'Jallianwala Bagh नरसंहार स्वतंत्रता संग्राम का निर्णायक मोड़', PM मोदी ने शहीदों को किया याद
Jallianwala Bagh: बैसाखी के पावन पर्व पर जहां पूरा देश नई फसल के आगमन और नवजीवन की शुरुआत का उत्सव मना रहा है, वहीं इसी दिन हुए इतिहास के एक दर्दनाक और काले अध्याय जलियांवाला बाग हत्याकांड की भी स्मृति ताजा हो गई।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस अवसर पर भावुक संदेश देते हुए शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साहस, बलिदान और देशभक्ति को याद किया। पीएम मोदी ने बैसाखी की शुभकामनाएं देते हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड में शहीद हुए देशभक्तों को श्रद्धांजलि दी।

Jallianwala Bagh Massacre पर पीएम मोदी का भावुक संदेश
पीएम मोदी ने कहा, "जलियांवाला बाग के शहीदों को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। उनका अदम्य साहस और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी। यह हमारे इतिहास का एक ऐसा काला अध्याय है जिसे हम कभी नहीं भुला सकते। उनका बलिदान भारत के स्वतंत्रता संग्राम में एक निर्णायक मोड़ बन गया था।"
We pay homage to the martyrs of Jallianwala Bagh. The coming generations will always remember their indomitable spirit. It was indeed a dark chapter in our nation’s history. Their sacrifice became a major turning point in India’s freedom struggle.
— Narendra Modi (@narendramodi) April 13, 2025
राहुल गांधी ने याद दिलाई 'तानाशाही की क्रूरता' नेता प्रतिपक्ष ने इस अवसर पर शहीदों को नमन करते हुए कहा, "जलियांवाला बाग हत्याकांड में शहीद हुए वीर बलिदानियों को अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। यह नरसंहार तानाशाही शासन की क्रूरता का प्रतीक है, जिसे यह देश कभी नहीं भूल सकता।"
उन्होंने यह भी कहा कि शहीदों का साहस और बलिदान आने वाली पीढ़ियों को अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ उठाने की प्रेरणा देता रहेगा। उनका यह बयान स्वतंत्रता संग्राम के उस अध्याय को दोहराता है, जिसमें अन्याय के खिलाफ संघर्ष का जुनून स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
Jallianwala Bagh Massacre को गृहमंत्री शाह ने बताया स्वतंत्रता संग्राम का जनांदोलन
गृह मंत्री अमित शाह ने भी जलियांवाला बाग में हुए हत्याकांड को याद करते हुए गहरा शोक प्रकट किया। उन्होंने कहा, "भारत के स्वतंत्रता संग्राम का वह काला अध्याय, जिसने समूचे देश को झकझोर कर रख दिया। अमानवीयता की पराकाष्ठा तक पहुँच चुकी अंग्रेजी हुकूमत की क्रूरता ने देशवासियों में ऐसा रोष उत्पन्न किया, जिसने आजादी के आंदोलन को जन-जन का संग्राम बना दिया।"
उन्होंने जलियांवाला बाग के शहीदों को नमन करते हुए कहा कि राष्ट्र सदैव उनके अमर बलिदान को अपनी स्मृतियों में संजोए रखेगा।
Jallianwala Bagh: इतिहास का वह मोड़ जो देश की आत्मा में दर्ज है
13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन, अमृतसर के जलियांवाला बाग में हजारों निहत्थे भारतीय नागरिक एक शांतिपूर्ण सभा के लिए इकट्ठा हुए थे। लेकिन जनरल डायर के नेतृत्व में ब्रिटिश फौज ने उन पर बिना चेतावनी गोलियां चला दीं। इस हत्याकांड में सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए और हजारों घायल हुए।
यह घटना न केवल ब्रिटिश शासन की बर्बरता का उदाहरण बनी, बल्कि इसने भारतीय जनमानस को झकझोर कर रख दिया। रवींद्रनाथ ठाकुर ने इसी घटना के विरोध में अपनी "नाइटहुड" की उपाधि लौटाई थी। महात्मा गांधी के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन को इससे नई ऊर्जा मिली।
Jallianwala Bagh Massacre: देश आज भी रखता है शहीदों की याद को जीवित
आज, जलियांवाला बाग एक राष्ट्रीय स्मारक बन चुका है - स्वतंत्रता सेनानियों के उस अद्वितीय साहस और बलिदान का प्रतीक, जिसने भारत के आज़ादी के आंदोलन को जनांदोलन में बदल दिया। देश के कोने-कोने से लोग इस स्थान पर श्रद्धांजलि देने आते हैं, और यह स्मरण करते हैं कि आज़ादी हमें कितने संघर्षों के बाद प्राप्त हुई।












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