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Independence Day 2024: पराधीन भारत से आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल इंडिया की झलक

Independence Day 2024: एक वक्त था जब भारत गुलाम था...लेकिन, 15 अगस्त 1947 में ब्रिटिश शासन से देश को आजादी मिल गई और अब भारत आजाद है। आजादी के बाद भारत आत्मनिर्भर है और डिजिटल हो चुका है और वैश्विक स्तर पर लगातार प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है।

15 अगस्त 1947 से पहले हमारा देश गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा हुआ था। विदेशी शासकों ने हमारी अर्थव्यवस्था को लूटा, हमारी संस्कृति को कुचला और हमारी आत्मनिर्भरता को खत्म करने का प्रयास किया। लेकिन, भारत के लोगों ने कभी हार नहीं मानी। आजादी के बाद से भारत ने एक लंबी दूरी तय की है और एक आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है।

Independence Day 2024

1947 से पहले ब्रिटिश शासन के दौरान भारत की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से विदेशी हितों पर निर्भर थी। हमारे प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया जाता था और हमारे उत्पादों को कम कीमत पर बेचा जाता था। भारत में औद्योगिक विकास बहुत धीमा था। ज्यादातर लोग कृषि पर निर्भर थे और देश में बेरोजगारी की समस्या गंभीर थी। भारत में तकनीकी विकास बहुत धीमा था। विज्ञान और अनुसंधान के क्षेत्र में बहुत कम निवेश किया जाता था।

इतना ही नहीं, देश में ऐसे लोगों की भारी आबादी बची थी जो पढ़ या लिख ​​नहीं सकते थे। हालांकि, 1951 में मात्र 18.3% की साक्षरता दर से 2018 में 74.4% साक्षरता दर तक, भारत ने एक सुशिक्षित राष्ट्र की स्थापना में एक लंबा सफर तय किया है। आजादी के बाद से भारत में साक्षर दर में बढ़ोतरी हुई और अब 2024 तक यह आंकड़ा लगातार बढ़ता रहा है। ना पढ़-लिख पाने के संघर्ष से निकलकर भारत डिजिटल इंडिया के सफर पर अपनी रफ्तार पकड़ चुका है।

आज आप दुनिया के किसी भी कोने में चले जाइए, आपको भारत के वैज्ञानिक, इंजीनियर, डॉक्टर और तकनीशियन मिल जाएंगे। लेकिन, इस दिशा में अभी भी बहुत काम करना बाकी है। भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए देश की नरेंद्र मोदी सरकार निरंतर काम कर रही है। अब धीरे-धीरे इसका असर दिखना शुरू हो चुका है। इस साल के पहले चार महीनों के दौरान चीन से आयात में कमी आई है।

कॉमर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी, फरवरी और मार्च में चीन से आयात में गिरावट आई जबकि अप्रैल में यह सपाट रहा। इतना ही नहीं, रक्षा मामलों में देश को आत्मनिर्भर बनाने पर खासा जोर दे रही है। मोदी सरकार के अब तक के बजटों में भी डिफेंस सेक्टर को तरजीह दिया जाता रहा है। वहीं, डिजिटल इंडिया का हमारा अभियान सफल रहा है और आज हम 5जी के युग में जी रहे हैं।

देश में गांव-गांव तक ऑप्टिकल फाइबर पहुंचाया जा रहा है, जिससे हम सूचना क्रांति के गवाह बने हैं। डिजिटल इंडिया की तरफ तेजी से बढ़ते हुए डिजिटल पेमेंट में भारत का हिस्सा काफी बढ़ा है। जहां तक भुगतान और कुल हिस्सेदारी की बात है तो शेष दुनिया के मुकाबले भारत का प्रदर्शन काफी बेहतर है।

भारत ने आत्मनिर्भर बनने के उठाए कई कदम

औद्योगिक विकास: भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा दिया है। आज भारत दुनिया की प्रमुख औद्योगिक शक्तियों में से एक है।

कृषि विकास: भारत ने कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। आज भारत खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है।

तकनीकी विकास: भारत ने सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा सॉफ्टवेयर निर्यातक देश है।

डिजिटल इंडिया: भारत सरकार ने डिजिटल इंडिया अभियान के तहत देश को डिजिटल रूप से सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इस अभियान के तहत डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास किया जा रहा है और डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है।

डिजिटल इंडिया अभियान के तहत भारत में हुए कई महत्वपूर्ण परिवर्तन:

मोबाइल इंटरनेट की पहुंच: भारत में मोबाइल इंटरनेट की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। आज लाखों लोग मोबाइल इंटरनेट का उपयोग कर रहे हैं।

डिजिटल पेमेंट: भारत में डिजिटल पेमेंट का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। आज लोग नकद के बजाय डिजिटल तरीके से भुगतान करना पसंद करते हैं।

ई-गवर्नेंस: भारत सरकार ई-गवर्नेंस को बढ़ावा दे रही है। आज कई सरकारी सेवाएं ऑनलाइन उपलब्ध हैं।

स्टार्टअप्स का उदय: भारत में स्टार्टअप्स का उदय हो रहा है। ये स्टार्टअप्स नई तकनीकों का उपयोग करके नए उत्पाद और सेवाएं विकसित कर रहे हैं।

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