किसान आंदोलन पर किसने किया कब्जा ? क्या लग रहे हैं आंदोलन पर आरोप ?
नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों को रद्द करने को लेकर किसान मोर्चा संभाले हुए हैं। पिछले दो सप्ताह से तो किसानों ने दिल्ली के बॉर्डर को ही अपना गढ़ बना लिया है। इस दौरान 5 दौर की वार्ता भी हुई जबकि एक बार गृह मंत्री अमित शाह ने किसानों से मुलाकात की लेकिन ये बातचीत भी विफल रही। इसके बाद किसानों ने देश भर में प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। इस बीच किसानों के आंदोलन के बारे में एक नया नैरेटिव तैयार कया जा रहा है जिसमें अब कहा जा रहा है कि किसानों का आंदोलन अति वामपंथियों के हाथ में चला गया है। या यूं कहिए कि हाईजैक कर लिया गया है।

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक मीडिया के हलकों में सरकार ने अनौपचारिक चैनलों के माध्यम से किसान आंदोलन और भीमा-कोरेगांव मामले के बीच संबंध स्थापित करने का प्रयास किया है।
बीजेपी के कुछ स्रोतों में इस आंदोलन में अति वामपंथियों के रेडिकल धड़े की घुसपैठ की बात की जाने लगी है। वहीं बीजेपी के कट्टर समर्थक सोशल मीडिया पर इस आंदोलन में अर्बन नक्सल की झलक देख रहे हैं।
बीजेपी के स्रोत के मुताबिक "उनके पास ऐसे इनपुट हैं कि आने वाले दिनों में इस आंदोलन के जरिए हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं को बढ़ावा देने की तैयारी है। इसके साथ ही रेडिकल तत्वों ने किसानों को दिल्ली-जयपुर राजमार्ग अवरुद्ध करने की सलाह दी है।"
किसान नेताओं ने किया खारिज
वहीं आंदोलन को लेकर इस तरह के गंभीर आरोपों का किसान नेताओं ने कड़ा प्रतिकार किया है। किसानों ने अपने आंदोलन का राजनीति से परे और शांतिपूर्ण बताया है।
रामिंदर सिंह पटियाल कीर्ति किसान संगठन के अध्यक्ष हैं। उनका संगठन उन 32 संगठनों में से एक है जो इस आंदोलन में सक्रिय हैं। सरकार के दावे को खारिज करते हुए रामिंदर पटियाल कहते हैं कि "कोई हमें प्रभावित नहीं कर सकता। ये सरकार की हमें बदनाम करने का प्रोपेगैंडा है। यहां सभी फैसले संयुक्त किसान यूनियन लेती है।"
पिछले कई दिनों से जहां किसान सरकार से कानून रद्द करने की मांग को लेकर मजबूती से सड़कों पर जमे हुए हैं। वहीं बीजेपी समर्थक आंदोलन को अलग-अलग तरीके से खारिज करने की कोशिश कर रहे हैं।












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