काबुल से सुरक्षित भारत लौटे पति-पत्नी ने सुनाई आपबीती, एयरपोर्ट पहुंचते वक्त 50-60 मीटर दूर हुए ब्लास्ट
भावनगर। अफगानिस्तान की राजधानी काबुल के हामिद करजई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर आतंकियों के आत्मघाती हमलों में 90 अफगानी और 13 अमेरिकी सैनिक मारे गए, जबकि सैकड़ों अन्य घायल हुए। इस दौरान वहां कई भारतीय भी मौजूद थे। ऐसे भारतीयों में काबुल में बतौर इंजीनियर सेवा देने वाले शिवांग दवे और उनकी पत्नी ने जैसे-तैसे खुद को संभाला। हमलों से बचते हुए दोनों ने काबुल से गुरुवार को उड़ान भरी और इंडियन एयरफोर्स के विमान से गुजरात के भावनगर पहुंचे। भावनगर में शिवांग दवे ने सपत्नीक काबुल का आंखों देखा हाल सुनाया...
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अफगानिस्तान से सुरक्षित लौटे भारतीय इंजीनियर
शिवांग दवे ने बताया, "मैं अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में पिछले 12 वर्षों से एक प्राईवेट कंपनी में इंजीनियर था। पत्नी भी वहीं साथ में रह रही थी। जब तक अफगानिस्तान में अमेरिका और भारत समर्थित सत्ता रही, हमें कोई दिक्कत नहीं आई। हालांकि, 2017 से तालिबानियों ने वापस अफगानिस्तान के रिहायशी इलाकों में पैठ बनानी शुरू कर दी। इसी साल उन्होंने अगस्त में अफगानिस्तान के कई शहरों पर कब्जा कर लिया। उसके बाद राजधानी काबुल पर कब्जा होते ही वहां का राष्ट्रपति गनी देश छोड़ भागा। तालिबानी आधिपत्य होते ही विदेशी अफगानिस्तान से निकलने लगे। भारतीय राजदूत एवं सुरक्षाकर्मियों की भी वापसी हुई। क्योंकि, अब तक काबुल के हालात बदतर हो चुके थे, तो हमने भी अपने देश लौटने का फैसला किया। गुरुवार को जैसे ही हम काबुल एयरपोर्ट पहुंच रहे थे, तो वहां फिदायीन हमला हुआ।"

काबुल एयरपोर्ट का आंखों देखा हाल सुनाया
शिवांग ने कहा, "तालिबानियों ने काबुल के मुख्य मार्गों को बंद कर रखा है। ऐसे में लोगों का एयरपोर्ट पर पहुंचना मुश्किल हो गया है। भारतीयों समेत कई देशों के लोग काबुल एयरपोर्ट में दाखिल नहीं हो पा रहे। तब हम एयरपार्ट की तरह बढ़े तो वहां मुख्य सड़कों के बंद होने के चलते जगह-जगह जाम के हालात थे। हमें यही चिंता खाए जा रही थी कि एयरपोर्ट तक कैसे पहुंचें? जब हम एयरपोर्ट पहुंचने वाले ही थे कि तभी तालिबानियों ने हमें पकड़ लिया था। हालांकि, कुछ बातचीत के बाद हमें छोड़ दिया गया। उसके बाद एयरपोर्ट के बाहर ही धमाकों की आवाज गूंजी। वह फिदायीन हमला था। एक ब्लास्ट तो हमसे मात्र 50-60 मीटर की दूरी पर ही हुआ, जिससे आग और धुआं फैल गया। कइयों के कान सुन्न हो गए।"

प्रसिद्ध कवि हरिंद्र दवे के पोते हैं शिवांग
"कुछ देर बाद पता चला कि हमला तालिबानियों ने नहीं किए, बल्कि इसके पीछे अन्य लोग थे। यहां तक कि कुछ तालिबानियों की भी उस हमले में जान चली गई। भगवान का शुक्र है कि, हम बच गए। यह भी सच है कि इतना डर हमने जिंदगी में पहले कभी महसूस नहीं किया। हमारी सरकार की भरसक कोशिशों की वजह से ही अपनी सकुशल वापसी हुई है।"
बता दें कि, शिवांग गुजरात के प्रसिद्ध कवि हरिंद्र दवे के पोते हैं।

ISIS-K ने किया था फिदायीन हमला
काबुल में एयरपोर्ट के बाहर आत्मघाती हमलों का गुनहगार पाकिस्तान के तालिबानी चरमपंथियों द्वारा गठित इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISIS-K) को बताया जा रहा है। पता चला है कि, इसकी तालिबान से पुरानी दुश्मनी, शिया भी इसका निशाना बनते रहे हैं। इन आतंकवादियों को सबसे खूंखार आतंकी संगठन ISIS का ही धड़ा माना जाता है। उक्त हमलों की जिम्मेदारी भी इसी धड़े ने ली है।












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