बांग्लादेश और नेपाल के बीच बढ़ती दोस्ती का भारत कनेक्शन क्या है

नेपाल भारत बांग्लादेश बिजली निर्यात
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नेपाल भारत बांग्लादेश बिजली निर्यात

नेपाल अपने यहां उत्पादित 50 मेगावाट बिजली बांग्लादेश को देने पर सहमत हुआ है. इसकी पुष्टि करते हुए नेपाल के ऊर्जा सचिव ने कहा कि 'बांग्लादेश को आने वाले मॉनसून के दौरान बिजली आपूर्ति करने को लेकर भारतीय अधिकारियों के साथ सहमति बनी है.'

ऊर्जा सचिव दिनेश कुमार घिमिरे ने बीबीसी से बातचीत में बताया कि 'इसे लेकर बीते हफ़्ते राजस्थान के माउंट आबू में हुई ऊर्जा बैठक में भारत के साथ समझौता हुआ.'

बीते शुक्रवार को नेपाल और भारत के ऊर्जा सचिवों के बीच संयुक्त कार्यकारी समूह और शनिवार को संयुक्त संचालन समिति की बैठकें हुई थीं.

सचिव स्तर की बैठक में नेपाल का नेतृत्व घिमिरे ने किया जबकि भारत का नेतृत्व विद्युत मंत्रालय के सचिव आलोक कुमार ने किया.

समझौते में क्या सहमति बनी


घिमिरे ने बताया कि सचिव स्तर की बैठक में अंतरराष्ट्रीय ढांचागत विकास समेत कई दूसरे मुद्दों पर भी सहमति बनी. इसमें सबसे अहम है भारत के ज़रिए बांग्लादेश को बिजली भेजने का समझौता.

उन्होंने कहा, 'नेपाल से बांग्लादेश को बिजली भेजने में बहुत अच्छी प्रगति हुई है. हम पहले से ही इस मुद्दे को उठाते रहे हैं. इस साल भारत ने कहा कि हम देखेंगे कि जो परियोजना चल रही है, उससे बिजली भेजी जाती है या नहीं."

घिमिरे ने ये भी बताया कि, " हम भारतीय निवेश से चल रहे 52 मेगावाट की लिखु-4 परियोजना से बिजली भेजेंगे. वे इसके लिए एक माहौल तैयार करेंगे."

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भारत से कैसे मिलेगी मदद


घिमिरे के मुताबिक़, नेपाल और भारत के केंद्रीय बिजली नियामकों की मंज़ूरी लेने, कुछ अन्य काग़ज़ी कार्रवाई और तकनीकी मुद्दों की व्यवस्था करने के बाद अब भारत के बुनियादी ढांचे के माध्यम से बांग्लादेश को बिजली भेजना संभव हो सकेगा.

घिमिरे ने कहा कि यह बहुत अच्छी और सकारात्मक बात है.

उन्होंने इस बात पर ख़ुशी ज़ाहिर की कि भारत के बिजली नियामक निकायों से मंज़ूरी लेने की प्रक्रिया बहुत जटिल नहीं है.

उन्होंने कहा कि, "यह लगभग ऐसा है जैसे अनुमति का मुद्दा पहले से ही हल किया जा चुका हो."

यानी ये बात अब पक्की हो गई है कि अगले मॉनसून से बांग्लादेश को बिजली भेजना शुरू हो जाएगा.

घिमिरे ने ये भी बताया कि वर्तमान में नेपाल और भारत के बीच केवल एक ही अंतरराष्ट्रीय ट्रांसमिशन लाइन काम कर रही है. दोनों देश आने वाले दिनों में दो नई ट्रांसमिशन लाइनों को "एक निश्चित तिथि तक पूरा" करने पर सहमत हुए हैं.

इस लिहाज से घिमिरे ने इसे "ऊर्जा बैठक की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि" क़रार दिया.


बैठक में किन-किन मुद्दों पर हुए समझौते

  • ढालकेबार-मुज़फ़्फ़्रपुर 400 किलोवोल्ट (KV) ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से आयात-निर्यात बिजली क्षमता को 600 मेगावाट से बढ़ाकर 800 मेगावाट करना
  • अरुण तृतीय जलविद्युत परियोजना से उत्पादित बिजली के निर्यात के लिए निर्माणाधीन ढालकेबार-सीतामढ़ी 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन के माध्यम से अन्य क्षेत्रों से बिजली के आदान-प्रदान का अध्ययन करने के लिए संयुक्त तकनीकी टीम को निर्देश देना.
  • नेपाल में विभिन्न जलविद्युत परियोजनाओं से उत्पन्न बिजली को भारतीय बाज़ार में निर्यात करने के लिए एक अंतर-सरकारी समझौते में प्रवेश करने के नेपाल के प्रस्ताव पर भारत का सकारात्मक रुख़ दिखाना.
  • टनकपुर-महेंद्रनगर 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन से 70 से 80 मेगावाट बिजली के आयात और निर्यात का समझौता. और 200 मेगावाट तक बिजली के निर्यात का अध्ययन करने के लिए एक संयुक्त तकनीकी टीम का संचालन.
  • 132 केवी और कम क्षमता की मौजूदा ट्रांसमिशन लाइनों के माध्यम से बरसात के मौसम में नेपाल से बिहार में बिजली निर्यात करने के लिए आवश्यक तंत्र बनाना.
  • मार्च 2025 तक दूसरी अंतर्देशीय बुटवल-गोरखपुर 400 केवी ट्रांसमिशन लाइन के तहत भारतीय खंड के निर्माण को पूरा करने के लिए समझौते पर शीघ्र हस्ताक्षर.
  • नेपाल-भारत इनरुवा-पूर्णिया और लंबी-दोधरा-बरेली 400 केवी क्षमता की दो और अंतरराष्ट्रीय ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण 2027/28 और 2028/29 तक पूरा करना.

अगर बांग्लादेश को 50 मेगावाट बिजली के निर्यात के संबंध में नेपाल विशिष्ट परियोजनाओं के साथ प्रस्ताव देता है, तो भारतीय पक्ष भारत के बिजली आयात-निर्यात दिशानिर्देशों के अनुसार इसे स्वीकृति देगा.

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जानकारों की क्या राय है


इंडिपेंडेंट पावर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ऑफ़ नेपाल (IPPAN) के उपाध्यक्ष मोहन कुमार दांगी ने बांग्लादेश को बिजली के निर्यात के लिए किए गए समझौते को "एक अंधेरी रात में आशा की किरण" कहा.

दांगी ने कहा, ''पिछली बारिश में क़रीब दो अरब रुपये की बिजली बर्बाद हुई. तथ्य यह है कि इस तरह के समझौते पर सहमति को देख ऐसा लगता है कि नेपाल के लिए अंधेरी रात में आशा की किरण जग गई हो."

उन्होंने ये भी कहा कि इस समझौते के पीछे न केवल नेपाल की कोशिश है, बल्कि बांग्लादेश की "सफल कूटनीतिक पहल" भी काफ़ी अहम है.

नेपाल के पूर्व जल संसाधन सचिव शीतलबाबू रेग्मी ने कहा कि 'एक सकारात्मक बात ये रही कि भारत परियोजना को नामित करके बिजली निर्यात करने पर सहमत हो गया.'

उन्होंने कहा, "यह तो शुरुआत है, 50 मेगावाट बड़ी बात है. अगर इसे लागू किया जाता है तो हमें दरवाज़े और खोलने पर विचार करना चाहिए. फिर उस पर निर्माण करने और बड़े पैमाने पर आगे बढ़ने के लिए जगह है. यही वह रास्ता है जिस पर हमें जाना चाहिए."

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बांग्लादेश का क्या कहना है


पिछले हफ़्ते भारत और बांग्लादेश के विदेश सचिवों के बीच हुई एक बैठक में विदेश सचिव मसूद बिन मोमन ने मीडिया से कहा था कि 'भारत ने अपनी ज़मीन से नेपाल और भूटान से जलविद्युत आयात करने का आश्वासन दिया है.'

बांग्लादेश के अंग्रेज़ी अख़बार द डेली स्टार ने पिछले बुधवार को लिखा, "विदेश सचिव मसूद बिन मोमन ने जानकारी दी कि भारत ने बांग्लादेश को भारत के रास्ते नेपाल और भूटान से जलविद्युत आयात करने में सहायता का आश्वासन दिया है."

समाचार पत्र के अनुसार, बांग्लादेश के भीतर ट्रांसमिशन लाइनों से संबंधित "व्यावहारिक मुद्दों" पर भी चर्चा की गई.

भारतीय विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने पिछले सप्ताह अपनी नेपाल यात्रा समाप्त करते ही बांग्लादेश का दौरा किया.

क्वात्रा से मुलाकात के बाद बांग्लादेश के विदेश सचिव ने मीडिया को इसकी जानकारी दी और कहा कि क्वात्रा से नेपाल और भूटान से बिजली के आयात को लेकर अहम चर्चा हुई है.

क़रीब 6 महीने पहले यह बात सामने आई थी कि नेपाल और बांग्लादेश ने कम से कम 50 मेगावाट बिजली के आयात और निर्यात के लिए भारतीय भूमि और बुनियादी ढांचे का उपयोग करने का अनुरोध किया था.

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