दक्षिण अफ़्रीका से भिड़ने से पहले भारत की बढ़ी चिंता, पाकिस्तान वाला डर

पर्थ स्टेडियम, पर्थ
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पर्थ स्टेडियम, पर्थ

ऑस्ट्रेलिया में खेले जा रहे टी-20 क्रिकेट विश्व कप में रविवार को भारत की भिड़ंत दक्षिण अफ़्रीका से होनी है.

भारतीय टीम टूर्नामेंट का अपना तीसरा मैच पर्थ में खेलेगी, लेकिन जिस मशहूर 'वाका' स्टेडियम के लिए पर्थ जाना जाता रहा है, ये मैच वहाँ नहीं होगा. ये मैच होगा 'वाका' के पास ही बने पर्थ स्टेडियम में, जिसे 'ऑप्टस' के नाम से भी जाना जाता है.

वैसे 2018 में इस स्टेडियम में भारतीय टीम ने मेज़बान ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ टेस्ट मैच खेला था, जहाँ भारत को 146 रनों से शिकस्त मिली थी. दो दिन पहले इसी मैदान पर ज़िम्बॉब्वे ने पाकिस्तान को एक रन से हराया था.

अब सवाल ये उठता है कि किस पिच पर भारतीय टीम ज़्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकती है.

मसला तेज़ गेंदबाज़ी का है. दक्षिण अफ़्रीका की टीम में पाँच ऐसे गेंदबाज़ हैं, जो जब चाहे 140 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से गेंद फेंक सकते हैं. कगिसो रबाडा और एनरिच नोरए की टॉप जोड़ी को पूरा समर्थन मिलता है- लंजी एनगीडी, वेन पारनेल और मार्को यानसेन से.

वाका स्टेडियम, पर्थ
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वाका स्टेडियम, पर्थ

दक्षिण अफ़्रीका के पूर्व कप्तान और दुनिया के बेहतरीन तेज़ गेंदबाज़ रहे शॉन पॉलक ने बीबीसी हिंदी से कहा, "जिस तरह की गेंदबाज़ी सिडनी में बांग्लादेश के ख़िलाफ़ मैच में दिखी अगर उसकी 75 फ़ीसदी भी दूसरे मैचों में हुई, तो दक्षिण अफ़्रीका का बड़ा चांस है टूर्नामेंट में."

अब सवाल ये है कि इस तरह की घातक गेंदबाज़ी अगर वाका की पिच पर होती तो दुनिया की किसी भी बैटिंग लाइन-अप को पसीने आ सकते हैं.

पर्थ के वाका मैदान की पिच को दुनिया की सबसे तेज़ पिचों में गिना जाता रहा है. वैसे तो ब्रिस्बेन की गाबा, दक्षिण अफ़्रीका की वॉनडरर्स और किंग्समेड, सिडनी और ओवल की पिचें हमेशा से तेज़ गेंदबाज़ों की पसंदीदा रही हैं लेकिन वाका की पिच का एक ख़ौफ़ सा रहा है बल्लेबाज़ों में.

स्थानीय लोग वाका की पिच को 'द फ़र्नेस' का नाम देते हैं. ख़ास तौर पर जब दोपहर बाद बगल से समुद्री हवाएं चलने लगती हैं.

भारतीय क्रिकेट के लिए वाका हमेशा से ख़ास रहा है क्योंकि यहीं पर पहला वन-डे मैच 1980 में खेला गया था, जिसमें भारत ने न्यूज़ीलैंड को पाँच रन से हरा दिया था. 2008 में भारत ने ऑस्ट्रेलिया के 16 टेस्ट मैच लगातार जीतने वाले रिकार्ड पर भी लगाम कस दी थी 72 रनों से मैच जीत कर.

वाका स्टेडियम, पर्थ
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लौटते हैं रविवार को होने वाले मैच पर, जिसे वाका नहीं पर्थ स्टेडियम या 'ऑप्टस' में होना है. यहां की पिच को लेकर हमेशा से सवाल उठते रहे हैं कि क्या ये वाका की तरह हो सकती है.

वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट अथॉरिटी की मुख्य अधिकारी क्रिस्टिना मैथ्यूज क्रिकेट फ़ैन्स को लगातार ये आश्वासन देती रही हैं कि यहाँ की विकेट और वाका की विकेट में कोई फ़र्क़ नहीं है.

स्टेडियम में काम करने वाले एक ग्राउंडस्टाफ़ ने नाम न लिए जाने की शर्त पर बताया, "हमने सालों मेहनत करने के बाद एकदम वाका की तरह का ही विकेट बनाया है जो तेज़ गेंदबाज़ों के लिए परफ़ेक्ट है. इसे ड्रॉप-इन पिच कहते हैं और बाउंस के साथ स्विंग भी ख़ूब मिलता है".

वैसे पर्थ स्टेडियम की पिच को बैटिंग विकेट भी कहा जाने लगा है और 20-20 फ़ॉर्मैट में पहले बल्लेबाज़ी करने वालों का औसत 157 रन है और दूसरी पारी में बल्लेबाज़ी का औसत 154 रन.

लेकिन नया स्टेडियम वाका से हर चीज़ में बड़ा है. यहाँ क़रीब 70,000 दर्शक तो मैच देख ही सकते हैं, लेकिन बल्लेबाज़ों के लिए मैदान पार करना आसान नहीं है, क्योंकि ग्राउंड साइज़ मेलबर्न के 'एमसीजी' जितना ही है.

दक्षिण अफ़्रीका-भारत
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अनुभवी क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने बीबीसी हिन्दी को बताया, "मुझे वाका और पर्थ स्टेडियम की पिच पर फ़र्क़ नहीं दिखा है. अगर थोड़े से भी बादल रहे और हवा चली तो किसी भी गेंदबाज़ को यहाँ फ़ायदा मिलना तय है."

भारतीय कोच राहुल द्रविड़ भी इस बात पर गौर करते हुए भुवनेश्वर कुमार और मोहम्मद शमी पर अपना दांव लगाएंगे. शमी ने यहां खेले गए अपने टेस्ट मैच की एक पारी में तो छह विकेट लिए थे. दोनों गेंदबाज़ों को सिडनी में हुए पिछले मैच में अच्छी स्विंग मिल रही थी और उनकी पेस में जो कसर है वो पर्थ की पिच से मिल सकती है.

ज़्यादा सिरदर्द बल्लेबाज़ी का रहेगा, क्योंकि भारतीय बल्लेबाज़ों को दक्षिण अफ़्रीका के कम से कम 16 ओवर तेज़ गेंदबाज़ी के निकालने होंगे. पाकिस्तान के ख़िलाफ़ हुए पहले मैच में रोहित शर्मा और केएल राहुल शुरुआत में ही तेज़ गेंदबाज़ी का शिकार हो गए थे.

हालांकि सिडनी में रोहित शर्मा का फ़ॉर्म कुछ लौटता दिखा है लेकिन राहुल को उठती हुई तेज़ गेंदों पर विकेट गँवाने से बचना होगा. इस मैदान पर अपने पिछले टेस्ट मैच में राहुल ने पहली पारी में 2 और दूसरी पारी में 0 रन बनाए थे.

अगर टी-20 मुक़ाबलों की बात हो तो पर्थ स्टेडियम के इतिहास में पांच मैच हो चुके हैं और एशिया की किसी भी टीम को जीत नहीं मिली है. पिछले मुक़ाबले में यहीं पर ज़िम्बॉब्वे ने पाकिस्तान को एक रन से हराया.

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