अफगानिस्तान में भारतीयों की किडनैपिंग में अमेरिका, चीन और पाकिस्तान हैं जिम्मेदार!
रविवार को अफगानिस्तान से आई एक खबर ने मोदी सरकार के माथे फिर से बल डाल दिए हैं। अफगानिस्तान के बाघलान प्रांत में पुल-ए-खुमरी इलाके से सात भारतीय इंजीनियरों का अपहरण कर लिया है। ईराक में अगवा भारतीयों के अपहरण और उनकी हत्या के बाद यह निश्चित तौर पर केंद्र सरकार के लिए बड़ी घटना है।
नई दिल्ली। रविवार को अफगानिस्तान से आई एक खबर ने मोदी सरकार के माथे फिर से बल डाल दिए हैं। अफगानिस्तान के बाघलान प्रांत में पुल-ए-खुमरी इलाके से सात भारतीय इंजीनियरों का अपहरण कर लिया है। ईराक में अगवा भारतीयों के अपहरण और उनकी हत्या के बाद यह निश्चित तौर पर केंद्र सरकार के लिए बड़ी घटना है। जिन इंजीनियर्स का अपहरण किया गया है वह यहां पर बतौर इलेक्ट्रिकल इंजीनियर्स काम कर रहे थे। इस घटना के बाद से ही इंटेलीजेंस एजेंसियां चौकन्नी हो गई हैं और घटना की वजहों का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं। यह भारत के लिए बुरी खबर है और यह खबर ऐसे समय में आई है जब हाल ही में तालिबान ने शांति प्रक्रिया से बाहर होने का ऐलान कर दिया है। तालिबान के साथ ही इस घटना के पीछे पाकिस्तान और इसकी इंटेलीजेंस एजेंसी आईएसआई का हाथ होने से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

तालिबान ने लॉन्च किया ऑपरेशन खंदक
तालिबान ने अफगानिस्तान में पिछले दिनों 'ऑपरेशन खंदक' लॉन्च किया है। तालिबान ने पिछले दिनों ऐलान किया था कि वह अब और आक्रामक रवैया अपनाने जा रहा है। इसके साथ ही तालिबान ने अफगानिस्तान सरकार की ओर से दिए गए शांति वार्ता के प्रस्ताव को 'धोखा देने वाला और उसके खिलाफ साजिश' बताया है। अमेरिका और अफगानिस्तान सरकार की ओर से तालिबान के सामने शांति वार्ता का प्रस्ताव रखा गया था। तालिबान को इस उम्मीद से शांति वार्ता का प्रस्ताव दिया गया था ताकि इस क्षेत्र में स्थिरता आ सके। अफगानिस्तान में भारत के पूर्व राजदूत रह चुके विवेक काटजू कहते हैं कि ऐसा हो सकता है कि भारतीय इंजीनियर्स सरकार और तालिबान के बीच जारी रस्साकशी में फंस गए हों। अफगानिस्तान का बाघलान प्रांत में तालिबान का प्रभाव है और काटजू के मुताबिक इस हिस्से में उनके प्रभाव की वजह से ही बिजली नहीं आई है। हाल के कुछ वर्षों में तालिबान ने अफगानिस्तान के उत्तरी प्रांत में कई पावर प्रोजेक्ट्स को निशाना बनाया है।

अमेरिका चाहता है भारत हो मजबूत
अमेरिका चाहता है कि भारत, अफगानिस्तान में अपना रोल और बड़ा करे और आर्थिक तौर पर यहां पर खुद को मजबूत करे। अमेरिका की इच्छा भारत, अफगानिस्तान में लोकप्रिय सहायक कार्यक्रमों और कमर्शियल कंपनियों और दूसरे निर्माण कार्यों के जरिए अफगानिस्तान में अपना रोल बढ़ाए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 21 अगस्त 2017 को अफगानिस्तान और साउथ एशिया पॉलिसी से जुड़े बयान में अफगानिस्तान में भारत के रोल की खुलकर तारीफ की थी। वहीं उन्होंने पाकिस्तान को फटकार लगाते हुए कहा था कि उसे तालिबान और दूसरे आतंकी संगठनों का समर्थन बंद करना पड़ेगा। यह बात गौर करने वाली है कि तालिबान ने जब ऑपरेशन खंदक लॉन्च किया तो उसने अमेरिका को भी धमकी दी। उसने कहा था, 'अमेरिकी घुसपैठिए और उनके इंटेलीजेंस एजेंट उसका प्राथमिक निशाना है।' तालिबान ने इसके साथ ही अफगानिस्तान के नागरिकों को विदेशी और अफगान सेनाओं के ठिकानों से दूर रहने की सलाह दी थी।

भारत-चीन का ज्वॉइन्ट प्रोजेक्ट पाकिस्तान की टेंशन
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के शहर वुहान गए थे और यहां पर उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई थी। जिनपिंग और मोदी की इस मुलाकात के बाद चीन और भारत ने अफगानिस्तान में एक इकोनॉमिक प्रोजेक्ट शुरू करने का ऐलान कर दिया। मोदी का चीन दौरा शुरू होने से पहले ही पाकिस्तान थोड़ा घबराया हुआ था। अफगानिस्तान में इस प्रोजेक्ट का मतलब पहले से ही प्रभावशाली भारत, अफगानिस्तान में और प्रभावशाली हो सकता है। इसके अलावा चीन का प्रभुत्व यहां पर बढ़ेगा। प्रोजेक्ट के बाद भारत और चीन और करीब आ सकते हैं। यह बात कहीं न कहीं पाकिस्तान को भी नागवार गुजर रही है। अफगानिस्तान में भारत और चीन के प्रोजेक्ट का मतलब चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (सीपीईसी) को नुकसान पहुंचना।

पहले भी पाक की मदद से हुए हैं हमले
पाकिस्तान पहले भी अफगानिस्तान में मौजूद भारतीय नागरिकों और भारत के प्रोजेक्ट्स को निशाना बना चुका है। हक्कानी नेटवर्क और तालिबान आतंकियों ने साल 2008 में भारतीय दूतावास पर हमला किया था। इस हमले में एक आर्मी ऑफिसर और एक वरिष्ठ डिप्लोमैट की मौत हो गई थी। इसके एक वर्ष बाद फिर से भारत के दूतावास को निशाना बनाया गया। इसके अलावा भारतीय जो अफगानिस्तान के विकास और यहां पर मददगार प्रोजेक्ट्स में शामिल भारतीयों को निशाना बना चुके हैं। कई भारतीयों ने यहां पर इसकी वजह से अपनी जान गंवाई है। पहले भी भारतीयों का अपहरण किया गया है और इनमें से कुछ को छोड़ दिया गया या जबकि कुछ की हत्या कर दी गई ।












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