पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ छोड़ रहे हैं सरकारी बंगला, अब छतरपुर में रहेंगे प्राइवेट घर में, क्या है मजबूरी
Former Vice-President Jagdeep Dhankhar: भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अब दिल्ली के सरकारी बंगले की जगह निजी आवास में रहने जा रहे हैं। जी हां, खबर है कि जगदीप धनखड़ सरकारी बंगला जल्द छोड़ने वाले हैं। असल में उपराष्ट्रपति पद के चुनाव 9 सितंबर 2025 को होने वाले हैं, ऐसे में 74 वर्षीय धनखड़ को उससे पहले संसद भवन परिसर के पास चर्च रोड स्थित उपराष्ट्रपति आवास खाली करना होगा।
इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी है कि उपराष्ट्रपति आवास खाली करने के बाद जगदीप धनखड़ दक्षिण दिल्ली के छतरपुर एनक्लेव स्थित प्राइवेट घर में शिफ्ट होंगे। जगदीप धनखड़ ने अभी हाल ही में राजस्थान विधानसभा के पूर्व विधायक के तौर पर पेंशन के लिए दोबारा आवेदन भी किया है।

जगदीप धनखड़ को क्यों खाली करना पड़ा उपराष्ट्रपति आवास?
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। अब 9 सितंबर को उपराष्ट्रपति का चुनाव होना है, इसलिए उन्हें संसद भवन परिसर के पास चर्च रोड स्थित आधिकारिक आवास खाली करना होगा। वह पिछले साल अप्रैल में इस बंगले में शिफ्ट हुए थे।
नियमों के मुताबिक पूर्व राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को टाइप-8 श्रेणी का सरकारी बंगला मिलता है। इसके लिए गृह एवं शहरी कार्य मंत्रालय (Directorate of Estates) जिम्मेदार होता है। सूत्रों के मुताबिक, जब तक जगदीप धनखड़ को सरकारी आवास नहीं मिल जाता, तब तक वे छतरपुर एन्क्लेव में ही रहेंगे। गृह एवं शहरी कार्य मंत्रालय जगदीप धनखड़ के लिए टाइप-8 श्रेणी का सरकारी बंगला तलाश रहे हैं, जैसे ही उन्हें बंगला मिलेगा, जगदीप धनखड़ वहां शिफ्ट हो जाएंगे।
सरकारी आवास में देरी, निजी मकान में रहेंगे धनखड़
सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय के अधिकारियों ने हाल ही में जगदीप धनखड़ से मुलाकात की, लेकिन उनके नए सरकारी आवास को लेकर ठोस चर्चा नहीं हो पाई। हालांकि, जगदीप धनखड़ के कार्यालय की ओर से आवास के लिए औपचारिक आवेदन कर दिया गया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि-"जब भी पूर्व उपराष्ट्रपति की ओर से आवेदन आता है, तब उपलब्ध विकल्पों की सूची दी जाती है। चयन के बाद सीपीडब्ल्यूडी (CPWD) आवश्यक मरम्मत और बदलाव करता है। यह प्रक्रिया कम से कम तीन महीने का समय लेती है।" यानी, जब तक उन्हें सरकारी आवास नहीं मिलता, तब तक धनखड़ छतरपुर एनक्लेव में निजी आवास में ही रहेंगे।
जगदीप धनखड़ ने पेंशन के लिए फिर से किया आवेदन
जगदीप धनखड़ 1993 से 1998 तक राजस्थान के किशनगढ़ से विधायक रहे थे। उन्हें विधायक पेंशन मिल रही थी, लेकिन 2019 में जब उन्हें पश्चिम बंगाल का राज्यपाल बनाया गया, तो यह पेंशन बंद हो गई थी। अब उपराष्ट्रपति पद छोड़ने के बाद उन्होंने फिर से पेंशन पाने के लिए आवेदन किया है।
एक बार विधायक रहने वाले को ₹35,000 प्रतिमाह पेंशन मिलती है। उम्र और कार्यकाल बढ़ने के साथ इसमें बढ़ोतरी होती है।
70 वर्ष की उम्र पार कर चुके नेताओं को 20% अतिरिक्त पेंशन दी जाती है। इस हिसाब से धनखड़ को बतौर पूर्व विधायक अब ₹42,000 प्रति माह पेंशन मिलेगी।
जगदीप धनखड़ को कितनी-कितनी पेंशन मिलेगी?
जगदीप धनखड़ को अब अलग-अलग पेंशन और भत्ते मिलेंगे-
- पूर्व उपराष्ट्रपति पेंशन: करीब ₹2 लाख प्रतिमाह
- पूर्व सांसद पेंशन: ₹45,000 प्रतिमाह
- पूर्व विधायक पेंशन: ₹42,000 प्रतिमाह
- यानी कुल मिलाकर उन्हें हर महीने लगभग ₹3 लाख से ज्यादा पेंशन और भत्ते मिलेंगे।
जगदीप धनखड़ के इस कदम ने राजनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। एक ओर वह सरकारी नियमों के तहत आवास और पेंशन पाने की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर निजी मकान में शिफ्ट होना यह संकेत देता है कि उन्हें अभी सरकारी मशीनरी से तुरंत राहत नहीं मिली है। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि उन्हें सरकारी आवास कब आवंटित होता है और क्या कांग्रेस-भाजपा के बीच इस मुद्दे पर कोई नई राजनीति होगी।












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