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क्या कमल हासन की राजनीति में एंट्री फ़्लॉप शो है?

Kamal Haasan, कमल हासन
Getty Images
Kamal Haasan, कमल हासन

दक्षिणी तमिलनाडु मे मदुरई के नज़दीक रामनाथपुरम में कमल हासन अपनी नई पार्टी मक्कल नीदि मय्यम (एमएनएम) के स्थानीय उम्मीदवार का प्रचार कर रहे थे. उन्हें सुनने एक भीड़ जमा थी.

मक्कल का अर्थ है 'लोग', नीदि का मतलब है 'जस्टिस या इंसाफ़'. मय्यम का अर्थ 'केंद्र'. यानी एक ऐसी जगह जहां सभी के लिए जगह है, चाहे वो वामपंथी हो या दक्षिणपंथी.

कई फ़िल्म अवार्ड जीत चुके कमल हासन एक रूफ़टॉप गाड़ी से सभी का अभिवादन स्वीकार कर रहे थे. उनके फ़ैंस मोबाइल पर तस्वीरें ले रहे थे. सड़क के किनारे पार्टी समर्थक कान फाड़ देने वाली आवाज़ में उनकी फ़िल्मों के गाने चला रहे थे.

Kamal Haasan, कमल हासन
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Kamal Haasan, कमल हासन

क्या आप कमल हासन को वोट करेंगे, ये पूछने पर थोड़ी दूर खड़े एक व्यक्ति ने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा, मैं कमल हासन का फ़ैन तो हूं, लेकिन न तो वो, न कमल हासन की तस्वीरें और वीडियो उतारने वाले उन्हें वोट करेंगे.

उन्होंने कहा, "भीड़ इकट्ठा होना और वोट देना दो अलग-अलग बाते हैं." ये कहकर वो मुड़े और वहां से चले गए.

ऐसा मुझे एक से ज़्यादा लोगों ने कहा.

राजनीतिक पंडित एक्टर, डॉयरेक्टर, डांसर कमल हासन की एंट्री पर बहुत तवज्जो नहीं दे रहे हैं.

कमल हासन, Kamal Hassan
BBC
कमल हासन, Kamal Hassan

खुद चुनाव नहीं लड़ रहे कमल हासन

कमल हासन और उनकी पार्टी के बारे में मुझे ये बातें कई जगह सुनने को मिलीं- कि वो बेहद ज़हीन सोच रखने वाले कलाकार तो हैं लेकिन राजनीति में बिना पसीना बहाए ट्विटर के भरोसे पार्टी बनाकर चुनाव नहीं जीता जाता.

कुछ लोग इसे एक राजनीतिक प्रयोग मान रहे हैं जिसका इस चुनाव में कोई असर नहीं होगा.

कुछ का तो ख्याल है कि अगर चुनाव में पार्टी अच्छा नहीं कर पाई तो कमल हासन का ये पहला और आख़िरी चुनाव होगा.

64 साल के कमल हासन खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. उनके समर्थक सभी सीटें जीतने का दावा करते हैं. पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र में पानी की समस्या, ग़रीबी हटाने के वायदे किए हैं.

कमल हासन, Kamal Hassan
FB @Kamal Haasan
कमल हासन, Kamal Hassan

फिल्मों से राजनीति का सफ़र

तमिलनाडु की राजनीति में कमल हासन से पहले करुणानिधि, अन्नादुरई, जयललिता, एमजीआर जैसे फ़िल्मी हस्तियों ने डंका बजाया. तो फिर कमल हासन क्यों नहीं?

मद्रास विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र पढ़ाने वाले प्रोफ़ेसर रामू मनिवन्नन कहते हैं, "कमल हासन बेहतरीन कलाकार हैं लेकिन उन्हें खुद को स्थापित करने के लिए ज़मीन पर काम करना होगा. दूसरों को सवालों के कटघरे में खड़ा करके आप राजनेता नहीं बन जाते."

आखिरकार करुणानिधि, एमजीआर और जयललिता जैसी शख्सियतों को राजनीति में रातों रात सफलता नहीं मिली.

तमिल राजनीति
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तमिल राजनीति

द्रविड़ राजनीति के प्रमुख स्तंभ

अन्नादुराई और करुणानिधि ने कला और सिनेमा का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक सोच को लोगों तक पहुंचाने के लिए किया. जैसे शिवाजी गणेशन की 'पराशक्ति' जैसी फ़िल्में जिसकी स्क्रिप्ट करुणानिधि ने लिखी.

फ़िल्म में सामाजिक व्यवस्था, ब्राह्मणवाद और जाति व्यवस्था पर तीखी टिप्पणी की गई थी. भाषा, ब्राह्मणवाद का प्रभुत्व, सांस्कृति पहचान जैसे विषय द्रविड़ राजनीति के प्रमुख स्तंभ रहे हैं.

एमजीआर भी रातों रात राजनीतिक स्टार नहीं बने. वो पहले कांग्रेस में थे. बाद में डीएमएके में एमएलए, एमएलसी, पार्टी कोषाध्यक्ष के पद पर रहे. यानि सालों की मेहनत के बाद वो तमिलनाडु की मुख्यमंत्री की कुर्सी पर पहुंचे.

जयललिता को भी राह आसान नहीं रही, खासकर पुरुष प्रधान सिनेमा और राजनीति में. जब वो साल 1984 में राज्यसभा में गईं तो प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी उनके भाषण से प्रभावित हुईं. वो पार्टी की प्रोपागैंडा सेक्रटरी भी रहीं.

उन्होंने तमिलनाडु के कोने-कोने का दौरा किया. एमजीआर की मौत के बाद उनके राजनीतिक उत्तराधिकारी की लड़ाई में जयललिता ने अपना लोहा मनवाया.

कमल हासन, Kamal Hassan
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कमल हासन, Kamal Hassan

'कमल हासन गांधी की तरह'

कमल हासन के आलोचक कहते हैं न उन्होंने राजनीति में इंटर्नशिप की, न उसे सीखा, न उसे सीखने के लिए सालों पसीना बहाया.

डीएमके नेता और सांसद टीकेएस इलंगोवन पूछते हैं क्या लोगों को पता है कि आरक्षण, केंद्र के साथ रिश्तों जैसे महत्वूर्ण मुद्दों पर कमल हासन की सोच क्या है?

एक विश्लेषक के मुताबिक "कमल हासन सड़क पर प्रदर्शन की राजनीति से दूर भागते हैं. पश्चिम बंगाल में देखिए कि कैसे ममता बनर्जी से वामपंथी दलों को उखाड़ फेंका. अरविंद केजरीवाल ने इंडिया अगेंस्ट करप्शन प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल किया. कमल हासन ने पिछले एक साल में एक भी प्रदर्शन का नेतृत्व नहीं किया है."

उधर फ़िल्ममेकर और एमएनएम पार्टी प्रवक्ता मुरली अब्बास कहते हैं कमल हासन और राजनीति का पुराना रिश्ता है.

उन्होंने कहा, "कमल हासन के लिए राजनीति कोई नई बात नहीं. वो सालों इसे गौर से देखते रहे हैं. जिस तरह महात्मा गांधी ने अफ़्रीका से आने के बाद राजनीति में हिस्सा लिया, कमल हासन भी गांधी की तरह हैं. जनता उन्हें जानती और उन पर विश्वास करती है."

अख़बार द हिंदू के डेप्युटी सुरेश कुमार
BBC
अख़बार द हिंदू के डेप्युटी सुरेश कुमार

कमज़ोर आधार

द हिंदू के डिप्टी सुरेश कुमार पार्टी के कमज़ोर आधार की बात करते हैं.

वो कहते हैं, "ऐसे वक्त जब तमिलनाडु में उन्हें मज़बूती हासिल करनी है, वो पश्चिम बंगाल गए, ममता बनर्जी से मिले और कहा कि वो उनकी पार्टी के उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे. उन्होंने आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की. उन्हें ये फ़ैसला करना होगा कि वो राज्य की राजनीति में रहना चाहते हैं या फिर सांसद और बुद्धिजीवी बनना चाहते हैं."

साल 2015 में कमल हासन ने अरविंद केजरीवाल से दिल्ली में मुलाकात की थी.

उस मुलाकात को कवर करने वाले बीबीसी तमिल के जयकुमार बताते हैं कि कमल हासन उस वक्त ही राजनीति में आने की सोच रहे थे और अरविंद केजरीवाल से पार्टी चलाने के गुर सीखना चाहते थे. उसके बाद अरविंद केजरीवाल कमल हासन से मिलने चेन्नई भी गए थे.

क्या कमल हासन के लिए वोट करेंगे फैंस?

कमल हासन के बारे में कहा जाता है कि वो पहले तमिल कलाकार हैं जिन्होंने अपने फ़ैन क्लब्स को वेलफेयर संस्थाओं में तब्दील किया.

जयकुमार कहते हैं, "ये कहना शायद सही नहीं होगा कि कमल हासन का तमिलनाडु में बेस नहीं है. तमिलनाडु की छोटी से छोटी जगह पर यहां बड़े फ़िल्मी कलाकार के फ़ैन क्लब्स होते हैं. शायद यही कारण है कि राज्य में बड़े कलाकार राजनीति की ओर कदम बढ़ाते हैं. कमल हासन का मानना था कि फैन क्लब्स के इस बेस को, इस ताकत को बड़े कटआउट् पर दूध चढ़ाने, उनका गुणगान करने की बजाए उनका इस्तेमाल सामाजिक कार्यों के लिए करना चाहिए."

लेकिन क्या ये फैंस जो अभी तक डीएमके, एआईएडीएमके जैसी पार्टियों को वोट करते आए थे, अब कमल हासन के लिए वोट करेंगे?

करुणानिधि, जयललिता
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करुणानिधि, जयललिता

हार की डर से लिया फ़ैसला

कमल हासन के चुनाव न लड़ने के फ़ैसले को कही हलकों में हार से डर की तरह लिया गया है.

एक विश्लेषक के मुताबिक, "एक नेता के लिए ये ज़रूरी है कि वो अपने अनुयायियों के लिए खुद उदाहरण बने. अगर उन्होंने अपने खुद के इलाके रामनाथपुरम या किसी ऐसी जगह से चुनाव लड़ा होता जहां पढ़े-लिखे वोटरों की तादाद अच्छी खासी है, इससे पार्टी में नई जान आ जाती."

"नेता को हारने की चिंता नहीं करनी चाहिए. अन्ना चुनाव हारे, जयललिता चुनाव हारीं. सिर्फ़ करुणानिधि चुनाव नहीं हारे. नेताओं को अपनी हार का इस्तेमाल अगली सीढ़ी चढ़ने के लिए किया है."

कमल हासन के समर्थकों के मुताबिक इस फ़ैसले से वो अपने उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार के लिए समय निकाल पाएंगे.

शिवगंगाई क्षेत्र में पार्टी सदस्य और कमल हासन फ़ैन चंद्रन का कहना था, "ये पहली बार है कि हम सभी 40 लोकसभा क्षेत्रों (तमिलनाडु में 39 और पुद्दुचेरी में एक) में चुनाव लड़ रहे हैं. सभी जगहों में प्रचार के लिए पार्टी को उनकी ज़रूरत है. वो भविष्य में चुनाव लड़ेंगे."

पार्टी समर्थक इस आरोप को ग़लत बताते हैं कि कमल हासन हारने से डरते हैं.

तमिल राजनीति
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पार्टी उम्मीदवारों का राजनीतिक बेस?

कमल हासन ने जिन उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है, उनमें से कई फ़िल्मी दुनिया से हैं, कुछ रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स हैं, और कुछ दूसरे क्षेत्रों से भी हैं.

जैसे गीतकार स्नेहन, कॉमेडियन कोवई सरला, रिटायर्ड आईपीएस अफ़सर एजी मौर्ज और ऐक्टर श्रीप्रिया.

इन हस्तियों के राजनीतिक बेस पर सवाल उठाने वाले लोग पूछते हैं, लोग उन्हें वोट क्यों देंगे.

उधर कमल हासन के समर्थकों के मुताबिक पार्टी ने जानबूझकर पढ़े-लिखे लोगों को टिकट दिया है. और ऐसा नहीं कि डीएमके जैसे दलों में फ़िल्मी बैकग्राउंड से लोग नहीं.

डीएमके नेता स्टालिन के पुत्र दयानिधि स्टालिन भी एक्टर हैं.

पार्टी प्रवक्ता मुरली अब्बास कहते हैं, "हमारी पार्टी की तुलना में डीएमके और एआईएडीएमके में फ़िल्मी दुनिया से आए हुए लोग ज़्यादा हैं."

वो कहते हैं, "आज के ब्यूरोक्रेट्स, राजनीतिज्ञों के साथ काम करने वाले आईपीएस और आईएएस अफ़सर राजनीतिक हालात से बहुत नाराज़ हैं और वो हमारी पार्टी में शामिल होना चाहते हैं. ऐसे भी ब्यूरोक्रेट्स हैं जिन्होंने रिटायरमेंट लेकर हमारी पार्टी जॉइन की."

उनका इशारा शायद पार्टी के उम्मीदवार और पूर्व आईएएस अफ़सर आर रंगराजन की ओर था जो दक्षिणी चेन्नई से पार्टी के उम्मीदवार हैं.

कमल हासन, Kamal Hassan
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कमल हासन, Kamal Hassan

पैसा नहीं

पार्टी समर्थकों के मुताबिक कमल हासन कहते रहे हैं कि उन्होंने जितना पैसा कमाया वो फ़िल्मों में लगा दिया है.

तो राजनीति जैसे महंगे क्षेत्र में वो कैसे टिके हुए हैं और प्रचार के लिए पैसा कहां से आ रहा है.

पार्टी प्रवक्ता मुरली अब्बास मानते हैं कि "पार्टी चलाना एक चुनौती है" लेकिन "हम जनता से पैसे ले रहे हैं और जनता अपनी जेब से चुनाव प्रचार पर ख़र्च कर रही है."

पार्टी अपनी वेबसाइट पर आम लोगों से चंदा मांग रही है.

कयास ये भी हैं कि तमिलनाडु के बार जैसे केरल में कमल हासन के फ़ैंस, बड़े बिज़नेसमैन पार्टी की मदद कर रहे हैं.

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विजयकांत एक्सपेरिमेंट से सीखेंगे?

कमल हासन की पार्टी की बात करते हुए कई बार एक्टर विजयकांत की डीएमडीके का हवाला दिया जाता है.

साल 2006 में उन्होंने डीएमडीके पार्टी की शुरुआत की. तब पार्टी का वोट प्रतिशत आठ था जो 10 प्रतिशत तक जा पहुंचा लेकिन हाल के चुनाव में यह दो से ढाई प्रतिशत पर जाकर सिमट गया.

रिपोर्टों के मुताबिक उनका स्वास्थ्य उन्हें परेशान कर रहा है और पार्टी हाशिए पर है.

पार्टी प्रवक्ता मुरली अब्बास कहते हैं, "हम विजय कांत और सभी राजनीतिक दलों के अनुभवों से सीख ले रहे हैं और हमे भरोसा है कि हम सही दिशों में आगे बढ़ रहे हैं और जनता हमारे साथ है."

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