बहुत कुछ कहता है लालकिले की प्राचीर से पीएम नरेंद्र मोदी का संबोधन

बैंगलोर। आज देश के लालकिले पर भारत के उस लाल ने झंडा फहराया जिसने बचपन पर रेलवे स्टेशन पर अपने पिता के साथ चाय बेची थी। तमाम विरोधों के बावजूद आज देश का आम इंसान पूरे भारत के लिए खास बन गया लेकिन खास बनने के बाद भी ना उनके चेहरे पर घमंड की परछाई दिखीं और ना ही उनके अल्फाजों में भारी-भरकम शब्द। जी हां हम बात कर रहे हैं देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी की।

जिन्होंने आज अपने पूरे भाषण में खुद को प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि एक प्रधानसेवक के रूप में पेश करते हुए यह जताने की कोशिश की अब उनके लिए सिर्फ और सिर्फ केवल देश का विकास ही मायने रखता है। मोदी के भाषण के एक-एक शब्द दिल की आवाज बनकर आम लोगों तक पहुंच रहे थे और शायद इसी लिए देश की आम जनता को लंबे समय बाद देश की पीएम की स्पीच का इंतजार था।

आज की युवा पीढी़ को मोदी के संबोधन में एक आशा, विश्वास और ईमानदारी नजर आती है

भारत आज अपने देश का 68वां स्वतंत्रतादिवस मना रहा है। इन 68 सालों में उसने देश के 15 प्रधानमंत्रियों को देखा है और उनके भाषणों को सुना है। जिनमें से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई के भाषण तो देश ही नहीं विदेशों में आज भी लोकप्रिय है लेकिन इन दोनों ही नेताओं के भाषणों की तरह मोदी की स्पीच में ना तो शब्दों का जादू था और ना ही अलंकारिक भाषा शैली का प्रयोग।

लालकिले के प्राचीर से जब मोदी ने बोलना शुरू किया तो जैसा लगा कि घर का कोई बड़ा व्यक्ति या मुखिया अपने परिवार और अपने बच्चों से उसके वर्तमान और भविष्य को संवारने की बातें कर रहा है। राजनैतिक समीक्षकों को भी मोदी के आज के भाषण में नाटकियता कम और सत्यता साफ नजर आती है और उनके मुताबिक आज मोदी की आवाज बता रही थी कि वो दिल से बात कर रहे हैं और शायद इसी वजह से आज औरों की तरह उनके पास अपने स्क्रिप्ट की कॉपी नहीं थी।

मोदी के भाषण के बारे में हमने उन लोगों की प्रतिक्रिया जाननी चाही जो कि आज छुट्टी के दिन सुबह 7 बजे से टीवी के सामने बैठ गये थे। बैंगलोर की आईटी कंपनी में काम करने वाले दिलीप अवस्थी से वनइंडिया ने पूछा कि आप को आज मोदी के भाषण में इतनी दिलचस्पी क्यों थी? तो उनका जवाब था कि मैं पिछले आठ सालों से बैंगलोर में आईटी कंपनी में काम कर रहा हूं।

पिछले आठ सालों में कभी भी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने मेरे जैसे लोगों की नौकरी या उससे जुड़ी बातों का जिक्र अपने भाषण में नहीं किया जबकि देश को आईटी जगत का तोहफा देने वाले उन्हीं की पार्टी के नेता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी थे। मैं बिहार का रहने वाला हूं और नौकरी की वजह से अपने घर से दूर यहां पर आया हूं लेकिन कभी भी देश की सरकार ने हमारे जैसे योग्य और कर्मठ आईटीधारकों के लिए कुछ नहीं किया, वादे तो बहुत किये गये लेकिन पूरा एक भी नहीं हुआ।

अपने चुनाव प्रचार के दौरान जब मोदी यहां आये थे तो उन्होंने भी कई वादे किये थे इसलिए आज मैं उनके भाषण में देखना चाहता था कि वो अपने पुराने वादों पर कायम है कि नहीं और उन्होंने आज फिर से हम जैसे युवाओं का जिक्र करके कम से कम यह तो जता ही दिया कि वो अपने वादों को भूले नहीं हैं।

यह और बात है कि उनके वादे कब पूरे होंगे लेकिन कम से कम उनकी लिस्ट में हमारा नाम तो आया जो कि फिलहाल के लिए सकून देने के लिए काफी है। मालूम हो कि मोदी ने आज अपने भाषण में कहा है कि देश को विकास के मार्ग लाने के लिए हमें अपने युवाओं को योग्य बनाना होगा। आईटी के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए उद्योग जगत के रास्ते आसान करने होगे ताकि उनके अंदर हिम्मत आये और अपनी बुद्धि-कौशल और योग्यता का प्रयोग देश को मजबूत बनाने में करे और हर कोई कह सके दिस इज मेड इन इंडिया।

तो देखा आपने समीक्षकों की तरह ही आज की युवा पीढी़ को मोदी के संबोधन में एक आशा, विश्वास और ईमानदारी नजर आती है, अब उनका यह भरोसा उनकी और देश की कसौटी पर कितना खरा उतराता है यह तो आने वाला वक्त बतायेगा लेकिन इसमें कोई शक नहीं कि आज का 15 अगस्त देश के पिछले कई 15 अगस्त से अलग है।

आप पीएम मोदी के भाषण को दस में से कितने नंबर देते हैं अपना उत्तर नीचे लिखें कमेंट बॉक्स में जरूर दर्ज करायें।

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