इंडिगो मामलाः विकलांग बच्चे के पिता ने बताया, क्या हुआ था रांची एयरपोर्ट पर

"वो 7 मई की शाम थी. मैं बोकारो में रह रही अपनी 76 साल की कैंसर पीड़िता मां से मिलकर हैदराबाद की फ्लाइट लेने रांची एयरपोर्ट पहुंचा था. मेरे साथ मेरी पत्नी अपर्णा और 12 साल का बेटा अर्णब भी थे. अर्णब डिफरेंटली एबल्ड बच्चा है. इसलिए हमें उसका ख़ास ख़्याल रखना होता है. वो कम बोलता है, चल नहीं पाता, आँखों की रोशनी भी कम है."

Indigo case: Father of handicapped child told what happened at Ranchi airport

"हम उसे प्रायः घर का खाना ही खिलाते हैं. उसका इलाज चल रहा है. हमें उम्मीद है वो जल्दी ठीक हो जाएगा. हम ये ख़्याल रखते हैं कि उसे किसी प्रकार का बुरा अनुभव न हो. वो ख़ुश रहे और हालात सामान्य बना रहे. लेकिन हमारे साथ बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर जिस तरह का अपमानजनक व्यवहार किया गया, उसका हमें बिल्कुल भी अंदेशा नहीं था."

"हम तीनों कुछ ही घंटे बाद हैदराबाद में अपने घर पर होते, यदि इंडिगो एयरलाइंस के कर्मचारियों ने हमारे साथ बदतमीज़ी नहीं की होती. हमें शाम 7.45 की इंडिगो की रांची-हैदराबाद फ़्लाइट में चढ़ने से सिर्फ़ इसलिए रोक दिया गया, क्योंकि मेरे बेटे अर्णब को उसकी अपंगता के चलते कुछ देर के लिए थोड़ी दिक़्क़तें थीं."

"हालांकि वो बोर्डिंग से पहले ही सामान्य हो गया था. वो व्हील चेयर पर चुपचाप बैठा था और हमारी लाख मिन्नतों के बावजूद इंडिगो ने हमें फ़्लाइट लेने नहीं दी. हम अक्सरहां फ़्लाइट से आते-जाते हैं. ऐसा पहली बार हुआ, जब किसी एयरलाइंस ने हमें सिर्फ़ इसलिए विमान में नहीं चढ़ने दिया, क्योंकि मेरा बेटा अपंग है."

बीबीसी से फोन पर ये सब बातें करते हुए बैंकर निर्मल कुमार की आवाज़ एक-दो बार लड़खड़ाती है. फिर भी बड़े संयम से वो अपनी कहानी सुनाते हैं. वो दृढ़ता से ये पूछते हैं कि विकलांगता के साथ ऐसा भद्दा मज़ाक आख़िर क्यों किया गया, जबकि हम 'एक्सेसबल इंडिया' के नागरिक हैं.

निर्मल कुमार उस बच्चे अर्णब के पिता हैं, जिन्हें इंडिगो एयरलाइंस की उड़ान लेने से मना करने के फ़ुटेज सोशल मीडिया में वायरल हो रहे हैं.

नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ख़ुद इस मामले की जांच कराने की बात कही है. उन्होंने तीन ज़िम्मेदार अधिकारियों को इसका ज़िम्मा सौंपा है. अधिकारियों को 17 मई तक अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है. जांच टीम ने अपना काम शुरू कर दिया है.

कौन हैं निर्मल कुमार

निर्मल कुमार बैंक अधिकारी हैं और इन दिनों बैंक ऑफ़ बड़ौदा के लिए हैदराबाद में कार्यरत हैं. वो मूलतः बेगूसराय (बिहार) के रहने वाले हैं, लेकिन उनका परिवार पिछले कई सालों से बोकारो (झारखंड) में रहता है.

उनके पिता झारखंड बिजली बोर्ड में काम करते थे. अब वो सेवानिवृत्त हो चुके हैं और अपनी कैंसर पीड़िता पत्नी के साथ बोकारो में रहते हैं. निर्मल कुमार का परिवार उन्हीं से मिलने झारखंड आया था.

रांची एयरपोर्ट की कहानी, निर्मल कुमार की ज़ुबानी

निर्मल कुमार ने बीबीसी को रांची एयरपोर्ट की पूरी कहानी बताई. उन्होंने बताया कि हमारी मिन्नतों और इंडिगो स्टाफ़ के अपमानजनक व्यवहार के फ़ुटेज काफ़ी वायरल हैं. ऐसा व्यवहार तो नशे में धुत कोई व्यक्ति भी नहीं करेगा. लेकिन यकीन मानिए उन्हें किसी का डर नहीं था.

निर्मल कुमार ने बीबीसी को बताया, "हम कार से बोकारो से रांची आए थे. इस कारण अर्णब थक गया था. उसे भूख लगी थी. उसने उल्टी भी की. शायद अपच के कारण उसके पेट में दर्द हो रहा था. वो रोने लगा. हमने उसे जो खाना दिया, वो उसे ठीक नहीं लगा. इस कारण मेरा बेटा थोड़ा असहज था. फिर हम लोगों ने उसे दूसरी चीज़ें खाने के लिए दी. पेट दर्द की दवा दी."

वो बताते हैं, "इससे पहले जब हम बैगेज ड्रॉप के लिए गए, तभी इंडिगो की एक कर्मचारी ने हमें नोटिस किया और कहा कि वो बच्चे को बोर्ड नहीं करने देंगी. वो बच्चे के बारे में हमसे कई और सवाल पूछने लगीं और कहा कि यदि मेरा बेटा चुप नहीं हुआ, तो वो उसे बोर्ड नहीं करने देंगी."

"उनकी बातचीत का अंदाज़ धमकी भरा था. तब हमने उन्हें बताया कि हाल के दिनों में हमने पांच फ्लाइट्स ली हैं, लेकिन कहीं भी ऐसे सवाल नहीं पूछे गए. फिर आप इतने सारे सवाल कैसे और क्यों पूछेंगी. कुछ देर की बहस के बाद उन लोगों ने हमें बोर्डिंग पास दिए और हम सिक्योरिटी चेक कराकर बोर्डिंग लाउंज में गए. इसमें काफ़ी वक़्त लग गया."

निर्मल कुमार बताते हैं, "इस बीच खाना-पीना और दवा देने के बाद मेरा बेटा सहज हो गया. वो अपने व्हील चेयर पर चुपचाप बैठा रहा. हम अपने तय गेट पर बैठे थे, तभी हमारी फ्लाइट की बोर्डिंग शुरू हो गई. वहां हमारी मुलाकात इंडिगो के एक और कर्मचारी से हुई. उन्होंने कहा कि वे हमें बोर्डिंग नहीं करने देंगे, क्योंकि उनके मुताबिक़, अर्णब सामान्य नहीं था."

वो कहते हैं, "हम उनसे उड़ान लेने देने का आग्रह करते रहे लेकिन उन्होंने हमारी नहीं सुनी. वो अपने निर्णय पर अड़े रहे. उन्होंने दलील दी कि मेरा बेटा उड़ान के दौरान दूसरे यात्रियों को नुक़सान पहुंचा सकता है. उन्होंने कई फालतू बातें कहीं. हमने कहा कि यदि कोई बच्चा व्हील चेयर पर है, चल नहीं सकता, तो वो दूसरे लोगों को कैसे नुक़सान पहुंचा सकेगा."

"ये सब देखकर वहां मौजूद कई दूसरे यात्री हमारे पास आए और इंडिगो के कर्मचारियों से हमें बोर्ड करने की इजाज़त देने का अनुरोध करने लगे. उनमें मीडिया के लोग, बुद्धिजीवी, सरकारी अधिकारी और डॉक्टर्स भी थे. ये डॉक्टर्स शायद किसी कॉन्फ्रेन्स में भाग लेने रांची आए थे. उन डॉक्टर्स ने भी अर्णब को देखने के बाद इंडिगो कर्मचारियों से कहा कि मेरा बेटा सामान्य है और उड़ान लेने में कोई दिक़्क़त नहीं होगी. फिर भी एयरलाइंस के लोगों पर कोई असर नहीं पड़ा."

कुमार बताते हैं, "बाद में उन लोगों ने हमें वाया पुणे एक फ्लाइट की पेशकश की, लेकिन हम आधी रात बाद पुणे पहुंचते और फिर हैदराबाद. इसलिए हमने वो फ्लाइट लेने से इनकार कर दिया. तब उन्होंने हमें एयरपोर्ट के पास ही एक होटल में ठहराया और हमें अगली सुबह की फ्लाइट से हैदराबाद भेजा. हमने उनका प्रस्ताव इसलिए स्वीकार कर लिया, क्योंकि हमारे पास और कोई विकल्प नहीं था."

जांच टीम ने फोन किया

निर्मल कुमार बताते हैं, "10 तारीख़ की शाम इस मामले की जांच के लिए बनी टीम के एक सदस्य ने मुझे फोन किया. शायद वो 12 मई को हैदराबाद आकर हमसे मिलेंगे. इससे पहले इंडिगो की तरफ़ से मुझे फोन कर इलेक्ट्रिक व्हील चेयर की पेशकश की थी. उनकी यह पेशकश दरअसल ग़ुस्से में डालने वाली थी. मैंने उनकी यह पेशकश तत्काल ठुकरा दी."

कैसे वायरल हुआ यह मामला

निर्मल कुमार ने बीबीसी से कहा कि उनकी एकमात्र मांग है कि इंडिगो के जिन कर्मचारियों ने हमारे साथ अपमानजनक व्यवहार किया उनके ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाए.

वो कहते हैं,"यह सिर्फ़ हमारी बात नहीं है, ये अपमान सभी विकलांगों का है. विकलांगों के भी अधिकार हैं. आप हमें उन अधिकारों से वंचित नहीं कर सकते. मैंने नागर विमानन मंत्रालय से इस मामले की लिखित शिकायत भी की है."

7 मई की देर शाम बोर्डिंग लाउंज में हुई इस घटना के बारे में 'स्टार्ट-अप इंडिया' की संस्थापक निदेशक मनीषा गुप्ता ने अपने फ़ेसबुक पर विस्तार से एक पोस्ट लिखा. वो दिल्ली में रहती हैं और उस वक़्त अपनी फ्लाइट के लिए रांची एयरपोर्ट पर मौजूद थीं.

उन्होंने अपने एकाउंट से दो तस्वीरें और एक वीडियो डाला, जो देखते ही देखते वायरल हो गया. यह साढ़े तीन हज़ार से अधिक बार शेयर हो चुका है.

उनके इस पोस्ट के स्क्रीनशॉट के साथ 'द संडे गार्डियन' के पत्रकार अभिनंदन मिश्र ने इस घटना के बारे में एक ट्वीट किया. इसी अख़बार के दिव्येंदु मंडल ने इससे जुड़े कुछ और फ़ुटेज ट्वीट किए. अभिनंदन मिश्र का वो ट्वीट आठ हज़ार से अधिक बार रिट्वीट हो चुका है.

नागर विमानन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी इसे रिट्वीट करते हुए इस मामले की जांच ख़ुद करने की बात कही.

इंडिगो का पक्ष

इस प्रकरण से सोशल मीडिया पर लोगों का ग़ुस्सा झेल रही इंडिगो एयरलाइंस के सीईओ रोनोजॉय दत्ता ने मीडिया से बातचीत में इस वाक़ए के लिए खेद जताते हुए भी कहा कि उनके कर्मचारियों ने एयरपोर्ट पर वही निर्णय लिया, जो उन्हें लेना चाहिए था.

उन्होंने कहा कि उनके कर्मचारियों ने कोई ग़लती नहीं की और उन्होंने अपनी बात डीजीसीए (नागर विमानन महानिदेशालय) को बता दी है.

रोनोजॉय दत्ता ने कहा, "हम अपने कर्मचारियों-अधिकारियों को पूरी ट्रेनिंग के बाद तैनात करते हैं. हमारी पहली प्राथमिकता अपने यात्रियों की सुरक्षा है. मैंने रांची एयरपोर्ट के सीसीटीवी फ़ुटेज देखे हैं. इसलिए मैं कह सकता हूं कि मेरे लोगों ने बच्चे की हालत देखने के बाद सही निर्णय लिया था."

उसके बाद इंडिगो ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि उन्होंने अप्रैल से अब तक 75 हज़ार विकलांग यात्रियों के साथ उड़ान भरी है. हमारी टीम ऐसे यात्रियों से कोई भेदभाव नहीं करती.

रांची एयरपोर्ट ने जताया खेद

इस बीच हाल में पदस्थापित हुए रांची एयरपोर्ट के निदेशक कन्हैया लाल अग्रवाल ने मीडिया से कहा कि उन्हें इस घटना को लेकर खेद है. हमने चेक-इन से लेकर बोर्डिंग तक सभी यात्रियों के साथ बेहतर बर्ताव करने का निर्देश दिया है. और इस घटना की भी जांच की जा रही है.

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