पटना में अक्टूबर में हो सकती है I.N.D.I.A. की पहली रैली, 5 रैलियों का 5 एजेंडा अभी से तय ?
विपक्षी दलों के गठबंधन इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव एलायंस (I.N.D.I.A.) की पहली रैली भोपाल में ही तय हुई थी। कहा गया था कि यह अक्टूबर के पहले हफ्ते में होगी, जिसमें इंडिया के सभी घटक दलों के नेता जुटेंगे। लेकिन, मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ की आपत्ति की वजह से यह रद्द करनी पड़ गई।
अब जानकारी मिल रही है कि इंडिया ब्लॉक के नेता अपनी रैलियों की शुरुआत पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान से करना चाहते हैं, जो अतीत में भी सत्ता परिवर्तनों की गवाह बन चुका है। जानकारी के मुताबिक इसको लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी और राजद सुप्रीमो लालू यादव के बीच इसी हफ्ते बातचीत भी हो चुकी है।

5 शहर, 5 रैली, 5 एजेंडा!
हालांकि, रैलियों के लिए तय किए गए शहरों और उसके एजेंडे पर अभी कांग्रेस समेत अन्य दलों की सहमति मिलनी बाकी है। लेकिन, जानकारी ये है कि बिहार की राजधानी पटना में अक्टूबर के आखिर में इंडिया ब्लॉक की पहली रैली के बाद, इसी तरह की रैलियां महाराष्ट्र में नागपुर, तमिलनाडु में चेन्नई और असम में गुवाहाटी में किए जाने पर भी मंथन किया जा रहा है। आखिरकार एक रैली दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में भी आयोजित करने की तैयारी तल रही है।
रैलियों के एजेंडे पर दिख सकता है क्षेत्री राजनीति का असर
बताया जा रहा है कि अलग-अलग शहरों के लिए कुछ न कुछ खास एजेंडा तय किया जा रहा है, जो क्षेत्र की राजनीति को प्रमुखता देते हुए बनाया जा रहा है। जैसे पटना की रैली में विपक्षी दलों की ओर से जाति जनगणना और सामाजिक न्याय जैसे विषय उठाए जा सकते हैं, जो कि स्थानीय सत्ताधारी दलों जदयू और राजद का कोर एजेंडा रहा है।
पटना के बाद नागपुर, चेन्नई में हो सकती है रैली
लेकिन, जब विपक्षी ब्लॉक के नेता नागपुर में जुटेंगे तो कथित तौर पर संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बनाए जाने का मुद्दा उठाने की कोशिश हो सकती है। लेकिन, जब इंडिया ब्लॉक के यही नेता चेन्नई में जुटेंगे तो वह केंद्र और राज्यों के संबंधों का विषय उठा सकते हैं, जो डीएमकी की राजनीति के लिए खाद पानी का काम कर सकता है।
गुवाहाटी में भी गरजने की तैयारी में विपक्ष
लेकिन, गुवाहाटी पहुंचते ही मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष को इंडिया ब्लॉक के कोर एजेंडे में शामिल किया जा सकता है। कुल मिलाकर जानकारी यही मिल रही है कि जहां, जिस एजेंडे के प्रभावी होने के आसार हैं, विपक्ष वहां उसी पर फ्रंट फुट पर खेलने की तैयारी करना चाह रहा है।
दिल्ली के रामलीला मैदान में भी मेगा रैली की तैयारी
लेकिन, जब इंडिया ब्लॉक के नेता राजधानी दिल्ली में रैली के लिए जुटेंगे तो माना जा रहा है कि यहां के एजेंडे का आधार कांग्रेस की चुनावी राजनीति पर आधारित हो सकता है। मसलन, इसमें बेरोजगारी भत्ता (2019 के लोकसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने इसे अपना प्रमुख एजेंडा बनाया था), शहरी रोजगार गारंटी योजना, खाद्य सुरक्षा कानून को मजबूत करना, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे वादों की लाइन लगाई जा सकती है।
भोपाल में रद्द करनी पड़ी थी रैली
कांग्रेस के लोगों का कहना है कि भोपाल की रैली को रद्द करना सही था, क्योंकि वहां अरविंद केजरीवाल के साथ पार्टी नेताओं का मंच साझा करना मतदाताओं को सही संकेत नहीं देता। मध्य प्रदेश विधानसभा चुनावों में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अलग-अलग चुनाव लड़ रही है। एक कांग्रेस नेता के मुताबिक, 'विपक्षी गठबंधन में एकजुटता दिखाने और अक्टूबर के अंत में त्योहारों की शुरुआत से पहले कम से कम एक रैली आयोजित करने की जरूरत है....'
इंडिया ब्लॉक की पहली ही रैली कांग्रेस को अपने विरोधाभासों की वजह से रद्द करनी पड़ी, यह एक तथ्य है। इंडिया ब्लॉक में अभी भी ऐसे विरोधाभासों की कमी नहीं है। कभी पंजाब में मामला बिगड़ता दिखता है, तो कभी बंगाल में चिंगारी भड़कने लगती है। केरल में तो गला काट प्रतियोगिता को नकारना असंभव ही लगता है। ऐसे में अगर यह गठबंधन सभी घटक दलों के प्रमुख नेताओं के साथ संयुक्त रैली आयोजित कर लेता है तो यह उसके लिए बड़ी सफलता मानी जा सकती है।












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