर साहब की नींद उड़ेगी। बेल मिलने या नहीं मिलने से हमें कोई फर्क नहीं पड़ता। भारतीय जनता पार्टी पूरी ताकत से चुनाव लड़ रही है और जो मैजिकल फिगर है, उसे हम पूरा करेंगे।'

'बीजेपी को लगता है कि उन्हें इसका इलेक्ट्रॉल फायदा होगा'
वहीं नेशनल कांफ्रेंस की प्रवक्ता इफ्रा खान ने भाजपा के बयान पर प्रतिक्रिया में कहा, 'बीजेपी को लगता है कि उन्हें इसका इलेक्ट्रॉल फायदा होगा.. ये रियायत जम्मू-कश्मीर के उन 5000 नौजवानों को मिलनी चाहिए जो जेलों में बंद हैं...कोई नई पॉलिटिकल पार्टी है उससे तो हर किसी राजनीतिक दल को प्रभावित होना चाहिए....बीजेपी, एनसी,पीडीपी हर कोई प्रभावित होगी.....लेकिन जो बीजेपी वाले कहते हैं कि नेशनल कांफ्रेंस ही प्रभावित होगी, आपको समझ आना चाहिए कि बीजेपी का यही प्लान है...कि इसी तरह इन्हें छोड़ें कि नेशनल कांफ्रेंस ही प्रभावित हो...।'

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