बॉर्डर पर तनाव कम करने के लिए हॉटलाइन पर बात करेंगी भारत और चीन की सेनाएं

भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच टेलीफोन हॉटलाइन की शुरू की जाएगी। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है।

नई दिल्‍ली। भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों की सेनाओं के बीच टेलीफोन हॉटलाइन की शुरू की जाएगी। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से एक मीडिया रिपोर्ट में इस बात की जानकारी दी गई है। आपको बता दें कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिनों तक चीन के दौरे पर वुहान गए थे। यहां पर उनके और चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कई दौर की वार्ता हुई। दोनों नेताओं ने सीमा विवाद पर भी चर्चा की थी। दोनों नेता इस बात पर राजी हुए थे कि भारत-चीन के बीच फिर से कोई और डोकलाम जैसा एपिसोड न हो इसके लिए सेनाओं के लिए निर्देश जारी किए जाएंगे।

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    भारत और चीन हुए राजी

    भारत और चीन हुए राजी

    भारत और चीन इस बात पर राजी हो गए हैं कि भारतीय सेना और पीपुल्‍स रिपब्लिक ऑफ चाइना आर्मी (पीएलए) के बीच डायरेक्‍टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (डीजीएमओ) स्‍तर की हॉटलाइन शुरू की जाएगी। इसके अलावा एलएसी पर तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों की सेनाएं लगातार गश्‍त भी करेंगी। चीन और भारत की सेनाएं एक-दूसरे पर एलएसी पर तनाव को बढ़ाने का आरोप लगाते रहते हैं। भारत और चीन के बीच 3,488 किलोमीटर का है जो अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उत्‍तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्‍मू कश्‍मीर से होकर गुजरता है।

    विदेश मंत्री के जरिए हो पाता है संपर्क

    विदेश मंत्री के जरिए हो पाता है संपर्क

    रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी की ओर से जानकारी दी गई है कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच टेलीफोन हॉटलाइन की शुरुआत पिछले कई वर्षों से अटका हुआ मुद्दा है। हाल ही में चीन क साथ इस पर चर्चा की गई और दोनों देश अब इस पर राजी हो गए हैं। हॉटलाइन की गैर-मौजूदगी में भारत और चीन की सेनाओं को विदेश मंत्री के जरिए एक-दूसरे से संपर्क करना पड़ता है और यह एक लंबी प्रक्रिया बन जाती है। पिछले हफ्ते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्‍ट्रपति शी जिनपिंग जब वुहान में मिले थे तो दोनों नेताओं ने कहा था कि सेनाओं को आपसी भरोसे को बढ़ाना होगा। इसके अलावा बॉर्डर पर शांति और स्थिरता के लिए एक बेहतर तंत्र की जरूरत पर भी जोर दिया गया था।

    सीमा विवाद जस का तस

    सीमा विवाद जस का तस

    दोनों देश पिछले कई वर्षों से सीमा विवाद का हल चाहते हैं। इसके लिए 20 दौर की वार्ता भी हो चुकी है लेकिन अभी तक कोई हल नहीं निकल पाया है। अधिकारिक सूत्रों की ओर से कहा गया है कि भरोसे को बढ़ाने के लिए दोनों देशों की सेनाएं लगातार बॉर्डर पर गश्‍त करेंगी और साथ ही बॉर्डर पर फ्लैग मार्च भी होगा। डीजीएमओ स्‍तर की हॉटलाइन बिल्‍कुल उसी तरह‍ की होगी जिस तरह की हॉटलाइन भारत और पाक के बीच है। चीन ने इससे पहले एक प्रोटोकॉल का हवाला दिया था। इसके अलावा चीनी सेना के पुर्ननिर्माण की वजह से भी इस प्रक्रिया में देरी हो रही थी।

    कृप्‍या अपने क्षेत्र में वापस लौट जाएं

    कृप्‍या अपने क्षेत्र में वापस लौट जाएं

    हाल ही में लद्दाख और सिक्किम में भारत और चीन की सेनाओं के बीच कई बार आमना-सामना हो चुका है। लेकिन पिछले वर्ष डोकलाम विवाद के दौरान लद्दाख में जब पैंगॉग झील पर सेनाओं की तरफ से जब एक-दूसरे पर पत्‍थर फेंके गए तो मामला और बिगड़ गया था। प्रोटोकॉल के तहत जब-कभी एक-दूसरे की सीमा में सेनाएं दाखिल हो जाती हैं तो इंग्लिश में लिखे एक संदेश वाले बैनर के साथ उनसे वापस लौटने की अपील की जाती है। इस बैनर पर इंग्लिश में लिखा होता है, 'आपने बॉर्डर क्रॉस कर लिया है, कृप्या अपने क्षेत्र में वापस लौट जाएं।'

    21 बार हुई है चीन की तरफ से घुसपैठ

    21 बार हुई है चीन की तरफ से घुसपैठ

    इस वर्ष मार्च के मध्‍य तक चीन की सेनाओं की ओर से 21 बार बॉर्डर क्रॉस करने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। वहीं पिछले वर्ष अक्‍टूबर से नवंबर के बीच इस तरह की 30 घटनाएं दर्ज हुई थीं। हाल ही में चीन ने अरुणाचल प्रदेश के असफिला में भारतीय सेनाओं की गश्‍त का घुसपैठ करार दिया था। इस बात से भारत ने साफ इनकार कर दिया था। भारत ने चीन की सीमा पर नजर रखने के लिए तीन कमांड तैयार की हैं। कोलकाता में फोर्ट विलियम स्थित ईस्‍टर्न कमांड, सेंट्रल कमांड जिसका हेडक्‍वार्टर लखनऊ में है और नॉर्दन कमांड जिसका हेडक्‍वार्टर जम्‍मू कश्‍मीर के उधमपुर में हैं। वहीं, भारत पर नजर रखने के लिए चीन की दो कमांड हैं।

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