देश में बढ़ा भ्रष्टाचार, अब भ्रष्ट देशों की सूची में इस नंबर पर है भारत: रिपोर्ट

नई दिल्ली। दुनियाभर में भ्रष्टाचार एक बड़ी मुसीबत बना हुआ है। इसपर रोकथाम के लिए भारत में भी कई उपाय किए गए लेकिन फिर भी हमारा देश इस मामले में दो पायदान फिसल गया है। इसका मतलब ये कि भारत में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। दुनियाभर के 180 देशों की सूची में भारत का स्थान अब 80वां है। वैश्विक स्तर पर भ्रष्टाचार की रोकथाम करने वाली संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल द्वारा जारी भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक (सीपीआई) में ये नतीजे सामने आए हैं।

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    सार्वजनिक क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के आधार पर तय की गई रैंकिंग

    सार्वजनिक क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के आधार पर तय की गई रैंकिंग

    विशेषज्ञों और व्यापार के क्षेत्र से जुड़े लोगों के मुताबिक रिपोर्ट में किसी देश या क्षेत्र की रैंकिंग सार्वजनिक क्षेत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के आधार पर तय की गई है। इस रिपोर्ट को विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की वार्षिक बैठक में जारी किया गया है। भारत के साथ इस रैंक पर चीन, बेनिन, घाना और मोरक्को भी बने हुए हैं। वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान में हालात और भी खराब हैं, इस देश की रैंक 120वीं है। भारत बीते साल 78वें स्थान पर था। लेकिन इस बार दो पायदान फिसल गया है।

    शीर्ष पर डेनमार्क और न्यूजीलैंड

    शीर्ष पर डेनमार्क और न्यूजीलैंड

    वहीं सूची में शीर्ष पर डेनमार्क और न्यूजीलैंड संयुक्त रूप से बने हुए हैं। उसके बाद फिनलैंड, सिंगापुर, स्वीडन और स्विटजरलैंड का स्थान है। सातवें स्थान पर नॉर्वे, आठवें पर नीदरलैंड और नौवें स्थान पर जर्मनी और लग्जमबर्ग हैं। रिपोर्ट को जारी करने के बाद ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने कहा कि उन देशों में भ्रष्टाचार अधिक है, जहां चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर पैसे का इस्तेमाल होता है और जहां सरकारें अमीर और रसूखदार लोगों की ही सुनती हैं।

    भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना क्यों हुआ मुश्किल?

    भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना क्यों हुआ मुश्किल?

    गैर सरकारी एजेंसी ने कहा है कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाना इसलिए भी कठिन हो गया है क्योंकि भारत और ऑस्ट्रेलिया जैसे लोकतांत्रिक देशों में बड़े कॉरपोरेट समूह राजनीतिक दलों को अनुचित और अपारदर्शी तरीके से धन देकर नियमों को प्रभावित करते हैं। इस रिपोर्ट का उद्देश्य भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों को मजबूत करना, भ्रष्टाचार के खिलाफ नागरिकों की आवाज सशक्त करना और समाज को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। सूची में सबसे निचली रैंक पाने वाले देशों में अफगानिस्तान (173), यमन (177), सीरिया (178), दक्षिणी सूडान (179) और सोमालिया (180) हैं।

    यहां क्लिक कर आप ये पूरी रिपोर्ट देख सकते हैं।

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