India China Faceoff : Doklam में 'दबंगई' की ताक में ड्रैगन, चीनी चालबाजी का सेटेलाइट तस्वीरों से पर्दाफाश !
India China Faceoff अरुणाचल में चीनी चालबाजी के बाद सुर्खियों में है। अब डोकलाम की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं जिनसे स्थायी निर्माण और चीनी सैनिकों के कब्जे का संकेत मिलता है।

भारत और चीन के बीच टकराव अरुणाचल के तवांग में हुआ। हालिया India China Faceoff के बाद ड्रैगन की कुटिलता एक बार फिर उजागर हुई है। इसी बीच कई सैटेलाइट तस्वीरें सामने आई हैं। इनमें नए पुल का निर्माण डोकलाम में स्थायी निर्माण और गांव जैसा स्ट्रक्चर देखा जा सकता है। इन तस्वीरों को बढ़ते चीनी कब्जे का संकेत माना जा रहा है।
दरअसल, डोकलाम भारत-तिब्बत-भूटान ट्राई-जंक्शन हैं। डोकलाम इलाके में कई साल पहले पैदा हुआ तनाव एक बार फिर सिर उठाता दिख रहा है। India China Faceoff का प्रमुख बिंदु रहे डोकलाम में चीनी पक्ष की तरफ से स्थायी निर्माण किए जाने के संकेत हैं। सेटेलाइट फोटो से इस बात के संकेत मिले हैं। इसी बीच सूत्रों ने कहा कि भारत क्षेत्र में चीनी निर्माण पर नजर रख रहा है।
भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई झड़प के कारण अरुणाचल प्रदेश में तनाव बढ़ने के साथ-साथ डोकलाम क्षेत्र से एक बार फिर असहज करने वाले निर्माण कार्य के प्रमाण सामने आए हैं। बता दें कि लगभग पांच साल पहले 2017 में डोकलाम में भारत और चीनी सैनिकों के बीच 73 दिनों तक गतिरोध बना रहा था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी सैनिक अभी भी भूटान में उस क्षेत्र पर कब्जा कर रहे हैं जो भारत को पसंद नहीं है। इंडिया टुडे ने खुफिया रिपोर्टों के हवाले से बताया, चीन ने सीमाओं के पार बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है, भारी हथियारों को स्टोर करने के लिए सुरंगों का निर्माण किया है और सीमाओं के पास अपनी ताकत दोगुनी कर दी है।
खबर में कहा गया, हालिया की रिपोर्टों से पता चलता है कि भारतीय सेना भी अपने बुनियादी ढांचे को बढ़ा रही है। भारत भी सैनिकों की तैनाती आगे बढ़ा रहा है। हालिया बदलाव इस हद तक हुए हैं कि दोनों पक्षों के सैनिकों के बीच कुछ ही मीटर की दूरी है। भारत चीनी पक्ष की तरफ से किए नए निर्माणों के बारे में चिंतित है। इन निर्माण कार्यों में एक पुल भी शामिल है। तनाव बढ़ने की आशंका है। अंतरराष्ट्रीय और सामरिक मामलों की समझ रखने वाले लोगों के मुताबिक दोनों देशों के बीच पांच साल पहले जैसा एक और गतिरोध पैदा हो सकता है।
सूत्रों का कहना है कि भारत चीनी निर्माण पर नजर रख रहा है और अगर यह महसूस होता है कि भारत की संप्रभुता से समझौता किया जा रहा है, तो कार्रवाई शुरू की जाएगी। डोकलाम के आस-पास के इलाकों में सड़क विस्तार गतिविधि की भी खबरें हैं, जहां 2017 में गतिरोध हुआ था। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया, अमेरिकी फर्म- प्लैनेट लैब्स पीबीसी से मिले हालिया उपग्रह तस्वीरों और कुछ अन्य रिपोर्टों से भी भारत चीन के बीच यथास्थिति में बदलाव की पुष्टि होती है।
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत-भूटान-चीन ट्राई-जंक्शन से लगभग 9 किमी दूर, चीन ने भूटानी क्षेत्र में अपनी उपस्थिति का विस्तार करना जारी रखा है। पंगडा गांव, 2020 में स्थापित किया गया। 2021 में विस्तार देखा गया। हाल ही में दक्षिण में और विस्तार देखा गया। हालिया उपग्रह इमेजरी के विश्लेषण से तोरसा जल निकाय पर एक पुल के साथ-साथ नई इमारतों के निर्माण की पुष्टि हुई है।
इस क्षेत्र में भारत की सबसे बड़ी चिंता सिलीगुड़ी का चिकन नेक भी है। सिलीगुड़ी कॉरिडोर के रूप में मशहूर इस इलाके के करीब चीनी पक्ष की ओर से निर्माण की संभावना है। चिकन नेक एक संकरा गलियारा है। सबसे संकरे बिंदुओं में से एक ये कॉरिडोर 22 किमी तक फैला है। उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला सिलीगुड़ी कॉरिडोर इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल की तस्वीरों में डोकलाम के दक्षिण में और अधिक ग्राउंड क्लीयरेंस दिखी है।
उत्तर में सीमा से लगभग 20 किमी दूर नए गांवों के समूह को लैंगमारपो कहा जाता है। इन क्षेत्रों में साइबुरु, चैतांगशा और कुले शामिल हैं। भूटानी क्षेत्र में चीन द्वारा स्थापित किए जा रहे गांवों में तेजी से निर्माण के हो रहा है।
बता दें कि करीब 63 महीने पहले अगस्त 2017 में 73 दिनों का भारत चीन गतिरोध तब शुरू हुआ जब भारतीय सैनिकों ने चीन और भूटान के बीच विवाद वाले क्षेत्र डोकलाम में चीनी सड़क निर्माण को रोक दिया। सामरिक मामलों के जानकारों ने यह महसूस किया कि सड़क संपर्क के कारण चीनी पक्ष को सिलीगुड़ी कॉरिडोर तक सीधी पहुंच मिलेगी, जिससे चीन को रणनीतिक लाभ मिलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक विरोध और दबाव के कारण चीन को निर्माण रोकना पड़ा था। यह भी चौंकाने वाला तथ्य है कि चीनी सैनिक अपनी मारक क्षमता लगातार बढ़ा रहे हैं। भारतीय सेना भी जवाबी कार्रवाई और बराबरी के प्रयास कर रही है।
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