भारतीय मूल के गौरव शर्मा ने न्यूजीलैंड की संसद में ली संस्कृत में शपथ, रच दिया इतिहास
वेलिंग्टन। न्यूजीलैंड में भारतीय मूल के डॉक्टर गौरव शर्मा ने बुधवार को इतिहास रच दिया। दरअसल, उन्होंने संसद के सदस्य के रूप में संस्कृत भाषा में शपथ ली। इस ऐतिहासिक कदम के बाद उनकी चर्चा हर तरफ हो रही है।

न्यूजीलैंड की संसद में सबसे कम उम्र के सांसद बने गौरव शर्मा
आपको बता दें कि गौरव शर्मा न्यूजीलैंड की संसद में चुने गए सबसे कम उम्र के सांसद भी हैं। मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के रहने वाले गौरव शर्मा हैमिल्टन वेस्ट से लेबर पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते हैं। आपको बता दें कि उन्होंने संस्कृत के अलावा मोरी भाषा में भी शपथ ली।
शपथ लेने के बाद गौरव शर्मा का ट्वीट
संस्कृत में शपथ लेने के पीछे गौरव शर्मा ने बताया कि सच कहूं तो शपथ लेने से पहले मैं काफी उलझन में था। उलझन ये थी कि मैं पहाड़ी या पंजाबी भाषा में शपथ लूं, लेकिन फिर मैंने तय किया कि क्यों ना संस्कृत में शपथ ली जाए ताकि हर भारतीय भाषा का सम्मान किया जा सके।
कौन हैं गौरव शर्मा?
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर के रहने वाले गौरव शर्मा ने अपनी पढ़ाई धर्मशाला और न्यूजीलैंड में की है। इससे पहले 1998-99 तक गौरव शर्मा शिमला स्थित चैपसली स्कूल में पढ़ाई कर चुके हैं। गौरव शर्मा हिमाचल प्रदेश के पूर्व आइएएस अधिकारी डॉक्टर अरुण शर्मा के भांजे हैं। गौरव शर्मा ने न्यूजीलैंड में पिछला चुनाव भी लड़ा था, जिसमें वो हार गए थे।
गौरव शर्मा के चुनाव जीतने की खुशी उनके गांव में भी मनाई जा रही है। गांववालों ने लड्डू बांटकर, ढोल-नगाड़े बजाकर खुशी मनाई। साथ ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी गौरव शर्मा को चुनाव जीतने पर बधाई दी थी।












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