अमेरिकी टैरिफ के दबाव में छोटे उद्योगों को सहारा देने की तैयारी, केंद्र सरकार ला सकती है 4 नई योजनाएं
India US trade dispute: भारत और अमेरिका के बीच व्यापार तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में 50% टैरिफ का बचाव करते हुए कहा कि भारत दुनिया का सबसे अधिक शुल्क लगाने वाला देश है और लंबे समय से व्यापार संबंध एकतरफा रहे हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत में अमेरिकी मोटरसाइकिल हार्ले डेविडसन पर कभी 200% तक ड्यूटी लगती थी, जिसकी वजह से कंपनी को यहां उत्पादन शुरू करना पड़ा।
इस बीच, अमेरिकी टैरिफ का असर भारतीय उद्योगों और खासकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) पर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। केंद्र सरकार इस प्रभाव को कम करने के लिए कोविड काल में लागू हुई योजनाओं की तरह नई स्कीमें शुरू करने पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सरकार छोटे निर्यातकों और घरेलू उद्योगों को राहत देने के लिए कम से कम चार बड़ी योजनाओं का ऐलान कर सकती है।

इनमें आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी योजना जैसी स्कीमें शामिल हो सकती हैं, जिनमें 100% सरकारी गारंटी के साथ बिना जमानत के लोन दिया जाएगा। संकटग्रस्त एमएसएमई के लिए सबऑर्डिनेट डेब्ट योजना, क्रेडिट गारंटी फंड और फंड ऑफ फंड्स जैसे विकल्प भी दोबारा लागू किए जा सकते हैं।
इसके साथ ही सरकार एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन को तेज करने की तैयारी में है, ताकि निर्यात ऑर्डर प्रभावित न हों और खाली पड़ी क्षमता का सही उपयोग हो सके।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर अमेरिका ने 50% टैरिफ को लंबे समय तक जारी रखा, तो भारत के टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स और छोटे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर गहरा असर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार की नई पहल एमएसएमई को वित्तीय राहत देने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा बनाए रखने में मददगार हो सकती है।
दूसरी ओर, रूस के साथ भारत की रक्षा साझेदारी भी चर्चा में है। रूसी एजेंसी तास के मुताबिक, भारत एस-400 मिसाइल सिस्टम की अतिरिक्त आपूर्ति को लेकर बातचीत कर रहा है। यह सौदा भारत की सामरिक क्षमता को और मजबूत करेगा, हालांकि यह अमेरिका के साथ व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों पर नए सवाल भी खड़े कर सकता है।












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