क्या कोरोना की लड़ाई में साख दांव पर लगा बैठे हैं बाबा रामदेव? योग और आयुर्वेद में रचा है बड़ा कीर्तिमान
बेंगलुरू। योग और आयुर्वेद के सहारे पूरी दुनिया में कीर्तिमान स्थापित करने वाले योग गुरू स्वामी रामदेव की 25 वर्ष पुरानी साख कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में दांव पर लग गई प्रतीत हो रही है। बाबा रामदेव द्वारा संचालित दिव्य फार्मेसी द्वारा निर्मित कथित कोरोना निवारक दवा CORONIL लांचिंग के साथ ही विवादों में आ गई है और अगर यह विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है, जिससे रामकृष्ण यादव उर्फ बाबा रामदेव की साख पर दाग लगना तय माना जा रहा है।

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गौरतलब है पूरी दुनिया में करीब 94 लाख से अधिक लोगों को अपने चपेट में ले चुकी नोवल कोरोना वायरस के इलाज का दावा करते हुए गत 23 जून को बाबा रामदेव ने CORONIL नामक दवा लांच की है। दिव्य फार्मेसी, हरिद्वार तैयार की गई उक्त दवा को लेकर यह दावा किया गया है कि इसके सेवन से एक हफ्ते के भीतर कोरोना संक्रमित मरीज स्वस्थ हो जाएगा। पतंजलि योगपीठ की ओर से यह भी दावा किया कि हफ्ते भर में पूरे देश में CORONIL दवा उपलब्ध होगी, जिसकी योजना एक बड़े बाजार को लक्षित करके बनाया गया लगता है।

कोरोना वायरस के इलाज के लिए पूरी दुनिया संर्घषरत है
निः संदेह कोरोना वायरस के इलाज के लिए संर्घषरत पूरी दुनिया के लिए यह खबर एक बड़ी खुशखबरी से कम नहीं है, लेकिन बाबा रामदेव के कोरोना निवारक दवा CORONIL को लेकर विवाद तब शुरू हो गया जब आयुष मंत्रालय ने मामले से अनभिज्ञता जाहिर करते हुए CORONIL नामक दवा की उपयोगिता और उसकी प्रमाणिकता को लेकर सवाल खड़े करते हुए बाबा रामदेव को CORONIL को कोरोना निवारक दवा के रूप में प्रचारित करने के लिए विज्ञापन करने पर रोक लगा दी।

आयुष मंत्रालय ने बाबा रामदेव के कोरोना निवारक दवा पर उठाए सवाल?
आयुष मंत्रालय ने बाबा रामदेव के कोरोना निवारक दवा विकसित करने के दावे पर सरकार का पक्ष साफ करते हुए कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है, जिसके बाद स्वामी रामदेव ने आयुष मंत्रालय को घोषित कोरोना निवारक दवा CORONIL और किट में शामिल दवाओं से संबंधित लाइसेंसिंग और क्लिीनिकल ट्रायल के दस्तावेज मुहैया करने की बात कही थी। लेकिन मामले ने तब तूल पकड़ लिया जब कोरोना निवारक दवा की लाइसेंसिंग को लेकर उत्तराखंड आयुष विभाग ने भी सवाल खड़ा कर दिया।

CORONILकी लाइसेंसिंग को लेकर उत्तराखंड आयुष विभाग ने सफाई दी
CORONIL दवा की लाइसेंसिंग को लेकर उत्तराखंड आयुष विभाग ने पतंजलि योगपीठ की दवा के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ किया कि उन्होंने कोरोना से जुड़ी किसी दवा का लाइसेंस दिव्य फार्मेसी को नहीं दिया है। आयुष विभाग का यहां तक कहना है कि दिव्य फार्मेसी ने कोरोना से जुड़ी किसी प्रकार की दवा के लाइसेंस के लिए आवेदन ही नहीं किया, न ही उन्हें इस संबंध में कोई लाइसेंस दिया गया है।

दिव्य फार्मेसी को केवल इम्यूनिटी बूस्टर व बुखार की दवा के लिए लाइसेंस
बकौल उत्तराखंड आयुष विभाग, दिव्य फार्मेसी हरिद्वार को केवल इम्यूनिटी बूस्टर और बुखार की दवा के लिए लाइसेंस दिया गया है। उत्तराखंड से मिली इस मंजूरी में CORONIL को बुखार खांसी और इम्यूनिटी में सहायक बताया गया है और मंजूरी में कहीं भी कोरोना वायरस का कोई जिक्र तक नहीं है। मामले पर सख्ती बरतते हुए आयुष विभाग ने दावों को संज्ञान लेते हुए अब दिव्य फार्मेसी को नोटिस भी जारी कर दिया और उनसे जवाब मांगा है।

उत्तराखंड आयुष विभाग ने दिव्य फार्मेसी को भेजा नोटिस
उत्तराखंड आयुष विभाग के मुताबिक अगर दिव्य फार्मेसी की तरफ से नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता है तो फिर आयुष विभाग की ओर से दिव्य फार्मेसी, हरिद्वार का जारी किया गया उक्त दवा के लाइसेंस को भी रद्द किया जाएगा, जिसे दवा बुखार, खांसी और इम्यूनिटी बूस्टर में सहायक होने के आधार पर जारी किया गया था, क्योंकि कोरोना वायरस के इलाज में सहायक की भूमिका निभाने वाले कई आयुर्वेदिक औषधियों से निर्मित काढ़े को रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए उपयोग की सलाह खुद आयुष विभाग पिछले कई महीनों से दे रही है।

25 वर्षों में बाबा रामदेव का योग और आयुर्वेद को बढ़ाने में है बड़ा योगदान
पिछले 25 वर्षों में बाबा रामदेव के योग और आयुर्वेद को आगे बढ़ाने में अतुलनीय योगदान रहा है, जिससे पूरी दुनिया के लोगों में भारतीय योग और आयुर्वेद की ओर ध्यान आकर्षित किया है, लेकिन जल्दबाजी भरे कदम में कोरोना वायरस के इलाज के रूप में सहायक औषिधियों को पेशकर बाबा रामदेव ने जोखिम लिया है, जो उनके साथ ही साथ योग और आर्युवेद की साख के लिए घातक साबित हो सकते हैं।

ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि CORONIL कोरोना को NIL (खत्म) कर देगा
आयुर्वेदिक दवाओं के जानकार डा. दीपक आचार्य ने वन इंडिया से बातचीत में बाबा रामदेव के कोरोना निवारक दवा CORONIL के दावे को खारिज करते हुए कहते हैं कि CORONIL बाज़ार और डिमांड आधारित ट्रैप है, जिसमें निर्दोष लोग अधिक फंसेंगे। उन्होंने कहा अभी तक ऐसा कोई साक्ष्य या गारंटी नहीं है कि CORONIL दवा कोरोना वायरस को NIL (खत्म) कर देगा।

फॉर्मूला सप्लीमेंट को कोरोना निवारक दवा के रूप में पेश करना ठीक नहीं
उन्होंने आगे कहा कि अगर हिंदुस्तान में महामारी नोवल कोरोना वायरस के इलाज की दवा खोज होती है तो भारतीय आयुर्वेद का परचम पूरी दुनिया में लहराएगा, लेकिन बाबा रामदेव द्वारा एक फॉर्मूला सप्लीमेंट को कोरोना निवारक दवा के रूप में पेश किया जाना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि CORONIL यकीनन फायदा करेगा, लेकिन यह नोवल कोरोना वायरस का इलाज नहीं है।

यह बाज़ार की रिले रेस को फटाफट जीतने के लिए और हड़बड़ाहट है
बकौल दीपक आचार्य, यह बाज़ार की रिले रेस को फटाफट जीतने के लिए और हड़बड़ाहट है, लेकिन इससे पूरी दुनिया में आयुर्वेद की फ़जीहत होने का खतरा है, जिससे एक बार फिर हिंदुस्तानी पारंपरिक ज्ञान को गर्त में ढकेले जाने का जोखिम है। क्योंकि अभी तक की यह अंतिम सच्चाई है कि कोरोनिल कोरोना से लड़ने में मदद जरूर करेगी, लेकिन यह कोरोना का कतई अंतिम समाधान नहीं है। उन्होंने कहा कि किस ऑथोरिटी ने कोरोनिल नाम को ब्रांडिंग के लिए 'ओके' किया, यह भी जाँच होनी चाहिए, जो कि पूरी तरह से भ्रामक है।

बाबा रामदेव ने जल्दबाजी में कोरोनिल को लांच करके जोखिम ले लिया है
ध्यान देने वाली बात यह है कि उत्तराखंड आयुष विभाग द्वारा दिव्य फार्मेसी हरिद्वार को केवल इम्यूनिटी बूस्टर और बुखार की दवा के लिए लाइसेंस दिया गया है, जिसमें CORONIL को बुखार खांसी और इम्यूनिटी में सहायक बताया गया है और मंजूरी में कहीं भी कोरोना वायरस का कोई जिक्र तक नहीं है, जो यह समझने के लिए काफी है कि बाबा रामदेव ने जल्दबाजी में कोरोनिल लांच का जोखिम ले लिया है, जिसकी कीमत उनके साथ ही साथ आर्युवेद को चुकानी पड़ सकती है, जो अभी भी ऐलोपैथ के सामने संघर्षरत है।
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