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Video: 'घुटन हो रही थी, इस्तीफे के बाद परेशानी', जगदीप धनखड़ के करीबी का चौंकाने वाला खुलासा, बताई अंदर की बात

Jagdeep Dhankhar Abhay Chautala: देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। हरियाणा के इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) प्रमुख और धनखड़ के करीबी माने जाने वाले अभय सिंह चौटाला ने दावा किया है कि उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद से धनखड़ काफी परेशान थे और उन्हें सरकारी आवास में रहना ही मुश्किल लग रहा था।

अभय चौटाला ने एक हरियाणा तक को दिए इंटरव्यू में बताया कि जगदीप धनखड़ साहब ने खुद उनसे कहा था कि पद छोड़ने के बाद उन्हें सरकारी घर में घुटन महसूस हो रही है। उन्होंने साफ कहा था, "मेरा इस घर में मन नहीं लगता, यहां रहना मेरे लिए बेहद मुश्किल है।" यही वजह रही कि उन्होंने नया ठिकाना तलाशने का मन बना लिया।

Jagdeep Dhankhar

आखिर क्यों सरकारी आवास छोड़ा जगदीप धनखड़ ने?

अभय चौटाला ने याद किया कि जब धनखड़ ने उनसे रहने की जगह को लेकर चर्चा की, तो उन्होंने उन्हें अपने फार्महाउस का ऑफर दिया। चौटाला बोले - "मैंने साफ कहा कि आपके स्टेटस के हिसाब से फ्लैट में रहना शोभा नहीं देगा। मेरे फार्म को अपना घर मानकर रहिए। चाहे छह महीने लगें या दो साल, जब तक आपका नया मकान तैयार नहीं हो जाता, आप यहीं रहिए।"

धनखड़ ने चौटाला का सुझाव माना और फिर वे दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर स्थित चौटाला परिवार के फार्महाउस में शिफ्ट हो गए। अभय चौटाला ने कहा कि धनखड़ साहब ने खुद मुझसे कहा था कि उनको उस सरकारी आवास में अब घुटन महसूस हो रही है। वहां रहना, उनके लिए मुश्किल हो गया है।

उपराष्ट्रपति का पद छोड़ना, स्वास्थ्य का बहाना या असली वजह कुछ और?

21 जुलाई 2025 को धनखड़ ने अचानक इस्तीफा देते हुए स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था। लेकिन चौटाला के ताजा खुलासे ने इस बहाने पर सवाल खड़े कर दिए हैं। चौटाला का कहना है कि धनखड़ पूरी तरह फिट हैं। वे रोज सुबह-शाम टेबल टेनिस खेलते हैं और दोनों वक्त स्विमिंग भी करते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य कारणों को लेकर उनका इस्तीफा देना अब और भी रहस्यमयी लगता है।

चौटाला परिवार और धनखड़ का 40 साल पुराना रिश्ता

अभय चौटाला ने यह भी बताया कि उनका धनखड़ परिवार से रिश्ता नया नहीं है। करीब 40 साल पुराना सामाजिक और पारिवारिक नाता उन्हें जोड़ता है। चौटाला बोले, ''ये फार्महाउस मेरा नहीं बल्कि उनका ही घर है। धनखड़ हमारे परिवार के सदस्य हैं, मेहमान नहीं।'' उन्होंने आगे कहा कि धनखड़ चाहें तो कितने भी समय तक वहां रह सकते हैं।

जगदीप धनखड़ को सरकारी घर छोड़ने में लगे 42 दिन

गौरतलब है कि इस्तीफे के बाद भी धनखड़ 42 दिन तक उपराष्ट्रपति आवास में रहे। 1 सितंबर 2025 को उन्होंने आवास खाली किया और उसी दिन छतरपुर फार्महाउस में शिफ्ट हो गए। नियम के मुताबिक, वे 15 महीने तक सरकारी घर में रह सकते थे, लेकिन उनके मुताबिक वह माहौल उन्हें बिल्कुल रास नहीं आ रहा था।

चौटाला बोले - धनखड़ करेंगे म्यूजियम का उद्घाटन

अभय चौटाला ने आगे बताया कि धनखड़ परिवार के इतने करीबी हैं कि सिरसा स्थित चौधरी देवीलाल इंस्टीट्यूट में तैयार किए गए चौटाला म्यूजियम का उद्घाटन भी उन्हीं से करवाया जाएगा। इस म्यूजियम में चौधरी देवीलाल और ओपी चौटाला से जुड़ी स्मृतियां सहेजी गई हैं।

25 सितंबर को रोहतक में ताऊ देवीलाल की जयंती पर एक बड़ी रैली होने वाली है। इस पर अभी साफ नहीं है कि धनखड़ उसमें शिरकत करेंगे या नहीं। चौटाला का कहना है कि वे जल्द ही धनखड़ से मिलकर इस पर चर्चा करेंगे।

धनखड़ अब पूरी तरह स्वस्थ हैं! फिर इस्तीफे की असली वजह क्या?

अभय चौटाला के इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। इस्तीफे के पीछे स्वास्थ्य कारण बताने वाले धनखड़ अब पूरी तरह स्वस्थ बताए जा रहे हैं। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर असली वजह क्या थी? क्या उनके इस्तीफे के पीछे कोई दबाव था या फिर निजी असहजता?

अभय चौटाला के खुलासे ने साफ कर दिया है कि इस्तीफे के बाद जगदीप धनखड़ के सामने सबसे बड़ी समस्या उनका रहन-सहन था। सरकारी आवास में 'घुटन' महसूस करने वाले पूर्व उपराष्ट्रपति अब चौटाला के फार्महाउस में राहत की जिंदगी जी रहे हैं। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस्तीफे के पीछे यही एक कारण था, या कहानी में कुछ और भी छिपा है?

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