विदेशों को निर्यात के बावजूद देश में जरूरत से ज्यादा गेहूं का भंडार, किसानों को भी मिल रहे बढ़िया दाम- केंद्र

Indian Govt says- We have more than the required quantity of wheat in stocks to sustain for the year, farmers getting good prices

नई दिल्ली। भारत में इस साल गेहूं उत्पादन पिछली बार की तुलना में कम रहने का अनुमान है। 10.95 कराेड़ टन के बजाय इस बार 10.50 करोड़ टन गेंहू-उत्पादन हाे सकता है। हालांकि, इसके बावजूद केंद्र सरकार ने कहा है कि, भारत में सालभर तक के लिए गेहूं का स्टॉक जरूरत की मात्रा से भी ज्यादा है। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) के सचिव सुधांशु पांडे ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि, वर्तमान में एक वर्ष के लिए स्टॉक में गेहूं की मात्रा आवश्यकता से अधिक है।

सरकारी भंडार में जरूरत से ज्यादा गेहूं

सरकारी भंडार में जरूरत से ज्यादा गेहूं

भारत में गेहूं की की उपलब्धता पर बात करते हुए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में केंद्रीय खाद्य सचिव सुधांशु पांडेय ने पत्रकारों को बताया कि, "सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की आवश्यकता को पूरा करने के बाद, आगामी वर्ष में 1 अप्रैल 2023 को भी भारत के पास 80 LMT गेहूं का भंडार होगा, जो कि 75LMT की न्यूनतम आवश्यकता से काफी अधिक होगा। गुरुवार को पत्रकारों को जानकारी देते हुए डीएफपीडी के सचिव बोले कि, इस बार भले ही गेंहू का उत्पादन कम होने का अनुमान हो मगर, वित्तीय वर्ष 2023 में यह 1110 LMT के आसपास रहेगा।"

इस साल गेहूं उत्पादन 5.7% तक कम होगा!

इस साल गेहूं उत्पादन 5.7% तक कम होगा!

एक दिन पहले ही सरकार ने यह बात कही थी कि, इस बार गेहूं का उत्पादन कम होने का अंदाजा है। मगर, इसका असर सरकारी भंडार पर न पड़ने की बात भी अब कही जा रही है।
क्या गेहूं के निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए कोई कदम उठाया गया है, इस पर खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) के स​चिव ने कहा, "नहीं, केंद्र सरकार द्वारा गेहूं के निर्यात पर अंकुश लगाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है। उन्होंने कहा, "अब तक 40 LMT गेहूं निर्यात के लिए अनुबंधित किया जा चुका है, जिसमें अप्रैल 2022 में ही लगभग 11 LMT निर्यात किया गया।"

विदेशों से भारतीय गेहूं के लिए आॅर्डर

विदेशों से भारतीय गेहूं के लिए आॅर्डर

​भारतीय गेंहू को विदेशों में निर्यात किए जाने के बारे में बताते हुए सरकार की ओर से कहा गया कि, इस बार मिस्र, और तुर्की ने भी भारतीय गेहूं के आयात के लिए मंजूरी दी थी। वहीं, जून से, अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया से गेहूं आना शुरू हो जाएगा। ऐसे में यह अंतरराष्ट्रीय बाजारों में, निर्यातकों के लिए गेहूं बेचने का उपयुक्त समय था।,"

नहीं पनपने दिया जाएगा खाद्य-तेल संकट

नहीं पनपने दिया जाएगा खाद्य-तेल संकट

केंद्र सरकार ने देश में खाद्य तेल की कमी होने की बातों को भी नकार दिया। खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (डीएफपीडी) के स​चिव ने कहा कि देश में खाद्य तेल का भंडार भी पर्याप्त है और इंडोनेशिया द्वारा अस्थायी प्रतिबंध के बाद, पाम तेल का आयात जल्द ही फिर से शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा, "इससे देश में खाद्य तेल की कीमतों में नरमी आएगी।"

इस बार एमएसपी के रेट से ज्यादा भाव मिल रहा

इस बार एमएसपी के रेट से ज्यादा भाव मिल रहा

गेहूँ खरीद से जुड़े एक सवाल के जवाब में सचिव सुधांशु पांडे ने कहा कि, बाजार भाव अधिक होने के कारण व्यापारियों द्वारा एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) से अधिक दर पर बड़ी मात्रा में गेहूं खरीदा जा रहा है, जो किसानों के लिए अच्छा है। सचिव ने कहा, "इस साल बाजार की कीमतों में वृद्धि और निजी कंपनियों द्वारा घरेलू और निर्यात दोनों उद्देश्यों के लिए उच्च मांग के कारण, सरकारी एजेंसी द्वारा खरीद कम रही है। लेकिन यह किसानों के लिए फायदे की बात है। किसानों को गेहूं की कीमत अच्छी मिल रही है।"

किसानों को अच्छा दाम मिल रहा

किसानों को अच्छा दाम मिल रहा

सचिव ने कहा कि "पहले किसानों के पास सरकार को बेचने के अलावा कोई विकल्प नहीं था लेकिन अब वे सरकार को उसी मात्रा में बेच रहे हैं, जिसे वे निजी बाजार में बेचने में असमर्थ हैं। इसलिए, उस दृष्टिकोण से, सरकारी खरीद कम हो गई है। मगर..यह भी किसानों के लिए अच्छी बात है। अब वे मनमाने ढंग से अपनी फसल बेच पा रहे हैं।,"

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