Israel-Iran युद्ध के खिलाफ वामपंथी दलों ने खोला मोर्चा, केरल में CPM करेगी प्रदर्शन
Israel Iran War: केरल में सत्तारूढ़ सीपीआई(एम) ने मंगलवार को अमेरिका समर्थित इज़रायली आक्रमण के खिलाफ 17 और 18 जून को पूरे राज्य में युद्ध-विरोधी रैलियां और साम्राज्यवाद-विरोधी कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया है। पार्टी ने अपने बयान में कहा कि इज़राइल की हिंसक कार्रवाईयों ने पश्चिम एशिया को युद्ध के मैदान में बदल दिया है, जिससे वैश्विक स्तर पर युद्ध की भयावह स्थिति उत्पन्न हो गई है।
सीपीआई(एम) ने फिलिस्तीनी जनता की वर्तमान दयनीय स्थिति को उजागर करते हुए आरोप लगाया कि भारत इस संवेदनशील मुद्दे पर मौन रहकर इस आक्रमण की न केवल निंदा करने से बच रहा है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से इसे स्वीकार भी कर रहा है। बयान में पार्टी ने कहा कि इज़राइल ने एक संप्रभु राष्ट्र पर आक्रमण कर उसकी सभी बुनियादी व्यवस्थाओं को तहस-नहस करने की योजना अपनाई है। इस हमले का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी साम्राज्यवाद के हितों की पूर्ति के लिए ईरान को कमजोर करना और पश्चिम एशिया में सभी विरोधी शक्तियों को समाप्त करना है।

'संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव का उल्लंघन हो रहा है'
बयान में यह भी कहा गया कि इस तरह की नीतियों के खिलाफ अब चीन सहित कई देश सामने आ रहे हैं। सीपीआई(एम) ने कहा कि इज़राइल ईरान की परमाणु सुविधाओं पर हमला कर रहा है, जबकि ईरान बार-बार यह स्पष्ट कर चुका है कि वह परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणों में भी इस तथ्य की पुष्टि हुई है। वामपंथी पार्टी ने याद दिलाया कि अमेरिका ने भी इसी तरह का बहाना बनाकर इराक पर हमला किया था, यह दावा करते हुए कि वहां रासायनिक हथियार बनाए जा रहे हैं, जबकि बाद में यह साफ हो गया कि ऐसी कोई सुविधाएं वहां मौजूद नहीं थीं।
गाजा में फिलिस्तीनी जनता पर हो रहे हमलों का हवाला देते हुए सीपीआई(एम) ने कहा कि यह आक्रामकता संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव का उल्लंघन है जिसमें फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता देने की बात कही गई है। सीपीआई(एम) ने आरोप लगाया कि भारत, जो ऐतिहासिक रूप से फिलिस्तीनी जनता के साथ खड़ा रहा है, अब अमेरिका का कनिष्ठ साझेदार बनकर इस तरह की गतिविधियों पर चुप्पी साधे हुए है, जो परोक्ष रूप से उसकी सहमति को दर्शाता है।
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'संगठित होकर आवाज उठानी चाहिए'
वाम दल ने आगाह किया कि इन अमानवीय कृत्यों को धार्मिक संघर्षों के रूप में प्रस्तुत करने के प्रयासों से सावधान रहना चाहिए और आम जनता को ऐसी नीतियों के खिलाफ संगठित होकर आवाज उठानी चाहिए, जिनका उद्देश्य केवल हथियार व्यापारियों के हितों की रक्षा करना है, चाहे इसके लिए लोगों की जानें ही क्यों न जाएं। इज़राइल ने दावा किया है कि ईरान के शीर्ष सैन्य नेताओं, परमाणु वैज्ञानिकों, यूरेनियम संवर्धन स्थलों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर उसका व्यापक हमला इस वजह से जरूरी था ताकि ईरान को परमाणु हथियार बनाने के और करीब पहुंचने से रोका जा सके। शुक्रवार से अब तक इन हमलों में कम से कम 224 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल पर 370 से अधिक मिसाइलें और सैकड़ों ड्रोन दागे हैं। अब तक इज़राइल में 24 लोगों की मौत हो चुकी है और 500 से अधिक घायल हुए हैं। इजरायली सेना ने बताया कि मंगलवार को एक नई मिसाइल बौछार शुरू हुई और उत्तरी इज़राइल में विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं।
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