Ind Vs Aus: गाबा में चूर-चूर हुआ ऑस्ट्रेलिया का घमंड, भारतीय क्रिकेट में नए युग की शुरुआत

Ind Vs Aus: ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर इस बार भारतीय टीम के रिकॉर्ड 10 से अधिक खिलाड़ी घायल हुए। तीसरे टेस्ट मैच में भारतीय टीम ने एक के बाद खिलाड़ियों के घायल होने के बाद जबरदस्त लड़ने की क्षमता का परिचय दिया और मैच को ड्रॉ कराकर ऑस्ट्रेलिया की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। तीसरे मैच में रविचंद्रन अश्विन और हनुमा विहारी ने चोट लगने के बाद भी मैदान नहीं छोड़ा और मैच को टीम इंडिया के लिए बचाया। इस मैच के दौरान ऑस्ट्रेलिया के कप्तान टिम पेन ने विकेट के पीछे अश्विन से कहा था कि गाब्बा में देख लेंगे, लेकिन उस वक्त शायद ही पेन ने सोचा होगा कि गाबा में भारतीय टीम उन्हें देख लेगी। जी हां, गाबा में ऑस्ट्रेलिया को कई भी टीम 1989 के बाद हरा नहीं सकी है, यही वजह थी कि पेन को लगा था कि गाबा में टीम इंडिया को हराकर वह सीरीज को अपने नाम कर सकते हैं।

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    पुजारा की गारंटी और गिल-पंत ने रचा इतिहास

    पुजारा की गारंटी और गिल-पंत ने रचा इतिहास

    पांचवे दिन जब भारतीय टीम बल्लेबाजी करने उतरी और सलामी बल्लेबाज रोहित शर्मा महज 7 रन के स्कोर पर आउट हो गए, उसके बाद शायद ही किसी ने सोचा हो कि भारत इस मैच में जीत दर्ज कर सकता था। पांचवे दिन भारतीय टीम को जीत के लिए 323 रन चाहिए थे, ऐसे में इतने बड़े लक्ष्य को हासिल करने की उम्मीद या तो रोहित शर्मा या फिर रिषभ पंत से लगाई जा सकती थी। बशर्ते टीम के पास इस बात की गारंटी हो की वह यह मैच किसी भी सूरत में गंवा नहीं सकते हैं और यह गारंटी चेतेश्वर पुजारा ने भारतीय टीम को दी। एक छोर पर जहां पुजारा मजबूत चट्टान की तरह अडिग डटे रहे तो दूसरे छोर पर बल्लेबाजों को तेजी से रन बनाने का भरोसा मिला। पुजारा ने दूसरी इनिंग में 211 गेंदों का सामना किया और 56 रनों की पारी खेली। पुजारा कई बार इस पारी के दौरान घायल हुए लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मैदान पर डटे रहे। मैच को बचाने की जहां पुजारा ने गारंटी दी तो शुभमन गिल, रिषभ पंत ने तेजी से बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम को ऐतिहासिक जीत तक पहुंचाया।

    चुनौतियों के बीच रचा इतिहास

    चुनौतियों के बीच रचा इतिहास

    ऑस्ट्रेलिया की जमीन पर ऑस्ट्रेलिया को हरा पाना किसी भी देश के लिए आसान नहीं होता है, लेकिन भारतीय टीम ने जिन मुश्किल परिस्थितियों में यह कीर्तिमान बनाया है उसे आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी। ऑस्ट्रेलिया दौरे की शुरुआत से ही एक के बाद एक खिलाड़ी लगातार घायल हो रहे हैं। टीम के कप्तान विराट कोहली पिता बनने की वजह से पहले ही स्वदेश लौट आए थे लिहाजा उनकी गैरमौजूदगी में टीम इंडिया को अगले तीन टेस्ट मैच खेलने थे। कोहली के अलावा पहले दो टेस्ट के लिए रोहित शर्मा भी टीम के लिए उपलब्ध नहीं थी। कोहली की गैरमौजूदगी में कप्तानी का जिम्मा संभाल रहे अजिंक्या रहाणे ने टीम को फ्रंट से लीड किया और सीरीज में जीत दर्ज करने में अहम भूमिका निभाई।

    अबतक की सबसे मजबूत भारतीय बेंच

    अबतक की सबसे मजबूत भारतीय बेंच

    कप्तान कोहली के अलावा मोहम्मद शमी के चोटिल होने की वजह से टीम के सामने तेज गेंदबाजी की बड़ी समस्या खड़ी हुई। एक के बाद एक पहले शमी, फिर रवींद्र जडेजा, जसप्रीत बुमरा, हनुमा विहारी, रविचंद्रन अश्विन, हनुमा विहारी, केएल राहुल, घायल होकर टीम से बाहर हुए। लेकिन बड़ी बात यह है कि इन खिलाड़ियों की कमी टीम को नहीं महसूस हूई और भारतीय टीम की बेंच की ताकत इस सीरीज में देखने को मिली। मोहम्मद सिराज, शुभमन गिल, वॉशिंगटन सुंदर, शार्दुल ठाकुर, टी नटराजन, नवदीप सैनी को इस सीरीज में मौका मिला और हर किसी ने खुद को ऑस्ट्रेलिया के अहम दौरे पर साबित किया।

    क्यों खास है यह जीत

    क्यों खास है यह जीत

    विश्व क्रिकेट में ऑस्ट्रेलिया का हमेशा से ही दबदबा रहा है, लेकिन भारतीय टीम ने हर बार ऑस्ट्रेलिया के इस दबदबे को चुनौती दी है। इस सीरीज की शुरुआत से पहले शायद ही कोई ऐसा क्रिकेट एक्सपर्ट हो जिसने कहा हो कि भारतीय टीम इस सीरीज में जीत दर्ज करके गाबा में इतिहास बनाएगी, लेकिन भारतीय टीम के मजबूत इरादों के सामने ऑस्ट्रेलिया की टीम का मनोबल बुरी तरह से टूटा। इससे पहले 2001 में भारतीय टीम ने लगातार 16 मैच जीत चुकी ऑस्ट्रेलिया टीम का विजय रथ रोका था और एक बार फिर से 32 साल बाद किसी भी टीम ने ऑस्ट्रेलिया को ब्रिस्बेन में टेस्ट में मात दी है।

    इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा यह रिकॉर्ड

    इतिहास के पन्नों में दर्ज होगा यह रिकॉर्ड

    भारतीय टीम के लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में चौथी पारी में भारत ने तीसरा सबसे बड़ा स्कोर चेज किया है। इससे पहले 2998-09 में भारतीय टीम ने चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ चौथी पारी में 387 रन का लक्ष्य हासिल किया था और 1975-76 में पोर्ट ऑफ स्पेन में वेस्टइंडीज के खिलाफ 4-6 रन के स्कोर को चेज किया था। ब्रिस्बेन में 328 रन के लक्ष्य को चौथी पारी में चेज करके भारतीय टीम ने बड़ा कीर्तिमान अपने नाम किया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किसी भी ठीम के सबसे बड़े रन चेज की बात करें तो भी यह तीसरा सबसे बड़ा रन चेज है। इससे पहले पर्थन में दक्षिण अफ्रीका ने 2008-09 में 414 रन का लक्ष्य चेज किया था, 1928-29 में इंग्लैंड ने मेलबर्न में 332 रन का लक्ष्य चेज किया था। इस मैच में एक और बड़ा रिकॉर्ड टेस्ट मैच के पांचवे दिन सर्वाधिक रन का भी बना है। पांचवे दिन टेस्ट मैच में सर्वाधिक 404 रन का रिकॉर्ड है जिसे ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड के खिलाफ लीड्स में 1948 में बनाया था। 1984 में वेस्टइंडीज ने इंग्लैंड के खिलाफ 344 रन बनाए थे जबकि ब्रिस्बेन में आज भारत ने पांचवे दिन 325 रन बनाने का कीर्तिमान अपने नाम किया है जोकि टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पांचवे दिन तीसरा सर्वाधिक स्कोर है।

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