इस्लाम से आतंकवाद का कोई लेना-देना नहीं
पटना। दहशतगर्दी और आतंकवाद का कोई मजहब नहीं है। इस्लाम से इसका कोई लेना-देना नहीं है। दुनिया के तमाम उलेमाओं ने इसकी निंदा की है। दहशतगर्दी का सबसे बड़ा नुकसान मुसलमानों को ही उठाना पड़ रहा है।

आतंकवादी केवल अन्य धर्मोे के लोगों को ही नहीं बल्कि मुसलमानों को भी मार रहे हैं, जबकि इस्लाम में मासूमों को, महिलाओं को एवं बेकसूर लोगों को कत्ल करना हराम माना जाता है।
हरम शरीफ (मक्का) के बामाम शेख साहेल बिन मोहम्मद बिन इब्राहिम अल तालिब ने अपनी यह बात पटना में आयोजित एक कॉन्फ्रेंस में रखी। उसी दौरान उन्होंने तौहिद एजुकेशनल ट्रस्ट के तत्वधान में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि वह इस्लाम धर्म के लोग नहीं है, जो दुनिया में आतंकवाद फैला रहे हैं।
इस्लाम पर पटना में कॉन्फ्रेंस
मोहम्मद बिन इब्राहिम ने दहशतगर्दी के खिलाफ सभी को इकट्ठा होकर घोषणा करने की अपील की और कहा कि लोग दहशतगर्दी की निंदा करें एवं कहें कि इस्लाम से इसका कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने कहा कि कुछ शक्तियां सऊदी अरब पर दहशतगर्दी को लेकर आरोप भी लगाती हैं। जबकि वह दहशतगर्दी से दूर है। सऊदी अरब की ख्वाहिश है कि दुनिया भर के लोगों की सलामती हो। उन्हें सुरक्षा नसीब हो।
लोगों की सलामती चाहता है इस्लाम
खुदा जुलुम और दहशतगर्दी को समाप्त करने में मदद फरमाये। अमन एवं शांति कायम हो। इंसान का दमन -उत्पीड़न समाप्त हो। हम हिंदुस्तान के सलामती के लिए दुआ करते हैं।
उन्होंने कहा कि दुनिया में तकनीकी तरक्की हुई है, लेकिन दुखद है कि तकनीकी तरक्की के बाद भी अमन चैन कायम नहीं हो पाया। इंसानों का एक दूसरे पर जुल्म बढ़ा है, जो कि इस्लामिक तालीम की रोशनी में ही दूर किया जा सकता है।
दहशतगर्दी के माहौल को समाप्त करने के लिए आज इस्लाम के तालिमात को फैलाने की जरूरत है। उन्होंने इस्लाम को इंसानियत का पहरेदार बताते हुए कहा कि अल्लाह तारा ने लोगों की सलामती को जन्नत से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि हजरत साहब का सबसे पहला संदेश लोगों को सलाम करने के लिए था। एक दूसरे को सलाम करना एवं लोगों की सलामती उन्होंने मुसलमानों के लिए अनिवार्य किया।












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