Aditya L-1 ने रात में धरती की दूसरी कक्षा में लगाई लंबी छलांग, कहां है अपना यान? ISRO ने दिया अपडेट
Aditya-L1 Mission: भारत के पहले सौर मिशन आदित्य-L1 ने धरती की ऑर्बिट में दूसरी छलांग लगा दी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (ISRO) ने अपडेट देते हुए कहा है कि स्पेसक्राफ्ट 282 km x 40225 km के ऑर्बिट में है।
इसरो ने बताया है कि स्पेसक्राफ्ट 18 सितंबर 2023 तक धरती के चारों तरफ चार बार अपनी ऑर्बिट बदलेगा। इसरो ने कहा कि धरती के चारों तरफ चार बार ऑर्बिट बदलने से स्पेसक्राफ्ट को इतनी रफ्तार मिलेगी कि वह 15 लाख किलोमीटर लंबी यात्रा पूरा कर लैग्रेंज प्वाइंट तक पहुंच सके। जहां से वह सूर्य की स्टडी करेगा।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने मंगलवार तड़के ट्वीट कर कहा कि आदित्य एल1 ने पृथ्वी से जुड़े दूसरे युद्धाभ्यास को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अंतरिक्ष एजेंसी के टेलीमेट्री, ट्रैकिंग और कमांड नेटवर्क (ISTRAC) ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है।
स्पेसक्राफ्ट ने इससे पहले रविवार को पहली छलांग लगाई थी। इसके बाद सोमवार की रात ये दूसरी छलांग है। इसरो के मुताबिक स्पेसक्राफ्ट अगली छलांग 10 सितंबर को सुबह 2:30 बजे के आसपास लगाएगा।
अंतरिक्ष यान को सूर्य-पृथ्वी प्रणाली के लैग्रेंज प्वाइंट L1 पर पहुंचने के लिए पहले दो और पृथ्वी-कक्षीय प्रक्रियाओं से गुजरना होगा, जो पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किमी दूर है। लैग्रेंज प्वाइंट L1, वह जगह है, जहां से सूर्य को बिना किसी बाधा के अंतरिक्ष यान देख सकता है और उसकी बाहरी परत की स्टडी कर सकता है। लगभग 127 दिनों के बाद आदित्य एल1 के लैग्रेंज प्वाइंट L1 पर पहुंचेगा।
इसरो ने कहा कि अभी तक आदित्य-L1, जैसा तय किया गया था। उसी के हिसाब से काम कर रहा है। इसरो ने पहली बार संपर्क के लिए X-बैंड फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल किया है। इसरो सैटलाइट से संपर्क के लिए दो बैंड का इस्तेमाल करता है। पहला है 'S' बैंड, जो 2-2.5 GHz फ्रीक्वेंसी पर काम करता है। वहीं दूसरा है 'X' बैंड, जो 8-8.5GHz पर काम करता है।












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