सेवानिवृत्त हुए परमवीर चक्र विजेता मेजर योगेंद्र यादव, कारगिल हीरो को सेना ने दी पारंपरिक विदाई
नई दिल्ली, 1 जनवरी: कागरिल में अपने साहस के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार मेजर योगिंदर सिंह यादव सेवानिवृत्ति हो गए हैं। शनिवार को सेना की ओर से उनको पारंपरिक विदाई दी गई। भारतीय सेना ने टाइगर हिल के नायक योगिंदर सिंह यादव को उनकी सेवानिवृत्ति पर एक कार्यक्रम किया और उनको फूलों के गुलदस्ते देते हुए विदाई दी। योगेंद्र यादव को बीते साल (75वें स्वतंत्रता दिवस पर) मानद कैप्टन रैंक से सम्मानित किया गया था।

25 साल की सेना में सेवा
सूबेदार मेजर (मानद कैप्टन) योगेंद्र सिंह यादव 25 साल की अपनी नौकरी के बाद शुक्रवार को सेवानिवृत्त हो गए। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद शनिवार को जूनियर लीडर्स अकादमी में पारंपरिक विदाई समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें मेजर यादव को विदाई दी गई। योगेंद्र सिंह यादव मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर शहर के औरंगाबाद गांव के रहने वाले हैं।

19 साल की उम्र में मिला वीरता के लिए पुरस्कार
भारत और पाकिस्तान के बीच 1999 में हुए कारगिल युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना के दांत खट्टे करने वाले योगेंद्र सिंह को उनकी बहादुरी के लिए परमवीर चक्र से सम्मानित किया जा चुका है। मेजर यादव 19 साल के थे जब उन्हें कारगिल संघर्ष के दौरान उनकी बहादुरी के लिए देश के सर्वोच्च सैन्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

कारगिल जंग में दिखाई थी गजब की बहादुरी
जुलाई, 1999 को सूबेदार मेजर यादव ने जो बहादुरी दिखाई, वह भारतीय सेना के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में अंकित है। कारगिल युद्ध में योगेंद्र सिंह यादव को 15 गोली लगी थीं, उनके शरीर पर दो हैंड ग्रेनेड के घाव थे। उनका एक हाथ बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी थी। करीब एक साल तक योगेंद्र अस्पताल में भर्ती रहे थे और ठीक होकर फिर से सेना में लौटे थे।












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