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INS Vikrant: कैसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन-पाकिस्तान को एकसाथ नापने की है तैयारी ? जानिए

नई दिल्ली, 2 सितंबर: भारत ने आज अपना पहला स्वदेश एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत को नौसेना को सौंप दिया है। इंडियन नेवी के पास अब ऐसे दो जंगी जहाज हो चुके हैं। यानी हिंद महासागर या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कहीं भी दुश्मन मुल्क अब समुद्री व्यापार में ना तो आसानी से किसी तरह की रुकावटें पैदा कर सकेंगे और ना ही अपने सैन्य मंसूबों को ही आगे बढ़ा पाएंगे। तथ्य ये है कि इन समुद्री इलाकों में पिछले कुछ समय से चीन ने अपनी गतिविधियां इतनी बढ़ा रखी हैं कि भारत ही नहीं, ऑस्ट्रेलिया, जापान से लेकर अमेरिका तक को इसकी चिंता रही है। लेकिन, अब भारत ने ठान लिया है कि ड्रैगन हो या उसका कोई भी 'नाजायज' मित्र, अब मनमानी के दिन लदने वाले हैं।

'हिंद-प्रशांत क्षेत्र और हिंद महासागर बड़ी रक्षा प्राथमिकता'

'हिंद-प्रशांत क्षेत्र और हिंद महासागर बड़ी रक्षा प्राथमिकता'

भारत के स्वदेशी विमान वाहक युद्धपोत की ताकत से तो अब दुनिया परिचित हो रही है, लेकिन इसे समुद्र में उतारने का मूल मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में ही संकेतों के जरिए उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा है, 'यदि लक्ष्य दुरंत हैं, यात्राएं दिगंत हैं, समंदर और चुनौतियां अनंत हैं- तो भारत का उत्तर है विक्रांत।' उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि 'पिछले समय में हिंद-प्रशांत क्षेत्र और हिंद महासागर में सुरक्षा चिंताओं को लंबे समय तक नजरअंदाज किया जाता रहा। लेकिन, आज ये क्षेत्र हमारे लिए देश की बड़ी रक्षा प्राथमिकता है।' दरअसल, पीएम मोदी की इन बातों में चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए संकेत भी हैं, तो क्वाड समूह (ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका) में शामिल मित्र देशों के लिए सीधा संदेश भी है।

भारत के पास हुए दो एयरक्राफ्ट कैरियर

भारत के पास हुए दो एयरक्राफ्ट कैरियर

दरअसल, आईएनएस विक्रांत को नौसेना में शामिल किए जाने के बाद अब भारत के पास आईएनएस विक्रमादित्य समेत दो एयरक्राफ्ट कैरियर हो गए हैं। यदि आईएनएस विक्रांत विशाखापत्तनम में पूर्वी समुद्र तट से हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर नजर रख सकेगा तो आईएनएस विक्रमादित्य नेवल शिप रिपेयर यार्ड (कारवार) से पश्चिम में समुद्री गतिविधियों पर फोकस रख पाएगा। आईएनएस विक्रांत का एक फॉर्वर्ड बेस अंडमान और निकोबार द्वीप में भी होगा, जबकि ग्रेट निकोबार द्वीप समूह में कैंपबेल बे के लिए एक कंटेनर टर्मिनल की योजना पहले से तैयार है।

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    सदियों बाद फिर से जगी उम्मीद

    सदियों बाद फिर से जगी उम्मीद

    अब इसका महत्त्व समझना जरूरी है। पिछले काफी समय से चीन इन सारे इलाकों में तरह-तरह के हथकंडों से अपनी ताकत बढ़ा रहा है। वह श्रीलंका, पाकिस्तान जैसे देशों को कर्ज के जाल में फंसाकर वहां पीएलए का बेस तैयार करने में जुटा है। अक्सर इसके प्रमाण सामने आते रहते हैं। चीन की इन चालबाजियों के चलते अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर भी असर पड़ रहा है। लेकिन, आईएनएस विक्रांत की वजह से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत का दबदबा सदियों बाद फिर कायम होने की उम्मीद बढ़ी है। यह इंडोनेशिया के मलक्का, सुंडा और लोम्बोक जलडमरूमध्य से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों को समुद्री और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद कर सकेगा। क्वाड देशों की भी यह बड़ी चिंता रही है।

    पाकिस्तान को भी दे दिया गया संकेत

    पाकिस्तान को भी दे दिया गया संकेत

    यही नहीं, आईएनएस विक्रांत जैसे अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती से भारत के कुछ पड़ोसी मित्र राष्ट्रों में भी एक भरोसा कायम होने की संभावना है, जो अभी चीन के डर और दबाव से अपने बंदरगाह और इंफ्रास्ट्रक्चर को ड्रैगन के लिए खोलने को मजबूर हो जाते हैं। चीन का हौसला बढ़ते रहने का बड़ा कारण ये भी है कि पाकिस्तान जैसे देश उसके सामने नतमस्तक होते रहे हैं। क्योंकि, पाकिस्तान की एकमात्र दुश्मनी भारत से है और वह इसके लिए कोई भी हथकंडा अपना लेता है। यही वजह है कि आज की तारीख में पाकिस्तान पर चीन की सेना का दबदबा काफी बढ़ चुका है। व्यापार के बहाने वह ग्वादर बंदरगाह को लगभग अपने कब्जे में ही ले चुका है। लेकिन, फिलहाल पाकिस्तान की हालत पतली करने के लिए आईएनएस विक्रांत का इतिहास ही काफी है। इस स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर का नाम देश के पहले एयरक्राफ्ट कैरियर 'विक्रांत' के नाम पर ही रखा गया है, जिसने 1971 की जंग में पाकिस्तानी पनडुब्बी' गाजी' को उसकी औकात बता दी थी।

    भारत के लिए हिंद महासागर महत्वपूर्ण क्यों है ?

    भारत के लिए हिंद महासागर महत्वपूर्ण क्यों है ?

    विश्व का 80 फीसदी तेल इसी इलाके से होकर जाता है। लेकिन, चीन की कब्जे वाली नीति ने इस क्षेत्र का संतुलन बिगाड़ रखा है। एक रिपोर्ट के अनुसार विश्व के जो सबसे व्यस्ततम 10 बंदरगाह हैं उनमें से सात पर ड्रैगन ने कब्जा कर रखा है। यही नहीं वह अपनी कर्ज नीति में फंसाकर करीब 63 देशों के 100 से भी अधिक बंदरगाहों पर अपना दबदबा बनाए हुए है। श्रीलंका के हंबनटोटा और पाकिस्तान के ग्वादर के अलावा वह एक छोटे से अफ्रीकी देश जिबूती के बंदरगाह पर भी कब्जा कर रहा है। कुछ सैटेलाइट तस्वीरों में यह बात सामने आई है कि पीएलए ने वहां अपना नौसैनिक बेस भी तैयार किया है। ऐसे में भारत हिंद महासागर को किसी की मनमानी के लिए नहीं छोड़ सकता।

    चीन को नापने की तैयारी !

    चीन को नापने की तैयारी !

    यही नहीं, भारत ने आईएनएस विक्रांत के माध्यम से निकोबार द्वीप में अपनी ताकत बढ़ाकर चीन के सामने बहुत बड़ी चुनौती भी खड़ी कर दी है। पास से ही चीन का 70 प्रतिशत तेल गुजरता है और 60 फीसदी कारोबार भी होता है। लेकिन, आईएनएस विक्रांत की वजह से भारतीय नौसेना को बहुत बड़ी ताकत मिली है। लेकिन, अभी भी चीन की नौसेना काफी शक्तिशाली है।

    भारत के लिए आगे की क्या हो रणनीति ?

    भारत के लिए आगे की क्या हो रणनीति ?

    पाकिस्तान के पास भले ही एक भी एयरक्राफ्ट कैरियर ना हों, लेकिन चीन ने धीरे-धीरे तीन विमान वाहक युद्धपोत जुटा लिए हैं। हाल में अमेरिकी नौसेना की एक खुफिया रिपोर्ट से पता चला था कि चीन लगातार समुद्र में अपनी ताकत बढ़ाने पर काम कर रहा है। इस रिपोर्ट के अनुसार इस दशक के अंत तक उसकी नेवी के पास 67 विशाल जहाज और 12 नई सब मरीन होंगी। उसकी कोशिश 2030 तक समुद्र पर कंट्रोल करना है। हालांकि, भारत भी समुद्र में अपनी स्थिति लगातार मजबूत करता जा रहा है, लेकिन दुश्मन चीन है, तो उसी तरह की तैयारी और रणनीति की भी आवश्यकता है। जिस तरह से भारत ने 76% स्वदेशी उपकरणों से स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत तैयार किया है, इससे भविष्य के लिए हौसले जरूर बढ़ गए हैं।

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