पाक बॉर्डर पर हमला, भारत-रूस के सैनिकों ने संभाला मोर्चा!

जोधपुर। राजस्‍थान के जोधपुर स्थित आर्मी कैम्‍प को रविवार की सुबह सूचना मिली कि कुछ आतंकवादी पाकिस्‍तान सरहद से अंदर घुस आये हैं और सेना पर हमला बोल दिया है। देखते ही देखते भारतीय सैनिकों ने मोर्चा संभाल लिया और जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। खास बात यह है कि इस कार्रवाई में उनके साथ रूसी सैनिक भी थे। भारत के टैंकों पर सवार रूसी सैनिक आतंकियों को खदेड़ने के लिये आगे बढ़ रहे थे। ताबड़तोड़ गोली बारी जारी रही। चारों तरप। रॉकेट लॉन्‍चर से गोले दागे गये। और चारों तरफ युद्ध जैसा मंजर।

असल में यह एक मॉक ड्रिल थी। यह मंजर सरहद पर भारत-रूस के संयुक्‍त अभ्‍यास के रूप में देखने को मिला, जिसका नाम है इंद्रा 2013। राजस्‍थान के जोधपुर के पास रेगिस्‍तान में पिछले कई दिनों से कुछ विदेशी सैनिक बंदूक, रॉकेट लॉन्‍चर आदि लिये दिखाई दे रहे थे। लोगों को अचम्‍भा भी हुआ, लेकिन साथ में भारतीय सैनिकों को देख इस बात की ठंड पहुंच गई कि हां सब सुरक्षित है। पाकिस्‍तान से लगे बॉर्डर पर ऐसा क्‍या हो रहा था, कि स्‍थानीय लोगों में कौतूहल मच गया। असल में यह एक सैन्‍य अभियान था, जिसमें एक दूसरे को भाषा समेझने में बहुत दिक्‍कत हुई, लेकिन एक दूसरे को तोपें व आधुनिक हथियार चलाना सिखा दिया।

जी हां ऐसा ही मंजर देखने को जोधपुर और बीकानेर में भारत-रूस के संयुक्‍त सैन्‍य अभ्‍यास में देखने को मिला। करीब 15 दिन तक चले इस सैन्‍य अभियान का नाम इंद्रा 2013- भारत रूस संयुक्‍त अभियान में दोनों देशों के सैनिकों ने एक साथ प्रशिक्षण हासिल किया। इस प्रशिक्षण की खासियत यह थी कि भारत के तमाम सैनिकों में ऐसे थे, जिन्‍हें अंग्रेजी भी ठीक से नहीं आती थी, वहीं रूस के अधिकांश सैनिक सिर्फ रूसी भाषा ही जानते थे। ऐसे में भी यह कैम्‍प बिना किसी अनुवादक के चला।

इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान दोनों देशों के करीब 250 सैनिकों ने प्रशिक्षण हासिल किया। इसमें हेलीकॉप्‍टर से अटैक करना, तोप चलाना, आधुनिक टैंक चलाना, आधुनिक हथियार चलाना आदि शामिल थे। इस अभियान में रूस की ओर से आर्मी मेजर जनरल एलेक्‍सी जाविजियोन और भारत की ओर से कैप्‍टन विश्‍व वंदना ने सफल बनाया। इन्‍हीं दोनों के दिशा-निर्देशन में सैनिकों की ट्रेनिंग हुई।

दो देशों के सिपाही

दो देशों के सिपाही

इंद्रा 2013 के अंतर्गत सैनिकों ने रेगिस्‍तान के बास बंजर जगहों पर फायरिंग रेंज का प्रशिक्षण हासिल किया।

गोलियां चलीं तोपे चलीं

गोलियां चलीं तोपे चलीं

एनएस घई और जनरल एलेक्‍सी के साथ बीकानेर में उपस्थित दोनों देशों के जवान।

कोऑपरेटिव हैं रूसी

कोऑपरेटिव हैं रूसी

भारतीय सैनिकों ने बताया कि रूस के सैनिक बहुत कॉओपरेटिव हैं, भाषा नहीं जानते हुए भी उन्‍होंने इस प्रशिक्षण को सफल बनाया।

आतंकी हमले के बाद

आतंकी हमले के बाद

यह अभियान बॉर्डर के पास जंगलों में तब शुरू हुआ, जब आतंकी हमले की सूचना मिली। यह सूचना एक मॉक ड्रिल के आधार पर दी गई और आगे अभ्‍यास किया गया।

रेगिस्‍तान में कैसे लड़ें

रेगिस्‍तान में कैसे लड़ें

इस अभियान के माध्‍यम से रूसी सैनिकों ने रेगिस्‍तान में लड़ना सीखा।

थार रेगिस्तान में

थार रेगिस्तान में

थार रेगिस्तान में रूस के साथ भारत के मजबूत होते रिश्तों की मिसाल दिखी। दोनों देशों की सेनाओं ने बीकानेर के पास युद्धाभ्यास किया।

युद्ध जैसा मंजर

युद्ध जैसा मंजर

दुश्मन बर्बाद होता रहा और भारतीय टैंक आगे बढ़ते रहे। नजदीक पहुंचने पर टैंक पर लगी मशीनगनें गूंज उठी।

हेलीकॉप्‍टर से भी हुआ अभ्‍यास

हेलीकॉप्‍टर से भी हुआ अभ्‍यास

हेलिकॉप्टर से स्पेशल फोर्स के कमांडोज और जीप को जंगल में उतरा गया। कमांडो जंगल में चारों तरफ फैल गए।

सैनिकों ने टैंक चलायीं

सैनिकों ने टैंक चलायीं

टैंकों से बमों के धमाके गूंजने लगे। दुश्मनों के टैंकों को ध्वस्त करते हुए सैनिक आगे बढ़ते गए। करीब डेढ़ घंटे की इस लड़ाई में दुश्मन को मार भगाया।

ऐसा था मंजर

ऐसा था मंजर

बीएमपी-2 टैंक पर भारतीय सैनिक और टी-72 पर रूसी सैनिक सवार थे। टैंकों से बमों के धमाके गूंजने लगे। दुश्मनों के टैंकों को ध्वस्त करते हुए सैनिक आगे बढ़ते गए। करीब डेढ़ घंटे की इस लड़ाई में दुश्मन को मार भगाया।

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