त्रिपुरा में BJP सरकार की मुश्किलें बढ़ीं, मारपीट का आरोप लगा सहयोगी ने दी बड़ी धमकी

नई दिल्ली- त्रिपुरा में बीजेपी सरकार पर उसके ही सहयोगी दल ने ही बहुत बड़ा आरोप लगाया है। राज्य में भाजपा की सहयोगी पार्टी आईपीएफटी ने आरोप लगाया है कि लोकसभा चुनाव के बाद बीजेपी के लोग उसके कार्यकर्ताओं को निशाना बना रहे हैं।। पार्टी ने धमकी दी है कि अगर हिंसा को नहीं रोका गया तो, वह दूसरे विकल्पों पर भी विचार करेगी।

लोकसभा चुनाव के बाद हमले के आरोप

लोकसभा चुनाव के बाद हमले के आरोप

इंडियन एक्सप्रेस की खबरों के मुताबिक इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) ने भारतीय जनता पार्टी पर उसके कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न का आरोप लगाया है। पार्टी के प्रवक्ता मंगल देबबर्मा ने एक प्रेस कांफ्रेंस में साफ किया है कि, 'हालिया लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी के लोग आईपीएफटी समर्थकों को लगातार निशाना बना रहे हैं। हम काफी डरे हुए हैं और हमारे सहयोगियों द्वारा लगातार हमारा उत्पीड़न हो रहा है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार में सहयोगी होने के बावजूद हमें धमकियों और मारपीट का सामना करना पड़ रहा है। इस पर रोक लगनी चाहिए।'

गठबंधन से अलग होने की धमकी!

गठबंधन से अलग होने की धमकी!

सबसे बड़ी बात ये है कि बीजेपी की सहयोगी ने हिंसा नहीं रुकने की स्थिति में दूसरे विकल्पों पर विचार करने की बात कही है। हालांकि, बीजेपी सरकार से समर्थन वापस लेने के सवाल पर आईपीएफटी के प्रवक्ता फिलहाल कन्नी काटते दिख रहे हैं। दरअसल, इस पार्टी का आरोप है कि 23 मई को लोकसभा चुनाव नतीजे सामने आने के बाद आईपीएफटी के कार्यकर्ताओं पर हुए हमले में उसके सौ से ज्यादा कार्यकर्ता जख्मी हुए हैं। मंगल देबबर्मा के मुताबिक हिंसा का सबसे ज्यादा असर जोईबाड़ी सब डिविजन, पश्चिमी त्रिपुरा के जाम्पुईजाला सब डिविजन और उत्तर त्रिपुरा के सदर सब डिविजन के साथ ही खोवाई और धालाई जिलों में देखे गए हैं।

बीजेपी ने आरोपों का खारिज किया

बीजेपी ने आरोपों का खारिज किया

दरअसल 60 सदस्यीय त्रिपुरा विधानसभा में बीजेपी के 35 विधायक हैं और आईपीएफटी के 8 विधायक भी उसकी सरकार में सहयोगी हैं। उनकी मदद से बीजेपी को यहां दो-तिहाई विधायकों का समर्थन मिला हुआ है। लेकिन, अगर इस विवाद के कारण आईपीएफटी बीजेपी सरकार से समर्थन खींचती है, तो कई मामलों में बीजेपी के लिए विधानसभा से मनचाहा बिल पास कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। आईपीएफटी के प्रवक्ता का कहना है कि, 'बीजेपी अपना खुद का सपोर्ट बेस बनाने की कोशिश कर रही है। उन्हें लगता है कि अब आईपीएफटी की जरूरत नहीं है।' हालांकि, बीजेपी के प्रवक्ता अशोक सिन्हा ने इंडिजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के दावों को यह कहकर खारिज कर दिया है कि वह धमकियां देकर भाजपा पर दबाव बनाने की ताक में है। उनकी दलील है कि बीजेपी हिंसा की राजनीति पर भरोसा नहीं करती।

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