राहुल गांधी के उपवास स्थल से उठाए गए सिख दंगों के आरोपी टाइटलर और सज्जन कुमार
दलितों पर अत्याचार को लेकर राहुल गांधी का उपवास, टाइटलर और सज्जन कुमार को वापस भेजा
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नई दिल्ली। 2 अप्रैल को एससी/एसटी एक्ट में बदलाव को लेकर बुलाए गए भारत बंद के दौरान हिंसा और सरकार पर दलितों विरोधी एजेंडा अपनाने के आरोप लगाते हुए कांग्रेस नेताओं ने आज उपवास करने का ऐलान किया है। सोमवार को राहुल गांधी और दूसरे बड़े नेता दिल्ली में राजघाट पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास बैठकर विरोध जता रहे हैं।उपवास स्थल पर सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर भी पहुंचे थे लेकिन उनके कुछ देर बाद ही उन्हें वापस भेज दिया गया। जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार पर सिख दंगों के दौरान हिंसा के गंभीर आरोप हैं। हालांकि टाइटलर ने कहा कि वो उवपास करने नहीं पार्टी नेताओं से मिलने आए थे, इसलिए उनके वापस जाने को किसी दूसरे चश्मे से ना देखा जाए।

देशभर में कांग्रेस नेताओं का उवपास
उपवास स्थल पर जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार राहुल गांधी के पहुंचने से पहले ही पहुंच गए थे लेकिन उन्हें कुछ देर के बाद लौटा दिया गया। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज राजघाट पर उपवास कर रहे हैं। राहुल गांधी के साथ-साथ कांग्रेस के अन्य नेता और कार्यकर्ताओं ने भी एक दिन का उपवास रखा है। राहुल गांधी के साथ देशभर के राज्य मुख्यालय और जिला मुख्यालय में कांग्रेस नेता उपवास करेंगे और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।

सौहार्द के लिए उपवास
कांग्रेस ने इस उपवास के पीछे बिगड़ते सांप्रदायिक सौहार्द और दलितों के खिलाफ हो रहे अत्याचार को वजह बताया है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा है कि भाजपा कहीं हिन्दू से मुसलमान को तो कभी दलित को गैर-दलित से लड़ा रही है। सुरजेवाला ने कहा कि मोदी के नफरफ के एजेंडे को रोकने के लिए कांग्रेस ने इस उपवास का फैसला किया है। पार्टी की और से कहा गया है कि 2 अप्रैल को भारत बंद के दौरान हुई गड़बड़ियां दुर्भाग्यपूर्ण है। बीजेपी शासित केन्दर और राज्य की सरकारों ने हिंसा रोकने और दलितों के हक के संरक्षण के लिए कुछ नहीं किया।

भाजपा ने कहा- स्टंट
बीजेपी के जीवीएल नरसिम्हा राव ने इसे राहुल गांधी का एक राजनीतिक स्टंट बताते हुए कहा, 'यह दलित हितों के लिए उपवास नहीं है, यह दलित हितों का उपहास है। राहुल गांधी एक बार फिर कैमरे के लिए राजनीति कर रहे हैं। राहुल, आप स्टंट की राजनीति और झूठ की राजनीति को कब रोकेंगे?' दूसरे भाजपा नेताओं ने भी इसे कांग्रेस की वोटबैंक की राजनीति कहा है।












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