IMF से पाकिस्तान को मिली मदद पर भारत ने जताई चिंता, अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव का किया जिक्र
न्यूयॉर्क। कोरोना महामारी के बीच ही पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) से बड़ी मदद मिली है। आईएमएफ ने पाकिस्तान को महामारी से जूझने के लिए 1.4 बिलियन डॉलर की आर्थिक मदद देने का फैसला किया है। भारत की तरफ से आईएमएफ की इस सिलसिले में हुई मीटिंग में चिंता जाहिर की गई थी। इंग्लिश डेली हिन्दुस्तान टाइम्स की ओर से बताया गया है कि भारत ने आईएमएफ की मीटिंग में इस बात पर खासी चिंता व्यक्त की है कि पाक कोविड-19 के खतरनाक हालातों के बीच ही अल्पसंख्यकों से भेदभाव कर रहा है।

बिना भेदभाव की जाए सबकी मदद
आईएमएफ बोर्ड में भारत के एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर सुरजीत एस भल्ला ने मीटिंग में इस बात पर जोर दिया कि पाकिस्तान के स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा का खर्च विस्तृत होना चाहिए और साथ ही इसमें किसी तरह से भेदभाव नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बजट से जुड़े संसाधन, पाकिस्तान के सभी क्षेत्रों में मुहैया कराए जाने चाहिए क्योंकि बलूचिस्तान और सिंध प्रांत में कोरोना वायरस के चलते स्थिति बहुत खराब है। भल्ला ने रिपोर्ट्स के हवाले से यह भी बताया कि कैसे पाकिस्तान में अल्पसंख्यक जैसे- हिंदू, सिख, ईसाई और अहमदिया समुदाय के साथ अधिकारियों द्वारा गलत व्यवहार किया जाता है। आपको बता दें कि इन समुदायों को पाकिस्तान सबसे कमजोर तबका माना जाता है। आईएमएफ ने अपने बयान में कहा था कि संस्था के के कार्यकारी बोर्ड ने रैपिड फाइनेंसिंग इंस्ट्रूमेंट (आरएफआई) के तहत पाकिस्तान की कोविड-19 से लड़ने के लिए खरीद जरूरतों को तुरंत पूरा करने के लिए करीब 1.4 अरब डॉलर की रकम को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप झेल रहे पाकिस्तान को स्वास्थ्य और राहत कार्य को मजबूती देने के लिए यह सहायता राशि मंजूर की गई है। गौरतलब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कोरोना संकट से निपटने के लिए मदद की गुहार लगाई थी।












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